लावरोव ने भारत के साथ रूस के संबंधों को सराहा, बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था का समर्थन किया

लावरोव ने भारत के साथ रूस के संबंधों को सराहा, बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था का समर्थन किया

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  • Publish Date - January 20, 2026 / 10:08 PM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 10:08 PM IST

(विनय शुक्ला)

मॉस्को, 20 जनवरी (भाषा) रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मंगलवार को दिल्ली और बीजिंग के साथ मॉस्को के द्विपक्षीय रिश्तों की सराहना की और रूस-भारत-चीन (आरआईसी) त्रिपक्षीय वार्ता फिर से शुरू करने का आह्वान करते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था बहुध्रुवीय होनी चाहिए।

लावरोव ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में 2025 की रूसी कूटनीति की उपलब्धियों की समीक्षा की।

लावरोव ने कहा, ‘मैं यह उल्लेख भी करना चाहूंगा कि भारत के साथ हमारी साझेदारी विशेष रूप से रणनीतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जिसके तहत राष्ट्रपति (व्लादिमीर) पुतिन ने पिछले साल दिसंबर में भारत का दौरा किया।’

पुतिन पिछले महीने 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता के लिए भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए थे।

इस दौरान दोनों देशों ने एक मजबूत आर्थिक साझेदारी कायम करने के लिए पांच साल के रोडमैप समेत कई कदम उठाने पर सहमति जताई थी।

लावरोव ने चीन के साथ रूस के संबंधों पर भी बात की।

उन्होंने कहा, ‘चीन के साथ हमारे संबंध अपने स्तर, प्रगाढ़ता और यूरेशिया व वैश्विक घटनाक्रम को लेकर समान दृष्टिकोण की वजह से अद्वितीय हैं।”

विदेश मंत्री ने 2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से स्थगित रूस-भारत-चीन (आरआईसी) त्रिपक्षीय वार्ता के पुनः शुरू करने का भी आह्वान किया।

लावरोव ने कहा, ‘हमें आरआईसी त्रिपक्षीय वार्ता फिर से शुरू करनी चाहिए, जो एक तरह से ब्रिक्स की नींव है और बहुध्रुवीय दुनिया के लिए जरूरी है।”

उन्होंने कहा, “वैश्विक व्यवस्था बहुध्रुवीय होनी चाहिए। इसे एकध्रुवीय या दो ध्रुवीय नहीं रखा जा सकता। दुनिया में आर्थिक विकास के लिए पहले ही कई ध्रुव मौजूद हैं।”

भाषा जोहेब नरेश

नरेश