जलवायु-संबंधी आपदाओं को कम करने के लिए नेपाल-चीन सहयोग आवश्यक : नेपाली विदेश मंत्री
जलवायु-संबंधी आपदाओं को कम करने के लिए नेपाल-चीन सहयोग आवश्यक : नेपाली विदेश मंत्री
(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 12 सितंबर (भाषा) नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को कहा कि चीन के साथ रिश्तों को पारंपरिक सीमा प्रबंधन के दायरे से आगे ले जाकर, पर्यावरण सहयोग, जलवायु सुरक्षा और प्रौद्योगिकी, व्यापार एवं आधारभूत अवसंरचना पर आधारित रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर तक पहुंचाने की जरूरत है।
खनाल ने तीसरे ‘काष्ठमंडप डायलॉग’ के तहत ‘नेपाल-चीन संबंध:- सहयोग का बढ़ता दायरा’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भोटेकोशी नदी में हाल ही में अचानक आई बाढ़ ने यह साबित कर दिया है कि नेपाल-चीन सीमा केवल एक राजनीतिक सीमा नहीं है, बल्कि एक ऐसा क्षेत्र है, जो दोनों देशों के पारिस्थितिक भविष्य को आपस में जोड़ता है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के बाद सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ के पानी को अपने साथ नीचे ले आई, जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा पनबिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। इस त्रासदी में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि 5000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
खनाल ने 26 अगस्त को आई आपदा को ‘‘हिमालयी सुनामी’’ करार देते हुए शनिवार को बचाव अभियान के मुश्किल समय में आपातकालीन सहायता, तकनीकी सहयोग और जल विज्ञान से जुड़ी जानकारी देने के लिए नेपाल सरकार की ओर से चीनी सरकार का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, ‘‘भूगोल न केवल नेपाल और चीन के बीच राजनीतिक सीमा तय करता है, बल्कि हमारी साझा नियति को भी एक साथ लाता है।’’
खनाल ने कहा, ‘‘हिमालय को अतीत की तरह बाधा या विभाजन की रेखा नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसे एक साझा पारिस्थितिक धरोहर और संरक्षण के क्षेत्र के रूप में देखा जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है, नेपाल-चीन सहयोग का आधार पारिस्थितिक सुधार और जलवायु सुरक्षा होनी चाहिए।’’
नेपाली विदेश मंत्री ने ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़, मौसम के अप्रत्याशित बदलाव और भूस्खलन जैसी घटनाओं से होने वाली सीमा-पार आपदाओं के असर को कम करने के लिए वास्तविक समय की उपग्रह आधारित जानकारी के आदान-प्रदान और मौसम का पूर्वानुमान लगाने एवं समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
खनाल ने ‘एक चीन नीति’ के प्रति नेपाल की मज़बूत प्रतिबद्धता दोहराते हुए आश्वस्त किया कि ‘‘नेपाल अपनी ज़मीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ नहीं होने देगा।’’
नेपाल की संप्रभुता, आज़ादी और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिए चीनी सरकार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि 2019 में शुरू हुई नेपाल-चीन रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और सहयोग की गहराई को दिखाती है।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश

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