(लॉरेन बॉल, क्वींसलैंड विश्वविद्यालय और एमिली बर्च, सदर्न क्रॉस विश्वविद्यालय द्वारा)
ब्रिसबेन, 29 मार्च (द कन्वरसेशन) ईस्टर की चॉकलेट सुपरमार्केट की अलमारियों पर हर जगह नजर आ रही है। कुछ लोग सीधे ‘मिल्क चॉकलेट’ के अंडे खरीदते हैं जबकि अन्य लोग ‘डार्क चॉकलेट’ को देखकर यह सोचते हैं कि ये ज्यादा सेहतमंद होती हैं, इसलिए उसे चुनने पर विचार करते हैं।
डार्क चॉकलेट को ‘बेहतर’ विकल्प के रूप में पहचान मिली है, क्योंकि इसमें आमतौर पर मिल्क चॉकलेट की तुलना में अधिक कोको और कम चीनी होती है।
लेकिन क्या डार्क चॉकलेट वास्तव में सेहतमंद होती है? आइए देखें कि इसके समर्थन में क्या प्रमाण मौजूद हैं।
इनकी तुलना कैसे की जाए?
सभी चॉकलेट की शुरुआत कोको बीन से होती है। कोको बीन्स थियोब्रोमा कैकाओ नामक पेड़ के बीज होते हैं, जो मध्य और दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला एक उष्णकटिबंधीय पौधा है।
कोको बीन्स का प्रसंस्करण करने पर दो चीजे मिलती हैं—कोको ठोस पदार्थ, जो चॉकलेट का कड़वा हिस्सा होता है और कोको बटर, जो उसमें मौजूद वसा है और चॉकलेट को मुलायम और चिकनी बनावट देता है।
डार्क चॉकलेट में आमतौर पर कोको ठोस पदार्थ का अनुपात काफी अधिक होता है, जो आमतौर पर 50-90 प्रतिशत होता है।
मिल्क चॉकलेट में आमतौर पर 20-30 प्रतिशत कोको ठोस पदार्थ होता है, जबकि शेष भाग में दूध के तत्व और चीनी होती है।
डार्क चॉकलेट में मिल्क चॉकलेट की तुलना में अधिक कोको ठोस पदार्थ होता है, इसलिए इसमें स्वाभाविक रूप से कुछ खनिजों की मात्रा थोड़ी अधिक होती है।
जैसा कि आप देख सकते हैं, डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम, आयरन और जिंक जैसे खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें कैफीन की मात्रा भी काफी अधिक होती है (लेकिन एक सामान्य कप कॉफी की तुलना में बहुत कम, जिसमें लगभग 100 मिलीग्राम कैफीन होता है)।
मिल्क चॉकलेट में दूध के ठोस पदार्थों के कारण कैल्शियम की मात्रा काफी अधिक होती है, लेकिन इसमें आमतौर पर अतिरिक्त चीनी की मात्रा अधिक होती है।
कोको में प्राकृतिक रूप से पॉलीफेनॉल नामक पादप यौगिक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये शरीर में एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं, जिससे शरीर की कोशिकाओं को क्षति से बचाने में मदद मिलती है।
डार्क चॉकलेट में कोको की मात्रा अधिक होने के कारण, इसमें स्वाभाविक रूप से इन यौगिकों का स्तर भी अधिक होता है। वास्तव में, डार्क चॉकलेट में मिल्क चॉकलेट की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक फ्लेवनॉल (एक प्रकार का पॉलीफेनॉल) होता है।
क्या डार्क चॉकलेट सेहत के लिए फायदेमंद है?
कोको और डार्क चॉकलेट पर किए गए शोध से कुछ दिलचस्प निष्कर्ष सामने आए हैं, खासकर हृदय स्वास्थ्य के बारे में।
कोकोआ में पाए जाने वाले फ्लेवनॉल्स रक्त वाहिकाओं को आराम देने और बेहतर रक्त प्रवाह में सहायक प्रतीत होते हैं। कुछ नैदानिक परीक्षणों में कोकोआ उत्पादों के सेवन के बाद रक्तचाप में मामूली कमी और रक्त वाहिका कार्यप्रणाली में सुधार की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा, व्यापक प्रमाण से यह भी पता चलता है कि फ्लेवनोल्स से भरपूर आहार समग्र रूप से हृदय रोग के कम जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
डार्क चॉकलेट चुनना अपने आप में इसे सेहतमंद विकल्प नहीं बना देता, खासकर चीनी के मामले में। कुछ डार्क चॉकलेट में आश्चर्यजनक रूप से उच्च मात्रा में चीनी पाई जाती है।
कोको की मात्रा और रेसिपी के आधार पर, कुछ डार्क चॉकलेट उत्पादों में 40-50 प्रतिशत तक चीनी होती है।
मिल्क चॉकलेट की तुलना में डार्क चॉकलेट पोषक तत्वों से भरपूर होती है। लेकिन यह लाभ कितना अधिक है, यह कोको की मात्रा और इसे बनाने की विधि पर निर्भर करता है।
सामान्य नियम के अनुसार, 70 प्रतिशत या उससे अधिक कोको वाली चॉकलेट चुनें और खरीदने से पहले पैकेट को पलट कर देख लें। उच्च गुणवत्ता वाली डार्क चॉकलेट में, सामग्री की सूची में कोको सबसे पहले होना चाहिए – चीनी नहीं।
इसके अलावा, ऐसी चॉकलेट चुनें जिसका स्वाद आपको वाकई पसंद हो और मात्रा का ध्यान रखें। याद रखें कि आपका संपूर्ण आहार कुछ ईस्टर अंडों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
(द कन्वरसेशन)
देवेंद्र रंजन
रंजन