(क्रिस्टियान केहो, मेलबर्न विश्वविद्यालय, और एलिजाबेथ वेस्ट्रुप, डीकिन विश्वविद्यालय)
मेलबर्न, चार अप्रैल (द कन्वरसेशन) सप्ताहांत पर परिवार और दोस्त अक्सर अलग-अलग पीढ़ियों के साथ मिलकर एक साथ समय बिताने के लिए इकट्ठा होते हैं।
इस सप्ताहांत ईस्टर से जुड़ी परंपराओं ‘अंडों की खोज’ और ‘हॉट क्रॉस बन ‘ के बीच, शायद कोई ऐसा क्षण आ जाए जब कोई दूसरा वयस्क आपके बच्चे की परवरिश करने लगे और यह व्यवहार आपको अच्छा न लगे। हो सकता है कि उनका व्यवहार जरूरत से ज्यादा सख्त हो, या फिर उनका तरीका आपके परवरिश करने के तरीके से मेल नहीं खाता हो।
ऐसी परिस्थितियां अक्सर इसमें शामिल लोगों के “गलत व्यवहार” से कम और भावनाओं के ज्यादा उफान पर होने से जुड़ी होती हैं। यह बात बच्चों और बड़ों—दोनों पर समान रूप से लागू होती है। ऐसे में सवाल यह है कि आप इस स्थिति से कैसे निपट सकते हैं या क्या कदम उठा सकते हैं?
जब कोई दोस्त या रिश्तेदार आपके बच्चे से सख्त लहजे में बात करता है, उसे आदेश देता है या जरूरत से ज्यादा कठोर तरीके से अनुशासित करता है, तो यह स्थिति आपको असहज लग सकती है।
अक्सर ऐसी स्थितियां हमारी भावनाओं को छू जाती हैं। हममें से कई लोग सख्त परवरिश शैली में बड़े हुए हैं, इसलिए जब वही तरीका अपने बच्चों के साथ दोहराते हुए देखते हैं, तो हमें भावनात्मक रूप से झटका लगता है या असहजता महसूस होती है।
साथ ही, ऐसे जमावड़ों में शोर, ज्यादा उत्साह, मीठा खाना और दिनचर्या के बिगड़ने से माहौल इतना भारी हो जाता है कि बच्चे और बड़े-दोनों ही अपनी सहनशक्ति के करीब पहुंच जाते हैं और चिड़चिड़े या परेशान हो सकते हैं।
आप क्या कर सकते हैं?
अगर कोई दूसरा व्यक्ति आपके बच्चे के साथ ऐसे तरीके से व्यवहार करता है जो आपको पसंद नहीं है, तो उस समय सीधे टकराव के बजाय आप शांत और नरम तरीके से स्थिति को संभाल सकते हैं।
ऐसे में आप बच्चे के पास जाकर, उससे आंख मिलाकर और हल्के से छूकर मुस्कुरा सकते हैं। इससे आप बिना तनाव बढ़ाए स्थिति को अपने नियंत्रण में ले सकते हैं और बच्चे को संभाल सकते हैं। आप अपने बच्चे से प्यार से कह सकते हैं कि यहां शोर बढ़ रहा है, चलो थोड़ी देर के लिए बाहर चलते हैं-ताकि उसे शांत किया जा सके।
बाद में, अगर जरूरत हो, तो आप उस रिश्तेदार से शांत तरीके से बात कर सकते हैं। कोशिश करें कि बात विवेकपूर्ण ढंग से हो, न कि आलोचना या शिकायत के अंदाज में।
जब आप किसी और के बच्चे के साथ हों
कभी-कभी आपको ऐसे बच्चे से निपटना पड़ सकता है जो आपका अपना नहीं है-जैसे वह खिलौने छीन रहा हो, चिल्ला रहा हो या मिठाइयों की मेज गिराने वाला हो। यहां मुख्य बात यह है कि साफ और स्पष्ट निर्देश देकर बच्चे का सही दिशा में मार्गदर्शन किया जाये।
सीधे आदेश देने या गलती निकालने के बजाय, शांत और बिना किसी आलोचना के, समझाने वाले तरीके से प्रतिक्रिया देने की कोशिश करें।
इससे सीमाएं स्पष्ट बनी रहती हैं और माता-पिता की भूमिका का सम्मान भी होता है। जब आपकोबीच में दखल देना पड़े, तो अपनी आवाज शांत रखें और बात सरल शब्दों में करें।
दोस्तों और परिवार के साथ मिलना-जुलना मजेदार होता है, लेकिन सब कुछ हमेशा पूरी तरह सही नहीं होता। ऐसे मौकों पर बच्चों में कई तरह की भावनाएं आ सकती हैं—जैसे खुद को अलग-थलग महसूस करना, निराश होना, घबराहट या बहुत ज्यादा उत्साहित हो जाना। ऐसे समय में बड़े भी भावनात्मक रूप से प्रभावित हो सकते हैं और सभी की परवरिश के तरीके अलग-अलग होते हैं। इसलिए ऐसी स्थितियों में कुछ बुनियादी बातों को ध्यान में बनाए रखने की कोशिश करें।
बच्चों का व्यवहार उनकी अंदरूनी भावनाओं, जरूरतों और खुद को संभालने की क्षमता का संकेत होता है, खासकर ऐसे मौकों पर जहां माहौल बहुत उत्तेजनापूर्ण होता है।
जब बच्चे बहुत शरारती हो जाते हैं या अचानक रोने-चिल्लाने लगते हैं, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि वे ज्यादा उत्तेजित हो गए हैं, भावनात्मक रूप से दबाव में हैं या भूखे हैं।
ऐसी स्थिति में बच्चों को थोड़ा आराम, किसी दूसरी गतिविधि में लगाना, माता-पिता का प्यार और सहानुभूति देकर उन्हें शांत करना या फिर कुछ खाने के लिए देने की जरूरत होती है।
हमारी अपनी प्रतिक्रियाएं हमारे पिछले अनुभवों और उस समय की मानसिक स्थिति पर निर्भर करती हैं। इसे समझने से हम ज्यादा संतुलित तरीके से प्रतिक्रिया दे पाते हैं और अपने बच्चे को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं।
चाहे बच्चा आपका हो या किसी और का, सख्ती करने या डांटने की बजाय शांत और सम्मानजनक तरीके से मार्गदर्शन करना ज्यादा प्रभावी होता है।
(द कन्वरसेशन)
देवेंद्र पवनेश
पवनेश