पाकिस्तान: नौ मई को हुए दंगे के मामले में पत्रकारों समेत सात लोगों को उम्रकैद की सजा

पाकिस्तान: नौ मई को हुए दंगे के मामले में पत्रकारों समेत सात लोगों को उम्रकैद की सजा

पाकिस्तान: नौ मई को हुए दंगे के मामले में पत्रकारों समेत सात लोगों को उम्रकैद की सजा
Modified Date: January 2, 2026 / 07:15 pm IST
Published Date: January 2, 2026 7:15 pm IST

इस्लामाबाद, दो जनवरी (भाषा) पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी अदालत ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद 2023 में हुई हिंसा और दंगों के मामले में पत्रकारों, सेना के पूर्व अधिकारियों और यूट्यूबरों सहित सात आरोपियों को दो अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थकों ने नौ मई, 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के विरोध में हिंसक प्रदर्शन किये थे और सेना के प्रतिष्ठानों व अन्य सरकारी संपत्तियों में आग लगा दी थी व तोड़फोड़ की थी।

यूट्यूबर आदिल रजा, पत्रकार वजाहत सइद खान, साबिर शाकिर व शाहीन सहबाई, एंकर हैदर रजा मेहदी, विश्लेषक मोइद पीरजादा और पूर्व सैन्य अधिकारी अकबर हुसैन के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।

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राजा, खान, सहबाई और मेहदी के खिलाफ मामले रमना थाने में दर्ज किए गए जबकि शाकिर, हुसैन और पीरजादा के खिलाफ मामले इस्लामाबाद के आबपारा थाने में दर्ज किए गए।

अभियोजन पक्ष ने नौ मई की घटनाओं के संबंध में दोषी व्यक्तियों पर ‘सरकारी संस्थानों के खिलाफ डिजिटल आतंकवाद’ का आरोप लगाया था क्योंकि आरोपियों पर डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर हिंसा भड़काने का आरोप था।

इस्लामाबाद स्थित एटीसी न्यायाधीश ताहिर अब्बास सिप्रा ने आरोपियों के मामलों में फैसला सुरक्षित रख लिया।

चूंकि वे सभी देश से बाहर थे और आरोपों का सामना करने के लिए कभी वापस नहीं आए इसलिए आतंकवाद रोधी कानूनों के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत इनकी अनुपस्थिति में मुकदमे की सुनवाई पूरी की गई।

न्यायाधीश ने आरोपियों को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने या छेड़ने का प्रयास करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में दो मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

दोषियों को दोनों अपराधों के लिए पांच-पांच लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने आजीवन कारावास के अलावा अन्य प्रावधानों के तहत कुल 35 साल की कैद की सजा भी सुनाई और प्रत्येक पर 15 लाख पाकिस्तानी रुपयों का जुर्माना लगाया।

अदालती आदेशों के अनुसार, अगर वे दोषी पाए गए किसी भी अपराध के लिए जुर्माना भरने में विफल रहते हैं, तो उनकी कैद की अवधि छह महीने बढ़ जाएगी।

आदेश के मुताबिक, “दोषियों को सूचित किया जाता है कि उन्हें इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में सात दिनों के भीतर अपील दायर करने का अधिकार है।”

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश


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