भारतवंशी खगोलशास्त्री को ब्रिटेन की रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी का स्वर्ण पदक मिला

भारतवंशी खगोलशास्त्री को ब्रिटेन की रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी का स्वर्ण पदक मिला

भारतवंशी खगोलशास्त्री को ब्रिटेन की रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी का स्वर्ण पदक मिला
Modified Date: January 12, 2026 / 04:55 pm IST
Published Date: January 12, 2026 4:55 pm IST

लंदन, 12 जनवरी (भाषा) भारतवंशी खगोलशास्त्री प्रोफेसर श्रीनिवास कुलकर्णी को खगोलशास्त्र में उनकी महत्वपूर्ण खोजों के लिए लंदन स्थित ‘रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ (आरएएस) द्वारा प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

महाराष्ट्र में जन्मे कुलकर्णी कैलिफ़ोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) में खगोलशास्त्र और ग्रह विज्ञान के प्रोफेसर हैं, जहां उन्होंने ‘ब्राउन ड्वार्फ़’ और दूरस्थ गामा किरणों के विस्फोट सहित खगोलीय पिंडों की एक विस्तृत श्रृंखला की खोज की है।

पिछले सप्ताह उन्हें मिले आरएएस स्वर्ण पदक प्रशस्ति पत्र में ‘‘खगोल भौतिकी में उनके निरंतर, नवोन्मेषी और अभूतपूर्व योगदान’’ को मान्यता दी गई है।

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वर्ष 1824 से हर साल दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करके वह स्टीफन हॉकिंग, जोसेलिन बेल बर्नेल, अल्बर्ट आइंस्टीन और एडविन हबल जैसी महान वैज्ञानिक प्रतिभाओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं।

कुलकर्णी ने कहा, “यह जानकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ, खासकर पिछले विजेताओं की शानदार सूची को देखते हुए।”

उन्होंने कहा, “मैं अपने दीर्घकालिक सहयोगियों और पालोमर ट्रांजिएंट फैक्टरी और ज़्विकी ट्रांजिएंट प्रतिष्ठान की इंजीनियरिंग टीम और सदस्यों को परियोजनाओं में उनके अमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।”

हाल में खगोल विज्ञान में 2024 का शॉ पुरस्कार हासिल करने वाले कुलकर्णी 1985 में कैलटेक में शामिल हुए और तब से उन्होंने कई महत्वपूर्ण खोज की हैं।

भाषा आशीष नेत्रपाल

नेत्रपाल


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