नेपाल में अचानक आई बाढ़ से करीब 100 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ से करीब 100 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ से करीब 100 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता
Modified Date: August 26, 2026 / 10:38 pm IST
Published Date: August 26, 2026 10:38 pm IST

काठमांडू, 26 अगस्त (भाषा) तिब्बत की सीमा के निकट मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई और करीब 100 लोगों की मौत हो गई, वहीं 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हो गए। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, कई पुल बह गए और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया और उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण, रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में जबरदस्त बाढ़ आ गई।

इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

नेपाल सरकार ने कहा कि 95 शव बरामद किए गए हैं और करीब 500 लोग लापता हैं, जबकि चीन के सरकारी सीजीटीएन न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं।

सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे वीडियो में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी में भारी पैमाने पर तबाही नजर आ रही है। इस वीडियो में तेज बहाव के साथ एक विशाल लहर को दो मंजिला इमारत के ऊपर से गुजरते और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहाते हुए देखा जा सकता है।

कई लोगों को पहले पानी के आने की आवाज सुनकर भागते हुए देखा गया, लेकिन कुछ ही सेकेंड में वे अचानक आई बाढ़ के बाद जमा हुए कीचड़ और मलबे में दब गए।

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में चल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और उन्हें हालात से निपटने के लिए हर संभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नयी दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए। ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।

भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों को बचाने और राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ मिलकर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री नंबर जारी किए। बीजिंग में भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किया।

अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए लगभग 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 प्रवासी भारतीय शामिल हैं।

इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं।

गैर-लाभकारी संस्था ईशा फ़ाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे।

इसके संस्थापक सद्गुरु ने कहा, ‘‘आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों में से किसी के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।’’ साथ ही उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं।

बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि उस खास आव्रजन केंद्र का पूरा स्टाफ संपर्क से बाहर है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं।

उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए, क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं।

भारतीयों और प्रवासी भारतीयों के अलावा, लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज़्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ़्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं।

इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं।

इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।

बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रमुख चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं।

भूजल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में बारिश की वजह से नहीं आई है।

नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने दोपहर में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘चीन से मिली जानकारी के मुताबिक, नदी के बहाव में रुकावट वाली जगह पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह से नहीं निकला है, इसलिए भोटे कोशी और त्रिशूली इलाकों में खतरा बना हुआ है।’’

एनडीआरआरएमए ने बाद में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भले ही उस जगह से झील का पानी पूरी तरह नहीं निकला है जहां नदी का बहाव रुका हुआ है, फिर भी भोटे कोशी और त्रिशूली इलाकों में खतरा बना हुआ है। लोगों से अपील की जाती है कि वे नदी से दूर रहें और अगली सूचना मिलने तक सुरक्षित जगहों पर ही रहें।’’

काठमांडू पोस्ट के अनुसार 42 किलोमीटर लंबी सड़क के साथ 19 पुल बह गए।

हालात का जायज़ा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद, प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई, साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की।

उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया।

नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हर संभव प्रयास करने का आदेश दिया।

आपातकालीन राहत कार्यों में मदद के लिए चीनी सेना की शिगाजे टुकड़ी से कुल 145 अधिकारियों और जवानों को प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्र में भेजा है।

शी ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और घायलों को समय पर इलाज मुहैया कराने को कहा। उन्होंने निगरानी और अग्रिम चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने, वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाने पर भी जोर दिया।

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने अचानक बाढ़ से हुई जान-माल की हानि पर दुख व्यक्त किया।

पिछले साल भी भोटे कोशी में दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी जिनसे रसुवा में भारी तबाही हुई थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में