ऑस्ट्रेलिया में टैटू इंक में भारी मात्रा में मिले लेड, आर्सेनिक और अन्य विषैली धातु : नए अध्ययन में खुलासा

ऑस्ट्रेलिया में टैटू इंक में भारी मात्रा में मिले लेड, आर्सेनिक और अन्य विषैली धातु : नए अध्ययन में खुलासा

ऑस्ट्रेलिया में टैटू इंक में भारी मात्रा में मिले लेड, आर्सेनिक और अन्य विषैली धातु : नए अध्ययन में खुलासा
Modified Date: January 21, 2026 / 04:14 pm IST
Published Date: January 21, 2026 4:14 pm IST

( विलियम एलेग्जेंडर डोनाल्ड एवं जैक पी विओली, यूएनएसडब्ल्यू, सिडनी )

सिडनी, 21 जनवरी (द कन्वरसेशन) हाल के दशकों में ऑस्ट्रेलिया में बॉडी आर्ट का चलन बढ़ा है और अनुमान है कि लगभग 30 फीसदी वयस्कों ने कम से कम एक टैटू बनवाया है। इनमें से एक तिहाई लोगों के पास पांच या उससे अधिक टैटू हैं।

उद्योग और लाइफस्टाइल जगत की खबरों के अनुसार, टैटू के डिजाइन अब बड़े, रंगीन और जटिल होते जा रहे हैं। हालांकि टैटू आम होते गए हैं, लेकिन लोगों की त्वचा में डाले जाने वाली स्याही की सामग्री पर कम ध्यान दिया गया है।

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‘‘जर्नल ऑफ हैजार्डस मैटिरियल्स’’ में प्रकाशित एक अध्ययन में ऑस्ट्रेलिया में उपलब्ध टैटू की स्याही का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि इस स्याही में कैंसर उत्पन्न करने वाले ऑर्गेनिक रसायन और विषैली धातु ऐसे स्तर पर मौजूद हैं, जो वर्तमान यूरोपीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

टैटू की स्याही को जीवित ऊतक में डाला जाता है और यह मूल रूप से स्थायी रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है। शरीर में मौजूद पिगमेंट समय के साथ घुल सकते हैं, लिम्फ सिस्टम में फैल सकते हैं या धीरे-धीरे टूट सकते हैं। यूरोप में टैटू की स्याही की सुरक्षा पर मार्गदर्शन पिछले दशक से उपलब्ध है और 2022 से यूरोपीय संघ ने इस स्याही में धातु जैसे आर्सेनिक, कैडमियम और लेड तथा कुछ ऑर्गेनिक यौगिकों की सीमा तय की है।

ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई नियामक ढांचा नहीं है। यहां टैटू की स्याही की नियमित निगरानी नहीं होती और उपभोक्ताओं के पास सीमित जानकारी उपलब्ध है।

अध्ययन में 15 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की काली और रंगीन टैटू की स्याही का विश्लेषण किया गया। परिणाम दिखाते हैं कि हर स्याही में कम से कम एक यूरोपीय सुरक्षा मानक का उल्लंघन था। इसमें आर्सेनिक, कैडमियम, क्रोमियम और लेड जैसी विषैले धातुएं शामिल थीं। कुछ स्याही में एरोमैटिक अमाइन जैसी ऑर्गेनिक यौगिक भी पाए गए, जिन्हें यूरोप में उनके कैंसरजनक होने के कारण प्रतिबंधित किया गया है।

विशेष रूप से, काली स्याही में धातुओं की व्यापक शृंखला पाई गई, जबकि चमकीले रंग की स्याही में कुछ विशेष धातुओं की उच्च मात्रा थी। धातुएं अक्सर पिगमेंट को उज्जवल और स्थायी बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं। इनमें कुछ धातुएं अनजाने में शामिल होती हैं या निर्माण प्रक्रिया के अवशेष होती हैं। अध्ययन में टाइटेनियम, एल्यूमिनियम और जिरकोनियम जैसी धातुओं की अत्यधिक मात्रा पाई गई, जो लंबे समय तक संपर्क में रहने के संभावित प्रभावों के कारण चिंताजनक है।

शोधकर्ता बताते हैं कि यह अध्ययन केवल रासायनिक संरचना का विश्लेषण है और स्वास्थ्य प्रभावों का मूल्यांकन नहीं करता। स्वास्थ्य प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करते हैं, जैसे धातु का रूप, मात्रा, संपर्क का समय और व्यक्तिगत जीवविज्ञान। ऑस्ट्रेलिया का कैंसर काउंसिल कहता है कि टैटू को सीधे कैंसर से जोड़ने का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन वह स्याही की संरचना पर चिंता व्यक्त करता है।

अध्ययन यह दर्शाता है कि ऑस्ट्रेलिया में टैटू की स्याही की सुरक्षा पर नियामकीय अंतर है। कई स्याही वर्तमान यूरोपीय मानकों के अनुरूप नहीं हैं और इसे पहचानने या सुधारने का कोई नियमित प्रणाली नहीं है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि टैटू की स्याही की निगरानी बढ़ाई जाए और ऑस्ट्रेलियाई मानकों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप अद्यतन किया जाए। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर जानकारी और हानिकारक पदार्थों के अनावश्यक संपर्क से सुरक्षा मिल सकेगी।

टैटू व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का माध्यम हैं और इनकी सामग्री के बारे में जानकारी होना सुरक्षा और जागरूक निर्णय के लिए आवश्यक है।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा प्रशांत

प्रशांत


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