पार्किंसंस के लक्षण कैसे मर्दों और औरतों में अलग होते हैं
पार्किंसंस के लक्षण कैसे मर्दों और औरतों में अलग होते हैं
(लिंडसे कॉलिन्स-प्रेनो, एडिलेड विश्वविद्यालय)
एडिलेड, 16 मार्च (द कन्वरसेशन) पार्किंसंस रोग सबसे तेजी से फैलने वाला तंत्रिका संबंधी विकार है, जिसके विश्व भर में एक करोड़ से अधिक मामले हैं। वर्तमान में लगभग 150,000 ऑस्ट्रेलियाई इस बीमारी से ग्रस्त हैं और प्रतिदिन 50 नए मामले सामने आ रहे हैं।
अनुमान है कि 2020 और 2050 के बीच पार्किंसंस से ग्रस्त लोगों की संख्या तीन गुना से अधिक हो जाएगी।
पार्किंसंस रोग से ग्रस्त लोगों और उनके प्रियजनों पर इसके भारी प्रभाव और हमारी अर्थव्यवस्था को होने वाले चौंका देने वाले नुकसान (कम से कम 10 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर प्रति वर्ष) के बावजूद, इस बीमारी के प्रकट होने और बढ़ने के तरीके के बारे में अब भी बहुत कुछ ऐसा है जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं।
हाल में पार्किंसंस रोग से ग्रस्त लगभग 11,000 ऑस्ट्रेलियाई लोगों पर किए गए एक बड़े पैमाने के अध्ययन से इसके लक्षणों, जोखिम कारकों और पुरुषों एवं महिलाओं पर इसके अलग-अलग प्रभावों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। आइए इस पर एक नज़र डालते हैं।
सबसे पहले, पार्किंसंस रोग क्या है?
पार्किंसंस एक लगातार बढ़ने वाली बीमारी है जिसमें मस्तिष्क के ‘सबस्टैंशिया नाइग्रा’ नामक भाग में डोपामाइन नामक रासायनिक संदेशवाहक का उत्पादन करने वाली कोशिकाएं मरने लगती हैं। इसके साथ ही मस्तिष्क में कई अन्य परिवर्तन भी होते हैं।
आमतौर पर इसे गति विकार माना जाता है। सामान्य मोटर लक्षणों में आराम की स्थिति में कंपन, धीमी गति (ब्रैडीकाइनेसिया), मांसपेशियों में अकड़न और संतुलन संबंधी समस्याएं शामिल हैं।
लेकिन पार्किंसंस रोग में कई कम ज्ञात गैर-गतिशील लक्षण भी शामिल होते हैं। इनमें निम्नलिखित हो सकते हैं:
मनोदशा में परिवर्तन
स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता में कठिनाई (जिसमें धीमी गति से सोचना, योजना बनाने या एक साथ कई कार्य करने में चुनौतियां और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई शामिल है)
नींद संबंधी विकार
स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की शिथिलता (जैसे कब्ज, निम्न रक्तचाप और मूत्र संबंधी समस्याएं)।
हालांकि इन्हें कभी-कभी पार्किंसंस के ‘अदृश्य’ लक्षण कहा जाता है, लेकिन ये अक्सर गति विकार लक्षणों की तुलना में जीवन की गुणवत्ता पर अधिक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
तो, नया शोध हमें क्या बताता है?
