भारत, ब्रिटेन एआई का भरपूर लाभ उठाने के लिए स्वाभाविक साझेदार: प्रौद्योगिकी मंत्री लिज केंडल

भारत, ब्रिटेन एआई का भरपूर लाभ उठाने के लिए स्वाभाविक साझेदार: प्रौद्योगिकी मंत्री लिज केंडल

भारत, ब्रिटेन एआई का भरपूर लाभ उठाने के लिए स्वाभाविक साझेदार: प्रौद्योगिकी मंत्री लिज केंडल
Modified Date: January 26, 2026 / 11:43 pm IST
Published Date: January 26, 2026 11:43 pm IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, 26 जनवरी (भाषा) ब्रिटेन की विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी मंत्री ने सोमवार को लंदन में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) इस युग का एक निर्णायक प्रतिस्पर्धी लाभ है और भारत, ब्रिटेन के लिए एक स्वाभाविक साझेदार है।

लिज केंडल, इंडिया ग्लोबल फोरम के यूके-इंडिया फ्यूचर फोरम (यूकेआईएफएफ) द्वारा ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ परिसर में आयोजित वार्षिक ‘यूके-इंडिया पार्लियामेंट्री लंच’ को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में भारत की प्रगति को रेखांकित किया।

ब्रिटेन की मंत्री ने भारत में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के संदर्भ में कहा कि देश में आर्थिक विकास काफी हद तक विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी द्वारा हो रहा है।

केंडल ने कहा, “आज, मेरा मानना ​​है कि भारत, ब्रिटेन दोनों के सामने विकास का एक और अवसर है। इस बार, कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र है, जहां हम इसका भरपूर लाभ उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।”

उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि एआई हमारे युग का निर्णायक प्रतिस्पर्धी लाभ हो सकता है। हमारे पास इसके लिए मूलभूत आधार मौजूद हैं। भारत एआई पर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ अग्रणी भूमिका निभा रहा है, चिप और कंप्यूटिंग हार्डवेयर में निवेश कर रहा है। विश्वविद्यालयों में एआई प्रशिक्षण और एआई फैलोशिप पर व्यापक रूप से ध्यान केंद्रित कर रहा है।”

मंत्री ने कहा, “भारत और ब्रिटेन यहां भी स्वाभाविक साझेदार हैं। एआई सुरक्षा पर मिलकर काम करने की महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताओं के साथ। हमें अगले शिखर सम्मेलन को सार्थक बनाना होगा। यह ब्रिटेन, भारत के लिए प्रौद्योगिकी व एआई के क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाने, ऊर्जा व निवेश को बढ़ावा देने का मौका है।”

उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री कनिष्क नारायण अगले महीने दिल्ली में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन में अपने विभाग की ओर से ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करेंगे।

भाषा जितेंद्र सुभाष

सुभाष

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