ईरान में सैन्य कार्रवाई वॉशिंगटन के लिए महंगी भी साबित हो सकती है

ईरान में सैन्य कार्रवाई वॉशिंगटन के लिए महंगी भी साबित हो सकती है

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 11:44 AM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 11:44 AM IST

( बामो नौरी, मानद रिसर्च फेलो, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन )

लंदन, 14 जनवरी (द कन्वरसेशन) ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य कदम पर विचार कर रहे हैं, लेकिन ऐसे किसी भी कदम के वॉशिंगटन के लिए उलटे परिणाम भी हो सकते हैं।

ट्रंप ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनके सामने क्या विकल्प हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्ध से बचने के इच्छुक ईरानी अधिकारियों ने उनसे “वार्ता के लिए फोन किया है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि घातक कार्रवाई जारी रहती है तो अमेरिका को “बैठक से पहले कदम उठाना पड़ सकता है।”

यदि वॉशिंगटन हस्तक्षेप का फैसला करता है, तो उसके पास कूटनीतिक निंदा और प्रतिबंधों के दायरे के विस्तार से लेकर साइबर अभियानों और सैन्य हमलों तक कई विकल्प हैं। लेकिन इतिहास अमेरिका सरकार के समक्ष मौजूद हर विकल्प के खिलाफ चेतावनी देता है।

ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर हाल में लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क सहित लक्षित प्रतिबंध और कूटनीतिक दबाव सबसे कम उकसाने वाले उपाय माने जाते हैं। ये अमेरिका को सहयोगियों के साथ तालमेल और प्रदर्शनकारियों को सीधे टकराव का संकेत दिए बिना नैतिक समर्थन देने का अवसर देते हैं, लेकिन दशकों का अनुभव बताता है कि इनका प्रभाव सीमित रहा है।

ईरान के नेतृत्व ने आर्थिक दबाव का सामना करने और इसकी लागत समाज पर डालने की रणनीति विकसित कर ली है। वैकल्पिक बाजारों, अनौपचारिक और गैर-डॉलर व्यापार के जरिए ईरान की सरकार ने खुद को समय के साथ ढाला है। इराक जैसे पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय नेटवर्कों ने भी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने में मदद की है।

वॉशिंगटन के पास साइबर व्यवधान, स्वतंत्र मीडिया की सहायता और इंटरनेट बंदी को दरकिनार करने में प्रदर्शनकारियों की मदद जैसे गुप्त उपायों के विकल्प भी हैं।

सबसे चरम विकल्प सैन्य हमले हैं। हालांकि इनका उद्देश्य दमन को कमजोर करना बताया जाता है, लेकिन इससे उलटा असर पड़ने की आशंका है।

ईरान की शासक व्यवस्था, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बाहरी खतरों का इस्तेमाल घरेलू समर्थन जुटाने के लिए किया है। किसी भी अमेरिकी हमले से “राष्ट्रीय अस्तित्व की लड़ाई” की बात मजबूत होगी। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर घालीबाफ ने चेतावनी दी है कि हमले की स्थिति में इजराइल और क्षेत्र में सभी अमेरिकी ठिकाने और संपत्तियां “वैध लक्ष्य” होंगे।

मौजूदा विरोध प्रदर्शन नागरिक, विकेंद्रीकृत और सामाजिक मुद्दों पर आधारित है, जिसमें महिलाओं की अग्रणी भूमिका रही है। सैन्य कार्रवाई से ईरान इन्हें विदेशी समर्थित खतरे के रूप में पेश कर और कठोर दमन को वैध ठहरा सकता है।

कई ईरानी 1953 के सीआईए समर्थित तख्तापलट की ऐतिहासिक स्मृति के कारण भी अमेरिकी हस्तक्षेप को लेकर सशंकित हैं। क्षेत्रीय अनुभव यानी इराक और सीरिया पर अमेरिकी कार्रवाई ने भी यह धारणा मजबूत की है कि पश्चिमी हस्तक्षेप अक्सर अस्थिरता बढ़ाता है।

विश्लेषकों के अनुसार, ईरान में वास्तविक बदलाव बाहर से सैन्य बल के जरिए नहीं लाया जा सकता। वॉशिंगटन के लिए संयम और ईरानी समाज को दीर्घकालिक समर्थन ही अधिक विवेकपूर्ण रास्ता माना जा रहा है।

( द कन्वरसेशन )

मनीषा वैभव

वैभव