Narges Mohammadi Nobel Prize: जेल में रहते मिला था ‘नोबेल पुरस्कार’.. उन्हें फिर से सुनाई गई 7 साल तक जेल की सजा, जानें इनके बारें में
Narges Mohammadi Nobel Prize: ईरान में लागू हिजाब कानून, महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और सरकारी दमन के खिलाफ खुलकर विरोध किया, जिसके चलते उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया।
Narges Mohammadi Nobel Prize || Image- The New York Times FILE
- नर्गिस मोहम्मदी को जेल और यात्रा प्रतिबंध की सजा
- नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद भी संघर्ष जारी
- ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ आंदोलन का प्रतीक बनीं मोहम्मदी
दुबई: ईरान ने नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित नर्गिस मोहम्मदी को भूख हड़ताल शुरू करने के बाद सात साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई है। उनके समर्थकों ने रविवार को यह जानकारी दी। मोहम्मदी के समर्थकों ने उनके वकील का हवाला दिया, जिन्होंने मोहम्मदी से बात की। (Narges Mohammadi Nobel Prize) मोहम्मदी के वकील मुस्तफ़ा निली ने ‘एक्स’ पर सजा सुनाए जाने की पुष्टि की।
उन्होंने पोस्ट किया, ‘‘मोहम्मदी को जमावड़े और साठगांठ के लिए छह साल की जेल और प्रचार के लिए डेढ़ साल की जेल और दो साल के यात्रा प्रतिबंध की सजा सुनाई गई है।’’ ईरान की तरफ से अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई है। मोहम्मदी के समर्थकों का कहना है कि वह दो फरवरी से भूख हड़ताल पर हैं।
Iran sentenced Nobel Peace Prize laureate Narges Mohammadi to over seven more years in prison after she began a hunger strike, supporters said Sunday. https://t.co/hVHBrgc6gk
— The Associated Press (@AP) February 8, 2026
कौन है नर्गिस मोहम्मदी?
ईरान की मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार और लेखिका नर्गिस मोहम्मदी को वर्ष 2023 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया था। उन्हें यह सम्मान ईरान में महिलाओं के दमन के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उनके संघर्ष और मानवाधिकारों व स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए दिया गया था। नोबेल समिति ने उनके साहसिक प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी।
नर्गिस मोहम्मदी का जन्म 21 अप्रैल 1972 को ईरान के ज़ंजन शहर में हुआ था। वह डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (Narges Mohammadi Nobel Prize) की उपाध्यक्ष हैं और नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी की करीबी सहयोगी रही हैं। नर्गिस मोहम्मदी ने अपने करियर के दौरान ईरान में महिलाओं के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मृत्युदंड के विरोध और राजनीतिक कैदियों के अधिकारों को लेकर लगातार आवाज़ उठाई है।
उन्होंने ईरान में लागू हिजाब कानून, महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और सरकारी दमन के खिलाफ खुलकर विरोध किया, जिसके चलते उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। उन्हें लंबी जेल सजाओं, एकांत कारावास और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के समय भी वह तेहरान की कुख्यात एविन जेल में बंद थीं।
नोबेल समिति ने अपने बयान में कहा कि नर्गिस मोहम्मदी को यह पुरस्कार “ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनके साहसी संघर्ष और मानवाधिकारों एवं स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए” दिया जा रहा है। समिति ने उनके योगदान को वैश्विक स्तर पर प्रेरणादायक बताया।
जेल में रहते मिला था नोबेल पुरस्कार
नर्गिस मोहम्मदी उन गिने-चुने लोगों में शामिल हैं जिन्हें जेल में रहते हुए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। (Narges Mohammadi Nobel Prize) उनका यह सम्मान ईरान में ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ आंदोलन के लिए वैश्विक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है और इसे ईरान की महिलाओं तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की आवाज़ को दुनिया तक पहुंचाने वाला एक मजबूत प्रतीक माना जा रहा है।
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