पाकिस्तान की अदालत ने ईशनिंदा में पूर्व सैन्य अधिकारी को सुनाई गई मौत की सजा रद्द की

पाकिस्तान की अदालत ने ईशनिंदा में पूर्व सैन्य अधिकारी को सुनाई गई मौत की सजा रद्द की

पाकिस्तान की अदालत ने ईशनिंदा में पूर्व सैन्य अधिकारी को सुनाई गई मौत की सजा रद्द की
Modified Date: February 9, 2026 / 08:34 pm IST
Published Date: February 9, 2026 8:34 pm IST

(एम.जुल्करनैन)

लाहौर, नौ फरवरी (भाषा) लाहौर उच्च न्यायालय ने ईशनिंदा के मामले में एक पूर्व सैन्य अधिकारी को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को रद्द करते हुए सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया है। अदालत के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

एक सत्र न्यायालय ने पिछले साल पंजाब सूबे की राजधानी लाहौर से लगभग 250 किलोमीटर दूर रावलपिंडी शहर में पैगंबर के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में कर्नल (सेवानिवृत्त)मुहम्मद आरिफ को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी।

इस मामले में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान नामक कट्टरपंथी इस्लामी संस्थान के एक कार्यकर्ता ने शिकायत की थी। हाल ही में शहबाज शरीफ सरकार ने इस संगठन को प्रतिबंधित किया है।

कर्नल आरिफ के वकील इमरान मलिक ने बताया कि उनके मुवक्किल 2024 में रावलपिंडी के लाल कुर्ती स्थित एक बाजार में एक रेस्तरां में अपनी पत्नी के साथ गए थे, तभी चार युवकों ने उनकी पत्नी पर फब्तियां कसना शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘जब कर्नल आरिफ ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तब युवकों ने उनके साथ गाली-गलौच की, जिसके परिणामस्वरूप उनके बीच हाथापाई हुई। कर्नल आरिफ ने हमलावरों को चेतावनी दी कि वह संबंधित सैन्य अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराएंगे ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।’’

वकील ने बताया कि चारों व्यक्तियों में से एक कामरान प्रतिबंधित टीएलपी का पदाधिकारी था। युवकों ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए घटना को धार्मिक रंग दिया और कर्नल आरिफ के खिलाफ ईशनिंदा का मामला दर्ज कराया।

उन्होंने बताया कि टीएलपी कार्यकर्ताओं ने उस पुलिस थाने को भी घेर लिया था जहां आरिफ को रखा गया था और उन्हें उनके हवाले करने की मांग की थी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले में न्याय सुनिश्चित करने का आश्वासन मिलने पर वे तितर-बितर हुए।

वकील ने बताया कि पिछले साल रावलपिंडी की सत्र अदालत ने कर्नल आरिफ को मौत की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्होंने लाहौर उच्च न्यायालय का रुख किया था।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


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