इमरान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए पाक संसद की बैठक बृहस्पतिवार को
इमरान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए पाक संसद की बैठक बृहस्पतिवार को
(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 31 मार्च (भाषा) पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ संयुक्त विपक्ष द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के लिए संसद के निचले सदन की बैठक बृहस्पतिवार को होगी। इमरान सरकार दो प्रमुख सहयोगियों के सत्तारूढ़ गठबंधन से अलग होने के बाद बहुमत खो चुकी है।
नेशनल असेंबली के सचिवालय द्वारा जारी कार्यक्रम के मुताबिक, संसद भवन में निचले सदन का सत्र शाम चार बजे (स्थानीय समयानुसार) शुरू होगा।
सचिवालय ने सत्र के लिए 24 सूत्री एजेंडा भी जारी किया, जिसमें अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शामिल है।
कार्यक्रम के अनुसार, नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ 28 मार्च को पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू करेंगे।
शरीफ ने पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद ए-95 के तहत अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था और इस पर 161 सदस्यों ने दस्तखत कर रखे हैं।
अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान तीन अप्रैल को होने की उम्मीद है, जिससे पहले दोनों पक्ष संसद में इस पर बहस करेंगे।
इमरान सरकार के दो अहम सयोगियों-मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) और बलूचिस्तान अवामी पार्टी (बीएपी) के विपक्षी मोर्चे में शामिल होने के बाद से विपक्ष की स्थिति और मजबूत हो गई है।
हालांकि, इमरान पर इस्तीफे के बढ़ते दबाव के बीच उनके मंत्रियों का कहना है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ‘आखिरी ओवर की आखिरी गेंद’ तक लड़ाई जारी रखेंगे।
इमरान को उनकी सरकार गिराने की विपक्ष की कोशिशों को नाकाम करने के लिए 342 सदस्यीय निचले सदन में 172 वोट की जरूरत है। हालांकि, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया है कि विपक्ष के पास 175 सांसदों का समर्थन है और प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।
पाकिस्तान में कोई भी प्रधानमंत्री अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। साथ ही पाकिस्तान के इतिहास में कोई भी प्रधानमंत्री अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से अपदस्थ नहीं हुआ है और इमरान इस चुनौती का सामना करने वाले तीसरे प्रधानमंत्री हैं।
मंगलवार को इमरान ने अपनी पार्टी के सांसदों को उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दिन नेशनल असेंबली के सत्र में हिस्सा न लेने की सख्त हिदायत दी थी।
इमरान 2018 में ‘नया पाकिस्तान’ बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन वह जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों जैसी बुनियादी समस्या को दूर करने में नाकाम साबित हुए जिससे विपक्ष को उन पर हावी होने का मौका मिल गया।
भाषा पारुल मनीषा
मनीषा

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