ह्यूस्टन में भारतीय अमेरिकी अभिलेखागार की स्थापना के लिए राइस विश्वविद्यालय ने की एफआईएस से साझेदारी
ह्यूस्टन में भारतीय अमेरिकी अभिलेखागार की स्थापना के लिए राइस विश्वविद्यालय ने की एफआईएस से साझेदारी
ह्यूस्टन, छह जून (भाषा) राइस विश्वविद्यालय ने ग्रेटर ह्यूस्टन क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय के इतिहास, अनुभवों और उपलब्धियों को संरक्षित करने के लिए भारतीय अमेरिकी सामुदायिक अभिलेखागार की शुरुआत की है।
यह अभिलेखागार प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए एक स्थायी संस्थागत केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो अपनी गहरी जड़ों और भारत से ऐतिहासिक संबंधों को सुरक्षित रखने के वास्ते प्रयासरत है।
इसकी औपचारिक स्थापना एक जून को ‘फॉन्ड्रेन लाइब्रेरी के वुडसन रिसर्च सेंटर’ में राइस यूनिवर्सिटी और ह्यूस्टन स्थित गैर-लाभकारी संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया स्टडीज (एफआईएस) के बीच एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से की गई थी।
इस कार्यक्रम में सामुदायिक नेता, एफआईएस अध्यक्ष कृष्णा वाविलाला और ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्यदूत डीसी मंजूनाथ मौजूद रहे।
एक दशक पुराने ‘ह्यूस्टन एशियन अमेरिकन आर्काइव’ (एचएएए) के अंतर्गत स्थापित यह केंद्रीकृत भौतिक संग्रह केंद्र मौखिक इतिहासों, तस्वीरों, दस्तावेज़ों और सामुदायिक अभिलेखों को एकत्रित और संरक्षित करेगा।
यह अभिलेखागार वाविलाला की परिकल्पना है, जो एक सेवानिवृत्त अभियंता, समाजसेवी और चार दशकों से अधिक समय से ह्यूस्टन निवासी हैं।
आयोजक स्थानीय भारतीय-अमेरिकी परिवारों और संगठनों से ऐतिहासिक दस्तावेज, पर्चे (फ्लायर्स), कार्यक्रम-संबंधी सामग्री और व्यक्तिगत अभिलेख उपलब्ध कराने का आग्रह कर रहे हैं, ताकि निजी स्मृति-चिह्नों को विदेश में भारत की जीवंत विरासत के सार्वजनिक प्रमाण में बदला जा सके।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समुदाय के स्तर से मिलने वाले ये योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से समुदाय की कहानियों और इतिहास को संरक्षित रखा जा सकेगा।
राइस विश्वविद्यालय के फॉन्ड्रेन पुस्तकालय में विशेष संग्रह विभाग की प्रमुख अमांडा फॉके ने कहा कि समुदाय से जुड़े दस्तावेज़ों और सामग्रियों (एफेमेरा) को एकत्र करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये ऐसी विशिष्ट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कहानियां सामने लाते हैं जो इतिहास की कई खाली कड़ियों को भरने में मदद करती हैं।
एचएएए की सह-संस्थापक ऐन चाओ ने कहा, ‘‘ ह्यूस्टन एशियाई-अमेरिकियों की आबादी के हिसाब से देश का सातवां सबसे बड़ा शहर है, लेकिन इस क्षेत्र में उनकी कहानियों को संजोने के लिए कोई संग्रहालय या अभिलेखागार नहीं था। इसलिए हमने इसे बनाने की शुरुआत की। हमारा लक्ष्य पूरे एशियाई समुदाय को समाहित करना है, और एफआईएस के साथ यह सहयोग हमारे दक्षिण एशियाई संग्रह को काफी समृद्ध करेगा।’’
भाषा शोभना वैभव
वैभव

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