ढाका, 19 जनवरी (भाषा) बांग्लादेश में 2025 के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों से जुड़ी ज्यादातर घटनाएं ‘आपराधिक प्रकृति’ की थीं और सांप्रदायिक उद्देश्यों से प्रेरित नहीं थीं। अंतरिम सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी।
इस बयान से कुछ दिन पहले, नौ जनवरी को भारत ने ढाका पर दबाव डाला कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों से ‘तेजी से और दृढ़ता से’ निपटे। भारत ने घटनाओं को बाहरी कारणों से जोड़ने के प्रयासों को ‘चिंताजनक’ बताया था।
पिछले कुछ हफ्तों में बांग्लादेश में कई हिंदुओं की हत्या की पृष्ठभूमि में भारत ने यह प्रतिक्रिया दी थी।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय द्वारा जारी बयान में आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड की एक साल की समीक्षा का हवाला देते हुए कहा गया है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच समूचे बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी कुल 645 घटनाएं दर्ज की गईं।
इसमें कहा गया है, ‘हालांकि हर घटना चिंता का विषय है, लेकिन आंकड़े एक स्पष्ट और साक्ष्य-आधारित तस्वीर पेश करते हैं: अधिकांश मामले सांप्रदायिक प्रकृति के बजाय आपराधिक प्रकृति के थे।’
बयान के अनुसार, 645 घटनाओं में से 71 में सांप्रदायिक तत्व पाए गए।
इनमें मंदिर में तोड़फोड़ के 38 मामले, आगजनी के आठ मामले, चोरी का एक मामला, हत्या का एक मामला और मूर्तियों को तोड़ने की धमकी, सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाने जैसी 23 अन्य घटनाएं शामिल थीं।
बयान में कहा गया है कि इनमें से 50 घटनाओं में पुलिस मामले दर्ज किए गए और इतनी ही संख्या में गिरफ्तारियां की गईं, जबकि 21 मामलों में अन्य प्रतिरोधक या जांच संबंधी उपाय किए गए।
शेष 574 घटनाएं धर्म से असंबद्ध आपराधिक या सामाजिक विवादों से जुड़ी थीं, जिनमें इलाके के विवाद (51), भूमि से संबंधित संघर्ष (23), चोरी (106), व्यक्तिगत दुश्मनी (26), बलात्कार (58) और अप्राकृतिक मौत के 172 मामले शामिल हैं।
पुलिस ने इस श्रेणी में 390 मामले दर्ज किए, अप्राकृतिक मृत्यु की 154 रिपोर्ट दर्ज की और 498 गिरफ्तारियां कीं, साथ ही 30 घटनाओं में अतिरिक्त उपाय किए गए।
अंतरिम सरकार ने कहा कि रिपोर्ट ‘चुनौतियों से इनकार नहीं करती है…बल्कि, यह व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ में अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाले अपराध के रुझानों की एक तथ्यात्मक, साक्ष्य-आधारित तस्वीर प्रदान करने का प्रयास करती है।”
इस बीच, बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (बीएचबीसीयूसी) के नेता काजल देबनाथ ने अल्पसंख्यकों से जुड़ी घटनाओं को ‘गैर-सांप्रदायिक’ के रूप में वर्गीकृत करने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाया।
देबनाथ ने कहा, ‘अगर सरकार को लगता है कि ये सांप्रदायिक घटनाएं नहीं हैं, तो सवाल यह उठता है कि क्या कोई कानून को अपने हाथ में ले सकता है?’
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे बयान अपराधियों को बढ़ावा दे सकते हैं और उन्हें दंड से मुक्ति का अहसास दिला सकते हैं।
साल 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 1.313 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 7.95 फीसदी है।
भाषा नोमान दिलीप
दिलीप