फार्मासिस्ट को हत्या के आरोपों में भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है: ब्रिटेन की अदालत का फैसला

फार्मासिस्ट को हत्या के आरोपों में भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है: ब्रिटेन की अदालत का फैसला

फार्मासिस्ट को हत्या के आरोपों में भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है: ब्रिटेन की अदालत का फैसला
Modified Date: September 5, 2026 / 09:32 pm IST
Published Date: September 5, 2026 9:32 pm IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, पांच सितंबर (भाषा) लंदन की एक अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि हैदराबाद में अपनी पूर्व पत्नी के परिवार को निशाना बनाने और हत्या के आरोपों का सामना करने के लिए भारत में वांछित ब्रिटेन-स्थित एक फार्मासिस्ट को भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

अजित कुमार मुप्पारापु (46) लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में पेश हुए, जहां क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने भारतीय अधिकारियों की ओर से मामला पेश किया।

जिला न्यायाधीश जॉन जानी ने फैसला सुनाया कि मुप्पारापु के खिलाफ मामला बनता है और भारत में न्यायिक हिरासत के दौरान उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार के बारे में मिले आश्वासनों के आधार पर उन्हें प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

अदालत को बताया गया कि भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक पर हत्या, हत्या की कोशिश और/या हत्या की साजिश के अलग-अलग आरोपों के सिलसिले में मुकदमा चलाया जाना है।

वर्ष 2023 में हुई चार अलग-अलग घटनाओं में आरोपी ने सिरीशा मुत्तावरापु के तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद उनके परिवार को निशाना बनाया।

ब्रिटिश अदालत को बताया गया, “पहली घटना भारत में आर्सेनिक जहर देकर पत्नी और उसके परिवार की हत्या करने की साजिश है। दूसरी घटना अपने ससुर की हत्या करने की साजिश है, जिसमें शामिल अन्य लोगों ने सक्सिनिलकोलाइन इंजेक्शन का इस्तेमाल किया।”

उसे बताया गया, “तीसरी घटना में वांछित व्यक्ति (जिस व्यक्ति के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है) ने अपने ससुर की हत्या के लिए भारत में भाड़े के हत्यारों को काम पर रखने की कोशिश की। चौथी घटना में उसने अपने ससुर की हत्या के लिए ऐसे लोगों को काम पर रखा जो इस हत्या को सड़क दुर्घटना जैसा दिखा सकें।”

जुलाई 2023 में कथित तौर पर आर्सेनिक जहर के कारण सिरीशा मुत्तावरापु की मां की मौत हो गई थी; तेलंगाना अधिकारी इस मौत की जांच के सिलसिले में मुत्तावरापु की तलाश कर रहे हैं।

उनके वकीलों ने प्रत्यर्पण का विरोध करते हुए तर्क दिया है कि इसके लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं और साथ ही यह आशंका भी जताई है कि अगर आरोपी को भारत भेजा गया तो उसे प्रताड़ित किया जा सकता है।

इस मामले की सुनवाई अप्रैल में हुई थी और इस हफ्ते लिखित रूप में फैसला सुनाया गया।

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश


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