युद्ध की शुरुआत में निशाना बनाया गया ईरानी स्कूल अब बच्चों की याद दिलाने वाला स्मारक-स्थल बना
युद्ध की शुरुआत में निशाना बनाया गया ईरानी स्कूल अब बच्चों की याद दिलाने वाला स्मारक-स्थल बना
मिनाब, छह सितंबर (एपी) यह परिसर फिर कभी स्कूल नहीं बनेगा, लेकिन इसके चमकीले नीले गेट पर अब भी वे चित्र (ईरान का नक्शा, बड़े आकार की पेंसिल और विज्ञान एवं साहित्य की महान हस्तियों की तस्वीरें) बने हुए हैं, जो कभी बच्चों का स्वागत करते थे।
लेकिन अब इसके आगे का रास्ता आगंतुकों को तस्वीरों की कतारों से अवगत कराता है। इनमें जन्मदिन की पार्टियों और अन्य मौकों पर व्यस्त बच्चे दिखाई देते हैं। लेकिन इसके बाद उन्हीं मासूम चेहरों को शोक के प्रतीक काले बैनरों पर देखा जा सकता है।
यह उस स्कूल के उन बच्चों की याद में बनाया जा रहा स्मारक है, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान में शुरू किए गए युद्ध के शुरुआती क्षणों में हुए हमले में मारे गए थे। हमलों में मिनाब स्थित शाजरेह तैयबेह स्कूल भी निशाना बना था।
ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि 100 से अधिक छात्र मारे गए। महीनों बाद भी ट्रंप प्रशासन ने न तो सीधे तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की है और न ही पेंटागन की जांच के निष्कर्ष जारी किए हैं।
हालांकि, ‘एपी’ की एक जांच में इस बात के सबूत मिले कि कम से कम एक अमेरिकी मिसाइल स्कूल पर गिरी थी।
पिछले सप्ताह एक बार फिर मिनाब का ध्यान उस समय आकर्षित हुआ, जब ईरान के दक्षिणी तट पर अमेरिका के नए हमलों में एक शादी समारोह और अन्य इलाकों को निशाना बनाया गया। घायलों में से कुछ को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया।
‘एपी’ की टीम ने बुरी तरह क्षतिग्रस्त दो मंजिला इमारत का दौरा किया, जिसकी कक्षाएं मानो पढ़ाई के बीच ही जम गई हों। वहां ‘डेस्क’ आधे मलबे में दबी हुई हैं और छतें ढह चुकी हैं।
एपी संतोष दिलीप
दिलीप

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