लेबनान-इजराइल में दशकों बाद वाशिंगटन में पहली बार सीधी राजनयिक वार्ता हुई
लेबनान-इजराइल में दशकों बाद वाशिंगटन में पहली बार सीधी राजनयिक वार्ता हुई
बेरूत, 14 अप्रैल (एपी) लेबनान और इजराइल ने दशकों बाद मंगलवार को वाशिंगटन में पहली बार सीधी राजनयिक वार्ता शुरू की। यह वार्ता इजराइल और आतंकवादी समूह हिजबुल्ला के बीच एक महीने से अधिक समय से जारी युद्ध के बाद हो रही है। वर्ष 1993 के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली वार्ता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे एक ‘ऐतिहासिक अवसर’ बताया और स्पष्ट किया कि तत्काल किसी निर्णायक समझौते की उम्मीद नहीं है।
रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इस वार्ता को आगे बढ़ाकर ‘बहुत प्रसन्न’ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि हम दशकों के इतिहास और जटिलताओं के खिलाफ काम कर रहे हैं जिनका समाधान जल्दी नहीं होगा।’’
हिजबुल्ला प्रत्यक्ष वार्ता का विरोध करता है और उसका कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। वार्ता शुरू होते ही हिजबुल्ला उत्तरी इजराइल पर अपना हमला तेज करता दिखा।
रुबियो ने कहा, ‘‘लेकिन हम एक ऐसे ढांचे के साथ आगे बढ़ना शुरू कर सकते हैं, जिससे कुछ सकारात्मक और स्थायी परिणाम हासिल हो सके, ताकि लेबनान के लोगों को वह भविष्य मिल सके जिसके वे हकदार हैं और इजराइल के लोग बिना किसी डर के जी सकें।’’
रुबियो और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज़ ने विदेश विभाग में आयोजित वार्ता में भाग लिया, जिसका नेतृत्व लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल इस्सा ने किया। इसमें अमेरिका में इज़राइली राजदूत येचिएल लीटर और अमेरिका में लेबनानी राजदूत नाडा हमादेह मोवाद भी शामिल हुए।
लेबनान सरकार को उम्मीद है कि वार्ता से युद्ध समाप्त होने का मार्ग प्रशस्त होगा। ईरान ने लेबनान और पूरे क्षेत्र में युद्धों को समाप्त करने की शर्त अमेरिका के साथ वार्ता के दौरान रखी है, जबकि लेबनान स्वयं वार्ता का प्रतिनिधित्व करने पर अड़ा है।
ईरान समर्थित हिजबुल्ला और अन्य आलोचकों का मानना है कि लेबनान सरकार का कोई प्रभाव नहीं है और उसे ईरान का समर्थन करना चाहिए। ईरान हिजबुल्ला का प्रमुख सहयोगी और संरक्षक है। इस आतंकी संगठन की राजनीतिक परिषद के एक उच्च पदस्थ सदस्य वाफिक सफा ने ‘एपी’ को बताया कि वे वार्ता में हुए किसी भी समझौते का पालन नहीं करेंगे।
इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपना आक्रमण जारी रखा है, जिसके बारे में कुछ इजराइली अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य सीमा से लेकर उत्तर में लगभग 30 किलोमीटर (20 मील) दूर स्थित लिटानी नदी तक एक ‘सुरक्षा क्षेत्र’ बनाना है।
इजराइल के रक्षा मंत्री का कहना है कि दक्षिणी लेबनान से विस्थापित हुए लाखों लोगों को तब तक घर लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि क्षेत्र को सैन्य मुक्त नहीं कर दिया जाता और इजराइल को यह विश्वास नहीं हो जाता कि उसके उत्तर में रहने वाला समुदाय सुरक्षित है।
हिजबुल्ला नवंबर 2024 में समाप्त हुए इजराइल के साथ अपने पिछले युद्ध में कमजोर हो गया था, फिर भी प्रतिदिन उत्तरी इजराइल और लेबनान के अंदर जमीनी सैनिकों पर ड्रोन, रॉकेट और तोप से हमले करता रहता है।
हिजबुल्ला के महासचिव नइम कासिम ने एक भड़काऊ भाषण देते हुए लेबनान से वार्ता रद्द करने का आह्वान किया।
वार्ता के दिन गोलीबारी की वजह से लेबनानी सीमा के निकट स्थित इजराइली समुदायों में लगातार ड्रोन और रॉकेट हमले की चेतावनी वाले सायरन बजते रहे। हिजबुल्ला ने मंगलवार को उत्तरी इजराइल और दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैनिकों पर 24 हमलों की जिम्मेदारी ली है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, लेबनान में इजराइली हमलों में कम से कम 2,124 लोग मारे गए हैं, जिनमें सैकड़ों महिलाएं और बच्चे शामिल हैं और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। युद्ध का सबसे घातक दिन पिछले सप्ताह था, जब इजराइल ने लेबनान की राजधानी समेत पूरे देश में 10 मिनट के भीतर 100 हवाई हमले किए, जिनमें 350 से अधिक लोग मारे गए।
एपी संतोष सुरेश
सुरेश

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