ईरान में राष्ट्रपति पद के चुनाव में कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख रईसी की जीत

ईरान में राष्ट्रपति पद के चुनाव में कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख रईसी की जीत

ईरान में राष्ट्रपति पद के चुनाव में कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख रईसी की जीत
Modified Date: November 29, 2022 / 08:28 pm IST
Published Date: June 19, 2021 3:44 pm IST

दुबई, 19 जून (एपी) ईरान में राष्ट्रपति पद के चुनाव में देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के कट्टर समर्थक एवं कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख इब्राहीम रईसी ने शनिवार को बड़े अंतर से जीत हासिल की।

ऐसा प्रतीत होता है कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में देश के इतिहास में इस बार सबसे कम मतदान हुआ। आधिकारिक परिणामों में रईसी ने कुल मिलाकर एक करोड़ 79 लाख मत हासिल किये, जो कुल मतों का लगभग 62 प्रतिशत है। चुनावी दौड़ में उदारवादी उम्मीदवार अब्दुलनासिर हेम्माती बहुत पीछे रहे गए। बहरहाल, खामेनेई ने रईसी के सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी को अयोग्य करार दे दिया था, जिसके बाद न्यायपालिका प्रमुख ने यह बड़ी जीत हासिल की।

रईसी की उम्मीदवारी के कारण ईरान में मतदाता मतदान के प्रति उदासीन नजर आए और पूर्व कट्टरपंथी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद सहित कई लोगों ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया।

ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कम मतदान के लिए कोरोना वायरस की चुनौतियों और अमेरिकी प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया।

आधिकारिक परिणामों के अनुसार रईसी को एक करोड़ 79 लाख वोट, पूर्व रेवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहसिन रेजाई ने 34 लाख मत हासिल किए और हेम्माती को 24 लाख मत मिले। एक अन्य उम्मीदवार आमिरहुसैन गाजीजादा हाशमी को 10 लाख मत मिले।

उदारवादी उम्मीदवार एवं ‘सेंट्रल बैंक’ के पूर्व प्रमुख हेम्माती और पूर्व रेवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहसिन रेजाई ने रईसी को बधाई दी।

हेम्माती ने शनिवार तड़के इंस्टाग्राम के माध्यम से रईसी को बधाई दी और लिखा, ‘‘मुझे आशा है कि आपका प्रशासन ईरान के इस्लामी गणराज्य को गर्व करने का कारण प्रदान करेगा, महान राष्ट्र ईरान के कल्याण के साथ जीवन और अर्थव्यवस्था में सुधार करेगा।’’

रेजाई ने मतदान में हिस्सा लेने के लिए खामेनेई और ईरानी लोगों की ट्वीट करके प्रशंसा की।

रेजाई ने लिखा, ‘‘मेरे आदरणीय भाई आयतुल्ला डॉ. सैयद इब्राहीम रईसी का निर्णायक चयन देश की समस्याओं को हल करने के लिए एक मजबूत और लोकप्रिय सरकार की स्थापना का वादा करता है।’’

चुनाव में किसी उम्मीदवार का शुरुआत में ही हार स्वीकार कर लेना ईरान के चुनावों में कोई नई बात नहीं है। यह बात का संकेत देता है कि सावधानी से नियंत्रित किए गए इस मतदान में रईसी ने जीत हासिल की है। कुछ लोगों ने इन चुनावों का बहिष्कार किया है।

रईसी की जीत के बाद वह पहले ऐसे ईरानी राष्ट्रपति होंगे जिन पर पदभार संभालने से पहले ही अमेरिका प्रतिबंध लगा चुका है। उन पर यह प्रतिबंध 1988 में राजनीतिक कैदियों की सामूहिक हत्या के लिये तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेलने वाली ईरानी न्यायपालिका के मुखिया के तौर पर लगाया गया था।

एपी

देवेंद्र माधव

माधव


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