सैन्य क्षेत्रों में एआई की तैनाती से पहले वैश्विक नियम बनाना जरूरी: चीन में भारतीय विशेषज्ञ

सैन्य क्षेत्रों में एआई की तैनाती से पहले वैश्विक नियम बनाना जरूरी: चीन में भारतीय विशेषज्ञ

सैन्य क्षेत्रों में एआई की तैनाती से पहले वैश्विक नियम बनाना जरूरी: चीन में भारतीय विशेषज्ञ
Modified Date: September 18, 2026 / 04:25 pm IST
Published Date: September 18, 2026 4:25 pm IST

(के जे एम वर्मा)

बीजिंग, 18 सितंबर (भाषा) चीन में आयोजित एक सालाना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संवाद मंच पर एक भारतीय विशेषज्ञ ने कहा कि एआई आधारित प्रणालियों के युद्ध के मैदान तक पहुंचने से पहले ही सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए अनुसंधान और रक्षा योजना के स्तर पर ही नियम तय किए जाने चाहिए।

चीन के प्रमुख वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संवाद मंच ‘बीजिंग शियांगशान फोरम’ में ‘‘एआई और भविष्य की लड़ाई’’ विषय पर मनोहर पर्रिकर रक्षा अनुसंधान और विश्लेषण संस्थान के महानिदेशक सुजान आर. चिनॉय ने कहा कि एआई आधारित प्रणाली को असल संघर्षों में तैनात करने से पहले सैन्य एआई के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम बनाने की बहुत जरूरत है।

चिनॉय ने कहा कि विशेषज्ञों और रणनीति निर्माताओं के अनुसार, एआई आधुनिक युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल रहा है, जिससे फैसले लेने का समय कम हो रहा है और नई कमजोरियां पैदा हो रही हैं, जिनके लिए तुरंत वैश्विक नियमों की जरूरत है।

यहां 15-16 सितंबर को आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री डोंग जून ने एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच के तौर पर साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर कोशिश करने का आह्वान किया।

डोंग ने इस बात पर जोर दिया कि आज की एक-दूसरे पर निर्भर दुनिया में, देशों के बीच जितना अधिक सहयोग होगा, दुनिया उतनी ही सुरक्षित होगी। उन्होंने संकल्प लिया कि चीनी सेना अंतरराष्ट्रीय निष्पक्षता और न्याय के साथ-साथ वैश्विक शांति और स्थिरता की रक्षा में योगदान देने के लिए तैयार है।

‘बीजिंग शियांगशान फोरम’ का आयोजन ‘चाइना एसोसिएशन फॉर मिलिट्री साइंस’ और ‘चाइना इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ ने मिलकर किया है और इसमें 100 से ज्यादा देशों, क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के मेहमान शामिल हुए।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इस फोरम में 100 से अधिक देशों, क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लगभग 2,000 आधिकारिक प्रतिनिधि, विद्वान और पर्यवेक्षक शामिल हुए।

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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