(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, सात अप्रैल (भाषा) रूस और चीन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के उस प्रस्ताव को ‘वीटो’ कर दिया, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना था और जिसमें बार-बार संशोधन किया गया था।
प्रस्ताव में बार-बार संशोधन इस उम्मीद के साथ किया गया था कि ये दोनों देश इस पर मतदान से दूर रहेंगे।
पंद्रह सदस्यीय यूनएसएससी में बहरीन की ओर से लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट और विरोध में दो वोट पड़े। वहीं, दो सदस्यों ने मतदान से दूरी बनाई।
प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका, क्योंकि वीटो शक्ति रखने वाले सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों-रूस और चीन ने इसके विरोध में मतदान किया।
मतदान से पहले, संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मिशन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। कच्चे माल और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अवरुद्ध है। ईरान की अवैध कार्रवाइयों के कारण दुनिया भर में अरबों लोग बुनियादी वस्तुओं के लिए अधिक कीमत चुका रहे हैं। अब समय आ गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की जाए।’’
यूएई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ‘‘जलडमरूमध्य खोलने’’ संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी देने और ईरान के हमलों तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष उससे उत्पन्न खतरों को समाप्त करने का आग्रह किया।
बहरीन खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और जॉर्डन के समर्थन से होर्मुज जलडमरूमध्य पर सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव ले आया था।
बहरीन वर्तमान में अप्रैल महीने के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है।
हालांकि, वीटो शक्ति रखने वाले स्थायी सदस्य रूस चीन और फ्रांस ने बल प्रयोग की मंजूरी का विरोध किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को रणनीतिक महत्व वाले जलमार्ग खोलने या अपने बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमलों का सामना करने के लिए निर्धारित की गई समय सीमा से कुछ घंटे पहले यह मतदान हुआ।
दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन आमतौर पर इसी जलमार्ग से होता है और युद्ध के दौरान इस जलडमरूमध्य पर ईरान की मजबूत पकड़ के कारण तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।
हालांकि, यदि यह प्रस्ताव पारित भी हो जाता, तो भी पांचवें सप्ताह में पहुंच चुके इस युद्ध पर शायद ही इसका कोई प्रभाव पड़ता, क्योंकि रूस और चीन को ‘वीटो’ करने से रोकने के लिए मतदान से दूर रखने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव को काफी कमजोर कर दिया गया था।
बहरीन के प्रारंभिक प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन सुनिश्चित करने और इसे बंद करने के प्रयासों को रोकने के लिए ‘‘सभी आवश्यक साधनों’’ (संयुक्त राष्ट्र की शब्दावली में सैन्य कार्रवाई भी शामिल) का इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया था।
सुरक्षा परिषद में ‘वीटो’ शक्ति रखने वाले पांच देशों में शामिल रूस, चीन और फ्रांस ने बल प्रयोग को मंजूरी देने का विरोध किया था, जिसके बाद प्रस्ताव में संशोधन किया गया और उसमें आक्रामक कार्रवाई से संबंधित सभी संदर्भ हटा दिए गए। इसमें केवल ‘‘सभी आवश्यक रक्षात्मक साधनों’’ को ही अधिकृत किया गया।
बाद में प्रस्ताव को और कमजोर कर दिया गया, ताकि सुरक्षा परिषद की मंजूरी (जो कि कार्रवाई का आदेश होता है) का कोई भी जिक्र न रहे और इसके प्रावधान केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित कर दिए जाएं। पिछले मसौदों में आसपास के जलक्षेत्रों को भी शामिल किया गया था।
मंगलवार को वीटो किए गए प्रस्ताव में ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक समुद्री मार्गों के इस्तेमाल में रुचि रखने वाले देशों को परिस्थितियों के अनुरूप रक्षात्मक प्रकृति के समन्वित प्रयास करने के लिए दृढ़तापूर्वक प्रोत्साहित किया गया था, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान दिया जा सके।’’
इसमें व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा मुहैया करना और जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बंद करने, बाधित करने या उसमें हस्तक्षेप करने के प्रयासों को रोकना शामिल किया गया था।
प्रस्ताव में यह भी मांग की गई थी कि ईरान व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य से उनके आवागमन की स्वतंत्रता में बाधा डालना और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना बंद करे।
भाषा सुभाष पारुल
पारुल