नेपाल ने बाढ़ प्रभावित कारोबारियों के लिए राहत पैकेज घोषित किया, उजड़ी बस्तियों के पुनर्वास की योजना
नेपाल ने बाढ़ प्रभावित कारोबारियों के लिए राहत पैकेज घोषित किया, उजड़ी बस्तियों के पुनर्वास की योजना
काठमांडू, चार सितंबर (भाषा) नेपाल सरकार ने विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित कारोबारियों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है, जिसमें कर संबंधी रियायतें, ऋण के पुनर्गठन और सस्ती दर पर कर्ज की व्यवस्था शामिल है।
प्राधिकारियों ने इसके साथ ही बाढ़ के कारण तबाह हुई बस्तियों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
सरकार ने 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत एवं पुनर्वास के प्रयास तेज करते हुए ये कदम उठाए हैं। बाढ़ के कारण नेपाल में मकान, सड़कें और पुल बह गए थे, सैकड़ों लोगों की मौत हुई तथा हजारों लोग लापता हैं। त्रिशूली नदी के किनारे स्थित कई बस्तियां भी पूरी तरह तबाह हो गईं।
समाचार पत्र ‘द काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, नेपाल मंत्रिमंडल ने कारोबारियों के लिए बृहस्पतिवार को घोषित इन कदमों को पुनर्वास पैकेज का पहला चरण बताया।
खबर के अनुसार, जिन कारोबारियों के वाणिज्यिक वाहन, परिवहन उपकरण, संयंत्र, मशीनें, औजार या अन्य उपकरण पूरी तरह नष्ट हो गए या बाढ़ में बह गए, उन्हें उनके बदले नए उपकरण बिना सीमा शुल्क चुकाए आयात करने की अनुमति दी जाएगी।
यह रियायत उन वस्तुओं पर भी लागू होगी जिनका सीमा शुल्क पहले ही चुकाया जा चुका था लेकिन वे अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो गईं और ऐसी वस्तुओं के बदले सामान छह महीने के भीतर किसी भी सीमा शुल्क कार्यालय के जरिये आयात करना होगा।
खबर में कहा गया कि प्रांतीय एवं स्थानीय सरकारों से भी प्रभावित कारोबारियों और संपत्तियों को संपत्ति एवं व्यवसाय कर, भवन निर्माण अनुमति शुल्क और अन्य स्थानीय शुल्कों में अस्थायी रियायत देने को कहा जाएगा।
सरकार ने देश के केंद्रीय बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक को बाढ़ प्रभावित कर्जदारों के ऋण का पुनर्गठन करने या भुगतान की समयसीमा में बदलाव की सुविधा देने का निर्देश दिया है।
बीमा प्राधिकरण से भी दावों के निपटारे में तेजी लाने को कहा गया है। इसके लिए बीमा कंपनियों को सरल प्रक्रिया के तहत सर्वेक्षक तैनात करने की अनुमति दी जाएगी। प्रारंभिक आकलन के आधार पर अनुमानित नुकसान की 50 प्रतिशत तक राशि अग्रिम रूप से देने का भी प्रावधान किया गया है।
‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, बाढ़ में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में करीब 15 बस्तियां तबाह हो गईं।
राष्ट्रीय योजना आयोग (एनपीसी) ने बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण, सुरक्षित बस्तियां बसाने और दीर्घकालिक विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए एक व्यापक योजना पर काम शुरू कर दिया है।
एनपीसी के उपाध्यक्ष गुणाकर भट्ट ने कहा कि आयोग आपदा के बाद की जरूरतों का आकलन भी कर रहा है, जिसके तहत बुनियादी ढांचे, उत्पादन क्षेत्रों, सेवाओं, पर्यावरण और व्यापक अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, 15 स्थानीय इकाइयों में करीब 16 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और 8,317 मकान नष्ट हो गए हैं।
बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय नयी बस्तियों की योजना बनाने से पहले प्रभावित इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों और पुलों को बहाल करने पर ध्यान देगा।
‘द काठमांडू पोस्ट’ ने मंत्रालय के सचिव गोपाल प्रसाद सिग्देल के हवाले से खबर में कहा, ‘‘दीर्घकालिक योजना बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों से बाहर सुरक्षित स्थानों पर बस्तियां बसाने की होगी।’’
अधिकारी उन बस्तियों का नक्शा तैयार कर रहे हैं जो अब रहने लायक नहीं बची हैं। इसके साथ ही बचाव, राहत और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने का काम जारी है।
खबर के अनुसार, सरकार द्वारा बचाए गए करीब 3,948 लोग नुवाकोट, रसुवा, धादिंग और काठमांडू में बनाए गए अस्थायी केंद्रों में रह रहे हैं।
एनडीआरआरएमए के मुख्य कार्यकारी धर्मराज उप्रेती ने कहा कि विस्थापित लोगों को बसाने के लिए सुरक्षित स्थानों की पहचान की जा रही है।
‘द काठमांडू पोस्ट’ ने उनके हवाले से कहा, ‘‘लोग उन बस्तियों में वापस नहीं जा सकते जो बाढ़ में बह गई हैं। सरकार ने सुरक्षित स्थानों की पहचान करने के लिए दल बनाए हैं और लोगों को वहां बसाने की योजना पर काम किया जा रहा है।’’
नेपाल सरकार के पास आपदा प्रभावित समुदायों के पुनर्वास का पहले का भी अनुभव है। नेपाल में 1993 की बाढ़ और 2015 के भूकंप के बाद भी प्रभावित लोगों को अन्य स्थानों पर बसाया गया था।
नेपाल सरकार ने बचाव कार्य में लगे कर्मियों के लिए भी सहायता की घोषणा की है।
समाचार पोर्टल ‘ऑनलाइनखबर’ की खबर के अनुसार, सरकार के प्रवक्ता एवं शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया कि मंत्रिमंडल ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद तलाश और बचाव अभियान में तैनात सुरक्षाकर्मियों तथा सरकारी कर्मचारियों को जोखिम भत्ता और भोजन खर्च देने का बृहस्पतिवार को फैसला किया।
खबर के अनुसार, अभियान के दौरान घायल हुए कर्मियों का मुफ्त इलाज किया जाएगा तथा बचाव कार्य के दौरान जान गंवाने वाले कर्मियों के परिवारों को 10-10 लाख नेपाली रुपये की राहत राशि दी जाएगी।
भाषा
सिम्मी देवेंद्र
देवेंद्र

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