मोदी अपने अनूठे तरीकों से आरएसएस के मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं: होसबाले

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मोदी अपने अनूठे तरीकों से आरएसएस के मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं: होसबाले

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  • Publish Date - April 25, 2026 / 08:30 AM IST,
    Updated On - April 25, 2026 / 08:30 AM IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 25 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आरएसएस के मूल्यों को अपने अनूठे तरीकों से आगे बढ़ाते हैं और वह संगठन के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि हैं।

होसबाले ने ‘पीटीआई-भाषा’ से साक्षात्कार में कहा कि आरएसएस ने अगले 25 वर्ष के लिए पांच प्रमुख क्षेत्र तय किए हैं जिनमें सामाजिक समरसता एवं एकजुटता के लिए काम करना, आत्मबोध पैदा करना और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलना, नागरिक बोध विकसित करना, पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना और सतत विकास के मॉडल अपनाना शामिल है।

होसबाले ने कहा, ‘‘वह (प्रधानमंत्री मोदी) ये सभी काम अपने अनूठे तरीकों से कर रहे हैं। हो सकता है कि वह इन कामों को अलग शब्दों में व्यक्त करें। उदाहरण के लिए, उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ कहा और हमने कहा है, ‘पेड़ लगाइए’।’’

आरएसएस नेता ने कहा कि सरकार के कई कार्यक्रम संघ के विचारों को दर्शाते हैं।

होसबाले ने 2022 के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन में ‘पंच प्रण’ का जिक्र किए जाने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का हवाला देते हुए कहा, ‘‘सरकार के कई कार्यक्रम आरएसएस द्वारा प्रतिपादित मूल्यों को दर्शाते हैं।’’

आरएसएस नेता ने कहा, ‘‘स्वयंसेवक होने के नाते उनमें (मोदी में) ये बातें स्वाभाविक रूप से हैं।’’

होसबाले ने कहा कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी करते समय प्रधानमंत्री ने संघ द्वारा तय किए गए भविष्य के मार्ग के महत्व पर जोर दिया था।

होसबाले ने कहा, ‘‘वह लोकतंत्र में निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं तथा वह बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि उनकी सांस्कृतिक जड़ें क्या हैं और यह संगठन किन बातों के लिए खड़ा है। वह यह बहुत अच्छी तरह जानते हैं। वह सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि हैं।’’

उन्होंने कहा कि 1980 में जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गठन हुआ था, तो उसके संस्थापक आरएसएस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखना चाहते थे।

होसबाले ने कहा, ‘‘वे आरएसएस के साथ संबंध बनाए रखना चाहते थे। जनता पार्टी से अलग होकर यह राजनीतिक दल गठन करने का यही मुख्य कारण था। इस घनिष्ठ संबंध को कमजोर नहीं किया जा सकता।’’

भाषा सिम्मी सुरभि

सुरभि