राष्ट्रपति शी 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की यात्रा करेंगे, चीन ने ‘ऐतिहासिक’ बताया

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राष्ट्रपति शी 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की यात्रा करेंगे, चीन ने ‘ऐतिहासिक’ बताया

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  • Publish Date - September 21, 2026 / 03:59 PM IST,
    Updated On - September 21, 2026 / 03:59 PM IST

(के जे एम वर्मा)

(फाइल फोटो के साथ)

बीजिंग, 21 सितंबर (भाषा) चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर 23 से 25 सितंबर तक वाशिंगटन की यात्रा करेंगे, जो पिछले चार महीने में दोनों नेताओं के बीच दूसरी मुलाकात होगी। बीजिंग ने इस घटनाक्रम को ‘‘ऐतिहासिक’’ करार दिया है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि ट्रंप के निमंत्रण पर शी चिनफिंग अमेरिका की तीन दिवसीय यात्रा करेंगे।

गुओ ने कहा कि ट्रंप के साथ बातचीत के दौरान शी चीन-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ विश्व शांति और विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘छह महीने के भीतर दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की ये यात्राएं ऐतिहासिक साबित होंगी।’’

दोनों नेता पिछली बार मई में बीजिंग में मिले थे जब ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान उन्होंने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बातचीत की थी।

गुओ ने कहा, ‘‘चीन, अमेरिका के साथ मिलकर रणनीतिक स्थिरता वाले रचनात्मक संबंधों को और बेहतर बनाने, बातचीत एवं सहयोग को मजबूत करने तथा मतभेदों को सही ढंग से सुलझाने के लिए काम करेगा ताकि दोनों देशों के लोगों को अधिक फायदा हो और दुनिया में शांति, स्थिरता एवं समृद्धि में और योगदान दिया जा सके।’’

हांगकांग के ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की एक खबर के अनुसार शी ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में एक हवाई पट्टी पर उतरेंगे और उनके आगमन पर ट्रंप के वहां व्यक्तिगत रूप से उनका खास स्वागत करने की योजना है, जो बेहद दुर्लभ है। ऐसा इसलिए क्योंकि आम तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप विदेशी अतिथियों से ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में मुलाकात करते हैं।

दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में व्यापार शुल्क, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सैन्य संबंध, पश्चिम एशिया में संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध, अंतरिक्ष आधारित हथियारों की होड़ और ताइवान को अमेरिका की ओर से हथियारों की बिक्री समेत कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

शी की इस यात्रा से पहले रविवार को न्यूयॉर्क में चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने एआई समेत आर्थिक एवं व्यापारिक मुद्दों पर ‘‘गहन और सार्थक’’ बातचीत की।

हे के साथ बातचीत में, बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने एआई से जुड़ी ऐसी घटनाओं के लिए एक नयी सूचना प्रणाली बनाने का प्रस्ताव दिया है जो राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकती है।

बेसेंट ने न्यूयॉर्क में मीडियाकर्मियों से कहा, ‘‘हम साझा लक्ष्यों और साझा खतरों को लेकर एक साझा दृष्टिकोण चाहते हैं। हमारा मानना है कि किसी भी सीमा पार गतिविधि की तरह, दुनिया की नंबर एक और नंबर दो एआई शक्तियों के बीच अपारदर्शिता से अधिक पारदर्शिता की ओर बढ़ना बेहद महत्वपूर्ण है।’’

सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच बनी अहम सहमति को ध्यान में रखते हुए हे और बेसेंट ने आपसी चिंता वाले महत्वपूर्ण आर्थिक एवं व्यापारिक मुद्दों तथा पिछली वार्ताओं में बनी सहमति को लागू करने पर चर्चा की। इस दौरान दोनों पक्षों ने आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और परस्पर लाभकारी सहयोग के सिद्धांतों को बनाए रखा।

शी और ट्रंप के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप ने एक नए प्रतिबंध कानून ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट, 2026’ पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कानून उन्हें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों, जिनमें चीन और भारत भी शामिल हैं, पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है।

चीन ने रूस से तेल और गैस खरीद पर शुल्क लगाने के अमेरिकी प्रयासों को खारिज किया है। उसने कहा कि देशों के बीच सामान्य व्यापारिक सहयोग में तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार के बिना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समर्थन के अभाव में की जाने वाली एकतरफा प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों और दूरगामी अधिकार क्षेत्र का विरोध करता है।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि प्रतिबंधों की धमकी के बावजूद वाशिंगटन और बीजिंग दोनों पक्षों के 30-30 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों को शामिल करते हुए पारस्परिक शुल्क कटौती की रूपरेखा पर भी बातचीत कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआंग लिंग ने कहा कि बातचीत का उद्देश्य जल्द से जल्द जवाबी शुल्क कटौती व्यवस्था तक पहुंचना है।

शिखर बैठक से पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी 17 सितंबर को फोन पर बातचीत की थी जिसमें दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क पर चर्चा हुई।

शी-ट्रंप वार्ता में ईरान-अमेरिका संघर्ष का मुद्दा भी उठने की संभावना है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले सप्ताह बीजिंग का दौरा किया था और वांग यी के साथ बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि ईरान संघर्ष को जारी नहीं रखना चाहता और समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ते पर लौटने की उम्मीद करता है।

चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन ने ईरान और अमेरिका से इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर लौटने, बातचीत की व्यवस्था को फिर से स्थापित करने और आपसी चिंता वाले मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने का आग्रह किया है।

वार्ता के दौरान संभावना है कि ट्रंप चीन के राष्ट्रपति से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए दबाव डालने की अपील कर सकते हैं क्योंकि बीजिंग और मॉस्को के बीच करीबी संबंध हैं।

वहीं, यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि शी ट्रंप से ताइवान को नए अमेरिकी हथियारों की बिक्री आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह कर सकते हैं। ताइवान चीन-अमेरिका संबंधों में लंबे समय से विवाद का प्रमुख मुद्दा रहा है।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जिन देशों के साथ उसके कूटनीतिक संबंध हैं, उन्हें ताइवान के साथ औपचारिक संबंध रखने से रोकता है। बीजिंग ने द्वीप को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध किया है।

भाषा सुरभि वैभव

वैभव