एनएसए डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे, विशेष प्रतिनिधि वार्ता में भाग लेंगे
एनएसए डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे, विशेष प्रतिनिधि वार्ता में भाग लेंगे
बीजिंग, 23 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे और सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे।
डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी।
हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं।
यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।
शी की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है।
दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है।
उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।
जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है, और सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।’’
अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति ‘‘फिलहाल आम तौर पर स्थिर’’ है।
गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की।
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।’’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को ‘बहुत गंभीर’ मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना ‘‘सबसे जरूरी’’ है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।
इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का ‘‘अटूट और अभिन्न’’ हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस ‘‘निर्विवाद वास्तविकता’’ को बदल नहीं सकती।
भाषा वैभव नेत्रपाल
नेत्रपाल

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