पीटीआई ने ‘फर्जी मुठभेड़ों’ में 1,000 लोगों के मारे जाने के मामलों की न्यायिक जांच कराने की मांग की

पीटीआई ने 'फर्जी मुठभेड़ों' में 1,000 लोगों के मारे जाने के मामलों की न्यायिक जांच कराने की मांग की

पीटीआई ने ‘फर्जी मुठभेड़ों’ में 1,000 लोगों के मारे जाने के मामलों की न्यायिक जांच कराने की मांग की
Modified Date: April 6, 2026 / 06:16 pm IST
Published Date: April 6, 2026 6:16 pm IST

लाहौर, छह अप्रैल (भाषा) पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ संस्थापक इमरान खान और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज द्वारा गठित विशेष पुलिस बल की ‘फर्जी मुठभेड़ों’ में 1,000 से अधिक लोगों के मारे जाने की तत्काल न्यायिक जांच की मांग की है।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के एक अधिकारी के अनुसार, पिछले वर्ष पंजाब के अपराध नियंत्रण विभाग (सीसीडी) ने ‘फर्जी मुठभेड़ों’ के माध्यम से 1,000 से अधिक संदिग्धों को मार गिराया।

एचआरसीपी के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, ‘सीसीडी ने फर्जी पुलिस मुठभेड़ों की जानबूझकर नीति अपनाई है, जिसके परिणामस्वरूप गैर-न्यायेतर हत्याएं हुई हैं।’

उन्होंने बताया कि 2025 में सीसीडी ने पंजाब में 670 मुठभेड़ें कीं, जिनमें 924 संदिग्ध मारे गए, जबकि इसी अवधि में इन मुठभेड़ों में केवल दो पुलिसकर्मी मारे गए। उन्होंने कहा, ‘यह आंकड़ा इस वर्ष 1,000 को पार कर गया।’

दूसरी ओर, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने कहा कि मरियम की सीसीडी प्रांत में किसी को भी कभी भी पूरी छूट के साथ मार सकती है, जिससे पाकिस्तान में जंगल का कानून स्थापित हो रहा है। उसने सीसीडी द्वारा रची गई एक फर्जी मुठभेड़ में तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़े पाकिस्तानी मूल के एक स्पेनिश नागरिक (नौमान कैसर) के हाल में मारे जाने का हवाला दिया।

पीटीआई के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट के पूर्व सदस्य मूनिस इलाही ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘‘कैसर अपने खिलाफ जारी फर्जी हत्या के एक मामले में अपना नाम हटवाने के लिए पाकिस्तान आए थे, लेकिन पंजाब सीसीडी पुलिस ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। सीसीडी अब भाड़े के हत्यारों का एक गिरोह बन गया है जिसका इस्तेमाल कोई भी कर सकता है।’

उन्होंने कैसर के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा कि ऐसी मुठभेड़ों की जांच और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाना चाहिए।

पिछले साल मरियम ने सीसीडी का गठन किया था और उसे 13 करोड़ लोगों वाले प्रांत में अपराध दर कम करने का दायित्व सौंपा था।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने कहा कि औसतन प्रतिदिन दो से अधिक मुठभेड़ें और पंजाब के विभिन्न जिलों में रिपोर्ट किए गए समान परिचालन स्वरूप कदाचार की छिटपुट घटनाओं के बजाय एक ‘संस्थागत प्रथा’ प्रतीत होता है।

आयोग ने कहा कि विशेष पुलिस बल ने ‘पीड़ित परिवारों में भय का माहौल’ बना दिया है। उसने कहा कि फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए कुछ संदिग्धों के परिजनों पर पुलिस द्वारा मृतकों को तुरंत दफनाने का दबाव डाला जा रहा है और कानूनी कार्रवाई करने पर और अधिक नुकसान की चेतावनी दी जा रही है।

मानवाधिकार आयोग ने इस तरह की कार्रवाइयों को ‘आपराधिक धमकी और न्याय में प्रत्यक्ष बाधा’ करार दिया।

सीसीडी ने फर्जी मुठभेड़ के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी उन सशस्त्र अपराधियों के खिलाफ संयमित बल का प्रयोग करते हैं जो पुलिस पर गोली चलाते हैं।

विभाग ने इस बात पर जोर दिया कि गैरकानूनी कार्रवाइयों के प्रति उसकी ‘बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति’ है।

भाषा अमित रंजन

रंजन


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