इस अध्ययन में ‘क्यूआईएमआर बर्गहोफर मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के नेतृत्व में किए गए ‘ऑस्ट्रेलियाई पार्किंसंस जेनेटिक्स अध्ययन’ के अंतर्गत एकत्रित आंकड़ों का उपयोग किया गया। वर्ष 2020 में एक प्रायोगिक अध्ययन के बाद, इसे 2022 में एक सतत, राष्ट्रव्यापी अनुसंधान परियोजना के रूप में शुरू किया गया।
ऑस्ट्रेलिया में पार्किंसंस रोग से ग्रस्त लगभग 10,929 लोगों का सर्वेक्षण किया गया और आनुवंशिक विश्लेषण के लिए उनके लार के नमूने लिए गए। यह ऑस्ट्रेलिया में अध्ययन किया गया पार्किंसंस रोगियों का सबसे बड़ा समूह है और विश्व स्तर पर सक्रिय रोगियों का सबसे बड़ा समूह है।
अध्ययन के कई महत्वपूर्ण प्रारंभिक निष्कर्ष सामने आए।
1. गैर-गतिशील लक्षण आम हैं
अध्ययन ने इस बात की पुष्टि की कि गैर-गतिशील लक्षण कितने आम हैं, जिनमें गंध का पता नहीं लग पाना (52 प्रतिशत), स्मृति में परिवर्तन (65 प्रतिशत), दर्द (66 प्रतिशत) और चक्कर आना (66 प्रतिशत) जैसी बातें आम तौर पर सामने आये।
विशेष रूप से, 96 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अनिद्रा और दिन में नींद आने जैसी नींद संबंधी समस्याओं का अनुभव किया।
2. जोखिम कारकों की बेहतर समझ
इस अध्ययन से यह भी पता चला कि पार्किंसंस रोग के जोखिम को कौन-कौन से कारक प्रभावित कर सकते हैं।
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि हम अभी तक पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए हैं कि सबस्टैंशिया नाइग्रा में डोपामाइन उत्पन्न करने वाली कोशिकाएं अंततः क्यों नष्ट होने लगती हैं।
उम्र पार्किंसंस रोग का प्रमुख जोखिम कारक है। नए अध्ययन में पाया गया कि लक्षणों की शुरुआत की औसत आयु 64 वर्ष है और औसतन 68 वर्ष की उम्र में जांच में इस रोग का पता चलता है।
3. जीन और पर्यावरण दोनों की भूमिका
हाल के एक अध्ययन में पाया गया कि चार (रोगियों) में से एक व्यक्ति (25 प्रतिशत) के परिवार में पार्किंसंस रोग का इतिहास रहा है। लेकिन पार्किंसंस के केवल 10-15 प्रतिशत मामले ही विशिष्ट जीनों में उत्परिवर्तन के कारण होते हैं या उनसे दृढ़ता से जुड़े होते हैं।
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि परिवार न केवल जीन साझा करते हैं बल्कि अक्सर अपना वातावरण भी साझा करते हैं।
कीटनाशकों के संपर्क में आना और मस्तिष्क में चोट लगना जैसे कई पर्यावरणीय कारक भी पार्किंसंस रोग का खतरा बढ़ाते हैं।
पार्किंसंस रोग के अधिकतर मामले (85-90 प्रतिशत) संभवतः आनुवंशिक और पर्यावरणीय जोखिम कारकों के बीच जटिल परस्पर क्रिया और बढ़ती उम्र के कारण होते हैं।
4. लिंग के आधार पर अंतर
यह बीमारी पुरुषों में 1.5 गुना अधिक आम है। नए अध्ययन में, सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 63 प्रतिशत पुरुष थे।
पार्किंसंस रोग पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग तरह से प्रकट होता है और बढ़ता है।
अध्ययन में पाया गया कि लक्षण शुरू होने के समय महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम उम्र की थीं (63.7 बनाम 64.4 वर्ष) और पता चलने का समय भी (67.6 बनाम 68.1 वर्ष)। साथ ही, उनमें दर्द (70 प्रतिशत बनाम 63 प्रतिशत) की संभावना भी पुरुषों की तुलना में अधिक थी।
पुरुषों में महिलाओं की तुलना में स्मृति परिवर्तन (67 प्रतिशत बनाम 61 प्रतिशत) और आवेगी व्यवहार, विशेष रूप से यौन व्यवहार (56 प्रतिशत बनाम 19 प्रतिशत) अधिक देखा गया – हालांकि अधिकांश प्रतिभागियों में आवेगशीलता या तो बिल्कुल नहीं थी या केवल हल्की थी।
द कन्वरसेशन राजकुमार नरेश
नरेश

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