बांग्लादेश में चुनाव और सुधारों पर जनमत संग्रह की तैयारी

बांग्लादेश में चुनाव और सुधारों पर जनमत संग्रह की तैयारी

बांग्लादेश में चुनाव और सुधारों पर जनमत संग्रह की तैयारी
Modified Date: January 31, 2026 / 02:44 pm IST
Published Date: January 31, 2026 2:44 pm IST

ढाका/नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) बांग्लादेश में अराजकता भरे माहौल के बीच दो सप्ताह से भी कम समय में चुनाव होने हैं और इसके साथ ही सुधारों पर एक जनमत संग्रह भी होगा।

बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होंगे जिसमें 12.7 करोड़ से अधिक लोग मतदान करने के पात्र होंगे। इस चुनाव को व्यापक रूप से दशकों में देश का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव माना जा रहा है जो अगस्त 2024 में शेख हसीना के शासन को समाप्त करने वाले जन विद्रोह के बाद पहला चुनाव है।

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चुनाव और जनमत संग्रह के इस दोहरे अभ्यास को एक ‘‘भव्य उत्सव’’ बताया और कहा कि यह देश के इतिहास में सबसे स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान होगा। यूनुस के अनुसार यह चुनाव ‘‘नए बांग्लादेश’’ की नींव रखेगा।

हालांकि पर्यवेक्षकों का कहना है कि एक प्रमुख राजनीतिक दल की अनुपस्थिति और बढ़ते राजनीतिक तनाव ने चुनाव के प्रतिस्पर्धी स्वरूप को कमजोर किया है और स्थिरता एवं वैधता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

अपदस्थ प्रधानमंत्री हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग के दौड़ से बाहर होने के बाद मुकाबला मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी एवं उसके सहयोगियों के बीच सिमट गया है। माना जा रहा है कि इस चुनाव में बीएनपी सबसे आगे है।

जिस अवामी लीग ने पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के मुक्ति संग्राम का नेतृत्व किया था अब उसी पार्टी को प्रतिबंध का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि प्रतिबंध के बावजूद पार्टी के पास समर्थकों का एक बड़ा जनाधार होने का अनुमान है।

आजीवन अवामी लीग के समर्थक रहे ढाका निवासी 45 वर्षीय दर्जी कादर मियां ने कहा, ‘‘मुझे कोई खास उत्साह नहीं है। मैं वोट दूंगा या नहीं इसे लेकर मैं अनिश्चय की स्थिति में हूं। मुझे नहीं पता कि मुझे किसे वोट देना चाहिए।’’

दक्षिण-पश्चिमी शहर बरिशाल में कपड़ों की दुकान के मालिक एक अन्य समर्थक ने अपना नाम नहीं जाहिर करते हुए कहा कि मतदान से दूर रहने से उनके परिवार को खतरा हो सकता है क्योंकि उनकी पहचान हसीना के समर्थकों के रूप में हो सकती है और ‘‘कट्टरपंथी दक्षिणपंथी तत्व’’ उन्हें निशाना बना सकते हैं।

छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता से बेदखल हुई अवामी लीग को अंतरिम सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत भंग कर दिया। जून 2024 को आरक्षण नीति को लेकर बांग्लादेश में छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ था जिसने जुलाई में उग्र रूप ले लिया, इसी कारण इस विद्रोह को ‘जुलाई विद्रोह’ कहा जाता है और अंतत: पांच अगस्त, 2024 को शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत जाना पड़ा।

भाषा सुरभि शोभना

शोभना

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