इजराइल-लेबनान युद्धविराम: बाद की स्थिति पर वैश्विक ध्यान बनाए रखना जरूरी
इजराइल-लेबनान युद्धविराम: बाद की स्थिति पर वैश्विक ध्यान बनाए रखना जरूरी
( मैरिका सोस्नोव्स्की, यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न )
मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया), 18 अप्रैल (द कन्वरसेशन) इजराइल और लेबनान के बीच घोषित हालिया युद्धविराम को संघर्ष का “साफ-सुथरा अंत” मानना भ्रामक हो सकता है और इस पर वैश्विक ध्यान बनाए रखना आवश्यक है।
एक विश्लेषण में यह दावा भी किया गया है कि ऐसे समझौते अक्सर युद्ध के एक चरण को समाप्त कर दूसरे चरण की शुरुआत करते हैं।
दक्षिणी लेबनान में हफ्तों तक चली बमबारी में 2,000 से अधिक लोगों की मौत और 10 लाख से ज्यादा लोगों के विस्थापित होने के बाद इजराइल ने 10 दिन के युद्धविराम की घोषणा की है। हालांकि, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर का “सुरक्षा क्षेत्र” बनाने के लिए सैनिकों की मौजूदगी बनाए रखने की बात कही है, जिससे युद्धविराम की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
विश्लेषण के अनुसार, 2024 के अंत में इजराइल और हिज्बुल्ला के बीच 13 महीने के संघर्ष के बाद हुए युद्धविराम के बावजूद इजराइली सेना ने हवाई हमले और लक्षित कार्रवाई जारी रखी थी। इससे संकेत मिलता है कि युद्धविराम के बाद भी हिंसा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
इसमें कहा गया है कि युद्धों को निश्चित तारीखों और अवधियों में बांधकर देखना आसान जरूर होता है, लेकिन वास्तविकता कहीं अधिक जटिल होती है। युद्धविराम या शांति समझौते लागू होने के बाद भी संघर्ष के कई आयाम जारी रहते हैं। यही ऐसे समझौतों का “विरोधाभास” है कि वे एक चरण को खत्म करते हुए दूसरे को जन्म देते हैं।
गाजा युद्ध का उदाहरण देते हुए विश्लेषण में कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच हुए 20 सूत्री शांति समझौते से बमबारी में कमी आई, बंधकों और कैदियों की अदला-बदली संभव हुई और मानवीय सहायता की कुछ आपूर्ति बढ़ी। हालांकि, इसके बावजूद कई समस्याएं बनी रहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, समझौते के बाद मीडिया का और पूरी दुनिया का ध्यान अन्य घटनाओं की ओर स्थानांतरित हो गया, जिससे जारी हिंसा पर निगरानी कम हो गई। इसके परिणामस्वरूप गाजा में लगभग रोजाना हमले जारी रहे और पश्चिमी तट में फलस्तीनियों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि देखी गई। साथ ही, मानवीय सहायता का स्तर समझौते में निर्धारित सीमा से काफी कम रहा और गाजा के भविष्य के शासन और पुनर्निर्माण पर अनिश्चितता बनी हुई है।
विश्लेषण में ईरान का उदाहरण भी दिया गया है, जहां अमेरिका और ईरानी शासन के बीच हालिया युद्धविराम के बाद आंतरिक असंतोष पर कार्रवाई तेज होने और रणनीतिक सैन्य कदम उठाए जाने की बात कही गई है।
लेबनान-इजराइल युद्धविराम पर टिप्पणी करते हुए इसमें कहा गया है कि यह आम नागरिकों को अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन इससे इजराइल को दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य स्थिति मजबूत करने का अवसर भी मिल सकता है। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ के अनुसार, सीमा के पास लेबनानी कस्बों में इमारतों को ध्वस्त करने और विस्थापित लोगों की वापसी रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जबकि नेतन्याहू ने सैनिकों की तैनाती जारी रखने की बात स्पष्ट की है।
विश्लेषण में कहा गया है कि मौजूदा “हेडलाइन संस्कृति” में किसी भी संघर्ष पर दुनिया का ध्यान अक्सर उसकी वास्तविक गंभीरता के बजाय मीडिया कवरेज पर निर्भर करता है। डिजिटल मीडिया के कारण लोगों को युद्ध और मानवीय संकट की लगातार जानकारी मिलती है, लेकिन यह हमेशा दीर्घकालिक ध्यान या कार्रवाई में नहीं बदलती।
इसमें कहा गया है कि युद्धविराम या शांति समझौते निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इनके बाद की स्थिति की अक्सर कम जानकारी होती है या यह नजरअंदाज कर दी जाती है, क्योंकि ध्यान अन्य संघर्षों की ओर चला जाता है।
विश्लेषण के अनुसार, यदि वैश्विक समुदाय युद्ध और शांति की वास्तविकताओं को समझना चाहता है, तो उसे युद्धविराम के बाद भी स्थितियों पर लगातार नजर रखनी होगी और इन समझौतों को अंतिम समाधान मानने से बचना होगा।
( द कन्वरसेशन )
मनीषा वैभव
वैभव

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