केअर स्टॉर्मर चीन में ब्रिटिश कंपनियों के लिए व्यापार के अवसर बढ़ाने के मकसद से शंघाई पहुंचे

केअर स्टॉर्मर चीन में ब्रिटिश कंपनियों के लिए व्यापार के अवसर बढ़ाने के मकसद से शंघाई पहुंचे

केअर स्टॉर्मर चीन में ब्रिटिश कंपनियों के लिए व्यापार के अवसर बढ़ाने के मकसद से शंघाई पहुंचे
Modified Date: January 30, 2026 / 09:14 pm IST
Published Date: January 30, 2026 9:14 pm IST

बीजिंग, 30 जनवरी (एपी) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर चीन में ब्रिटिश कंपनियों के लिए व्यापार के अवसरों को बढ़ावा देने के मकसद से शुक्रवार को एशियाई देश की आर्थिक राजधानी शंघाई पहुंचे। उनकी यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चीन और ब्रिटेन के बीच किसी भी संभावित समझौते का विरोध करने के संकेत दिए जाने के बीच हो रही है।

स्टॉर्मर पिछले आठ वर्षों में चीन की यात्रा करने वाले पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री हैं। उनके साथ उद्योग जगत के 50 से अधिक दिग्गज चीन की यात्रा कर रहे हैं।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री की चीन यात्रा बृहस्पतिवार को बीजिंग से शुरू हुई, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी चिनफिंग सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों ने बताया कि द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान चिनफिंग और स्टॉर्मर ने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक एवं स्थिर रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया, जिसे उनके बीच कई वर्षों तक जारी तनाव के बाद संबंधों में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले, वाशिंगटन में ट्रंप ने संकेत दिया कि वह ब्रिटेन और चीन के बीच किसी भी समझौते का विरोध कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कनाडा का भी जिक्र किया, जिसके प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की इस महीने की शुरुआत में हुई चीन यात्रा पर उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी।

स्टॉर्मर की चीन यात्रा और बीजिंग के साथ संभावित ब्रिटेन की व्यापार वार्ता के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “उनके लिए ऐसा करना बहुत खतरनाक होगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “और मुझे लगता है कि कनाडा के लिए चीन के साथ व्यापार करना और भी खतरनाक होगा। कनाडा की हालत अच्छी नहीं है। बहुत खराब है। आप चीन को समाधान के रूप में नहीं देख सकते।”

स्टॉर्मर और कार्नी उन नेताओं में शामिल हैं, जो चीन के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने के मकसद से बीजिंग की यात्रा कर रहे हैं। इनमें से कई नेताओं के देश की अर्थव्यवस्थाएं ट्रंप की ओर से लगाए गए शुल्क से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और वे अन्य निर्यात बाजारों में संभावनाएं तलाशने की कोशिशों में जुटे हैं।

एपी पारुल धीरज

धीरज


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