परमाणु, समुद्री और खनिज क्षेत्रों में भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के संबंध और मजबूत हुए

परमाणु, समुद्री और खनिज क्षेत्रों में भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के संबंध और मजबूत हुए

परमाणु, समुद्री और खनिज क्षेत्रों में भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के संबंध और मजबूत हुए
Modified Date: July 9, 2026 / 12:29 pm IST
Published Date: July 9, 2026 12:29 pm IST

(तस्वीरों के साथ जारी)

मेलबर्न, नौ जुलाई (भाषा) भारत और ऑस्ट्रेलिया ने असैन्य परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने संबंधी कई समझौतों को बृहस्पतिवार को अंतिम रूप दिया तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज ने द्विपक्षीय संबंधों को नयी गति देने का निर्णय लिया।

मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई नेता के साथ व्यापक बातचीत की। वह व्यापार एवं रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे।

बैठक के बाद दोनों पक्षों ने सुरक्षा पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त घोषणा, ऊर्जा संबंधों पर संयुक्त बयान और साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग के लिए एक खाका जारी किया।

असैन्य परमाणु ऊर्जा से जुड़े समझौते के जरिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की वाणिज्यिक आपूर्ति का रास्ता खुलेगा। इससे भारत की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को मदद मिलेगी।

मोदी ने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा, ‘‘आज हमने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता खुलेगा और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में हमारे लक्ष्यों को नयी गति मिलेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में हमारा सहयोग हमारी रणनीतिक सुरक्षा एवं स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने संबंधी आवश्यक बदलाव करने के लिए अहम है। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हमने साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी शुरू की है।’’

मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष महत्वपूर्ण खनिज गलियारे पर भी मिलकर काम करेंगे।

प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र केवल दो महासागरों का संगम नहीं है। यह भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान सोच वाले लोकतंत्रों की साझा आकांक्षाओं का भी प्रतीक है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘आज हमने सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणा जारी की है। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवोन्मेष गलियारे के माध्यम से हम रक्षा स्टार्टअप और उद्योगों को जोड़ने के लिए काम करेंगे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग खाका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा प्रयासों को नयी गति देगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम पोत निर्माण, पोतों की मरम्मत और रखरखाव के क्षेत्र में भी साथ- साथ आगे बढ़ेंगे।’’

मोदी ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई साझा है, हमारा संकल्प अडिग है और हमारा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘हम यह भी मानते हैं कि दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव और संघर्षों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही हो सकता है। हम मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, नौवहन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर तेजी से काम करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय निवेश संधि की दिशा में भी काम करेंगे।

अल्बनीज ने अपने संबोधन में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ संबंध आज जितने अहम हैं उतने पहले कभी नहीं रहे।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों का ध्यान भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में विविधता लाने पर है ताकि ये संबंध लगातार और मजबूत होते रहें।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश


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