नेपाल के प्रधानमंत्री शाह भारत की ‘सार्थक’ यात्रा करेंगे, तारीख अभी तय नहीं: खनाल

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नेपाल के प्रधानमंत्री शाह भारत की ‘सार्थक’ यात्रा करेंगे, तारीख अभी तय नहीं: खनाल

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  • Publish Date - September 30, 2026 / 03:30 PM IST,
    Updated On - September 30, 2026 / 03:30 PM IST

(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, 30 सितंबर (भाषा) नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह उचित समय पर भारत की ‘‘सार्थक’’ और ‘‘परिणामोन्मुखी’’ यात्रा करेंगे, हालांकि अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बुधवार को यह जानकारी दी।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में शामिल होने के बाद त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे खनाल ने पत्रकारों से कहा कि नेपाल और भारत दोनों ही चाहते हैं कि यह दौरा ‘‘नतीजे देने वाला’’ हो।

खनाल ने कहा, ‘‘नेपाल और भारत, दोनों ही पक्ष प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की भारत यात्रा का इंतजार कर रहे हैं, जो नतीजे देने वाला और सार्थक हो।’’

एक सवाल के जवाब में खनाल ने कहा, ‘‘दोनों पक्ष इस यात्रा को लेकर सकारात्मक हैं लेकिन प्रधानमंत्री की भारत की आधिकारिक यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है।’’

खनाल ने बताया कि नयी सरकार बनने के तुरंत बाद ही नेपाल को प्रधानमंत्री की भारत यात्रा का निमंत्रण मिला था और अब इसकी तैयारियां चल रही हैं।

खनाल ने कहा, ‘‘जैसा कि हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि सरकार बनते ही प्रधानमंत्री को निमंत्रण मिल गया था और हमने इसे सकारात्मक रूप से लिया।’’

उन्होंने कहा कि सरकार गठन के समय ही यह तय किया गया था कि प्रधानमंत्री की दोनों पड़ोसी देशों की यात्राएं प्राथमिकताओं के आधार पर होंगी और नेपाल दोनों देशों के समक्ष अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से रखेगा।

इस बीच, प्रधानमंत्री शाह अपनी अगुवाई में नयी सरकार के गठन के बाद पहली विदेश यात्रा पर अमेरिका गए थे। वह हाल में न्यूयॉर्क से लौटे हैं।

खनाल ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शाह के संबोधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया।

शाह ने 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में महासभा को संबोधित किया और जलवायु परिवर्तन तथा पर्वतीय समुदायों पर आपदाओं के असर समेत कई मुद्दों पर नेपाल की चिंताएं जाहिर कीं।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष पिछले महीने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का जिक्र किया और इस त्रासदी को जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ते हुए एक ऐसे देश के लिए जलवायु न्याय की मांग की जिसका जलवायु परिवर्तन में योगदान न के बराबर है।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश