भारत ने प्रवासन प्रबंधन के लिए ‘समग्र’ दृष्टिकोण अपनाया है : विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह
भारत ने प्रवासन प्रबंधन के लिए ‘समग्र’ दृष्टिकोण अपनाया है : विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, आठ मई (भाषा) विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा है कि भारत ने प्रवासन प्रबंधन के लिए एक ‘‘समग्र दृष्टिकोण’’ अपनाया है, जिसमें प्रवासियों के कल्याण, सुरक्षा और सशक्तिकरण को केंद्र में रखा गया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा बृहस्पतिवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने प्रवासियों की आवाजाही को सुगम बनाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत की ‘‘अग्रणी’’ डिजिटल पहल का उल्लेख किया।
यह कार्यक्रम दूसरे इंटरनेशनल माइग्रेशन रिव्यू फोरम (आईएमआरएफ) के इतर आयोजित किया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय प्रवासन की कहानी बहुत व्यापक और गतिशील है। हमारे 3.4 करोड़ से अधिक प्रवासी दुनिया के 200 से अधिक देशों में फैले हुए हैं और हमारा वैश्विक समुदाय सदियों से अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों और विचारों को जोड़ने का कार्य करता आया है।’’
सिंह ने कहा कि भारतीय प्रवासी समुदाय का देश में भेजा हुआ पैसा, निवेश और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से योगदान न केवल भारत के विकास में बल्कि उन देशों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहां वे रह रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में भारत ने प्रवासन प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें प्रवासियों के कल्याण, सुरक्षा और सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी गई है।’’
सिंह ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों और सदस्य देशों के साथ भारत की ‘‘अग्रणी पहल‘‘ ‘ई-माइग्रेट’ मंच की जानकारी साझा की और बताया कि किस प्रकार भारत डिजिटल नवाचार की शक्ति का उपयोग कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि आईएमआरएफ की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ‘‘प्रवासन और प्रवासी राजनीतिक विवाद का विषय बन गए हैं।’’
पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में फैले 3.4 करोड़ भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ यह सुनिश्चित करना हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक है कि नियमित प्रवासन मार्गों को प्रोत्साहित किया जाए, मजबूत बनाया जाए और सुदृढ़ किया जाए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम इस बात को लेकर भी पूरी तरह स्पष्ट हैं कि प्रवासियों और शरणार्थियों के बीच का अंतर बहुत स्पष्ट होना चाहिए।’’
भाषा गोला रंजन
रंजन

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