घोड़े वास्तव में डर को भांप सकते हैं और इससे उनके व्यवहार में बदलाव आता है: अध्ययन

घोड़े वास्तव में डर को भांप सकते हैं और इससे उनके व्यवहार में बदलाव आता है: अध्ययन

घोड़े वास्तव में डर को भांप सकते हैं और इससे उनके व्यवहार में बदलाव आता है: अध्ययन
Modified Date: January 24, 2026 / 01:25 pm IST
Published Date: January 24, 2026 1:25 pm IST

(रॉबर्टा ब्लेक, एंग्लिया रस्किन विश्वविद्यालय)

कैम्ब्रिज, 24 जून (द कन्वरसेशन) इंसान लंबे समय से यह मानते आए हैं कि घोड़े ‘‘डर को भांप सकते हैं’’। घबराए हुए घुड़सवारों को अक्सर कहा जाता है, ‘‘आराम करो, वरना घोड़ा इसे महसूस कर लेगा’’। हालांकि, हाल तक इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं था और यह धारणा थी कि इस तरह की बातें सिर्फ लोककथा है उससे ज्यादा कुछ नहीं है।

एक नए अध्ययन से पता चला है कि यह धारणा मिथक नहीं है। इसके परिणामों से पता चलता है कि घोड़े मानवीय भावनाओं से जुड़े रासायनिक संकेतों को भांप सकते हैं और ये संकेत उनके व्यवहार और शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

पिछले शोधों में मनुष्यों और घोड़ों के बीच भावनात्मक संचरण के एक रूप की ओर इशारा किया गया है। यह एक ऐसी घटना है जिसमें एक व्यक्ति या जानवर की भावनात्मक स्थिति दूसरे की भावनात्मक स्थिति को प्रभावित करती है। लेकिन यह पहला अध्ययन है जिसमें इस बात के प्रमाण मिले हैं कि घोड़े अपनी सूंघने की क्षमता के जरिए मनुष्यों के भय को पहचान सकते हैं।

घोड़े अपने आसपास की दुनिया को समझने के लिए अपनी सूंघने की क्षमता पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं। उनकी सूंघने की प्रणाली हमारी तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील होती है, जिससे वे पर्यावरण में सूक्ष्म रासायनिक अंतरों का पता लगा सकते हैं।

वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि घोड़े सूंघकर सबसे पौष्टिक भोजन का चुनाव कर सकते हैं। 2016 के एक अध्ययन में पाया गया कि घोड़े भोजन का चुनाव केवल स्वाद के आधार पर नहीं, बल्कि पोषक तत्वों (जैसे प्रोटीन) की मात्रा के आधार पर करते हैं और खाने के बाद उनके शरीर की प्रतिक्रिया भविष्य में उनके भोजन संबंधी चुनावों को प्रभावित करती है।

तो घोड़े हमारे डर को कैसे भांप सकते हैं? दरअसल, मानवीय भावनाओं के साथ शारीरिक बदलाव जुड़े होते हैं। जब लोग डर या तनाव महसूस करते हैं, तो उनके शरीर, चेहरे और आवाज में बदलाव आ जाता है। उनके शरीर से एड्रीनेलिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन निकलते हैं, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और पसीने की संरचना बदल जाती है। इन बदलावों से शरीर की गंध का रासायनिक स्वरूप बदल जाता है, जिससे उनकी भावनात्मक स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है।

नए अध्ययन में ऐसे प्रमाण मिले हैं कि घोड़े न केवल मानवीय भावनात्मक गंधों को भांप लेते हैं बल्कि उन पर प्रतिक्रिया भी देते हैं। अध्ययन में घोड़ों को इंसानी शरीर की गंध के संपर्क में लाया गया।

शोध में शामिल कुछ प्रतिभागियों को डर पैदा करने के लिए एक डरावनी फिल्म का अंश दिखाया गया और कुछ को खुशनुमा डांस सीन जैसे क्लिप दिखाए गए। इस दौरान शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के बगल में रूई के पैड लगाकर भावनात्मक जुड़ाव वाली गंधों के नमूने भी एकत्र किए।

घोड़ों को रुई के पैड के माध्यम से भय उत्पन्न करने वाली गंधों के संपर्क में लाने पर पाया गया कि वे अधिक सतर्क हो गए, अचानक होने वाली घटनाओं पर ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगे और इंसानों के पास आने में कम इच्छुक रहे। इतना ही नहीं, उनकी हृदय गति में अत्यधिक वृद्धि देखी गई जो तनाव का संकेत है। महत्वपूर्ण बात यह है कि घोड़ों की ये प्रतिक्रियाएं मनुष्यों के डर दिखाने वाले दृश्य या आवाज के बिना ही हुईं।

पूर्व के शोधों से पता चला है कि घोड़े मनुष्यों की भावनात्मक अवस्थाओं के प्रति संवेदनशील प्रतीत होते हैं। मई 2025 के एक अध्ययन में घोड़ों को ऐसे वीडियो दिखाए गए जिनमें मनुष्य अपने चेहरे के भावों और आवाज में भय, खुशी या तटस्थ भावनाओं को व्यक्त कर रहे थे।

शोधकर्ताओं ने वीडियो देखते समय घोड़ों की हृदय गति, व्यवहार और चेहरे के भावों को मापा। भय या प्रसन्नता से भरे मानवीय भावों को देखने पर घोड़ों की हृदय गति सामान्य भावों की तुलना में बढ़ गई, जो भावनात्मक उत्तेजना में वृद्धि का संकेत देती है।

भय वाले वीडियो के बाद घोड़े सतर्क की मुद्राओं में दिखे जैसे कि सिर ऊंचा करना, कान पीछे की ओर करना और तनाव से संबंधित हाव-भाव। वहीं, प्रसन्न भाव वाले वीडियो के देखने पर उनमें सकारात्मक भावनात्मक अवस्थाओं से जुड़े हाव भाव दिखे जैसे कि नथुनों का नहीं फड़कना और कान में कोई हरकत नहीं।

ये निष्कर्ष भावनात्मक संचरण के अनुरूप हैं। उदाहरण के लिए मनुष्यों और कुत्तों के बीच भावनात्मक संचरण देखा गया है और ये परिणाम बताते हैं कि घोड़े भी मानवीय भावनाओं से प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, इन अध्ययनों से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि घोड़े मनुष्यों की तरह भय को समझते हैं, या वे यह जानते हैं कि कोई व्यक्ति क्यों भयभीत है। साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि घोड़े भावनात्मक अवस्थाओं से जुड़े रासायनिक, दृश्य और ध्वनि संकेतों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।

गंध शायद एक व्यापक शारीरिक तंत्र का मात्र एक हिस्सा है। घोड़े इंसानों के हाव-भाव, मांसपेशियों में तनाव, सांस लेने के तरीके, हृदय गति और हलचल को समझने में माहिर होते हैं।

द कन्वरसेशन सुरभि अमित

अमित


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