कोविड-19 टीके से गंभीर प्रतिकूल असर का दूसरा मामला, डॉक्टर ने कहा- दर्द और मौत के मुकाबले ये एलर्जी बेहद कमतर

कोविड-19 टीके से गंभीर प्रतिकूल असर का दूसरा मामला, डॉक्टर ने कहा- दर्द और मौत के मुकाबले ये एलर्जी बेहद कमतर

कोविड-19 टीके से गंभीर प्रतिकूल असर का दूसरा मामला, डॉक्टर ने कहा- दर्द और मौत के मुकाबले ये एलर्जी बेहद कमतर
Modified Date: November 29, 2022 / 08:30 pm IST
Published Date: December 19, 2020 3:57 am IST

फेयरबैंक्स (अमेरिका), 19 दिसंबर (एपी) ।  अमेरिका के अलास्का में कोविड-19 टीके से गंभीर प्रतिकूल असर पड़ने का दूसरा मामला सामने आया है। दोनों ही प्रभावित स्वास्थ्यकर्मी हैं।

हालिया मामले में एक महिला चिकित्साकर्मी को बृहस्पतिवार को फेयरबैंक्स में टीका लगा और इसके 10 मिनट बाद ही प्रतिकूल असर दिखाई देने लगा। उनमें ‘एनाफिलेक्टिक’ लक्षण सामने आए, इसमें जीभ का सूज जाना, कर्कश आवाज और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें शामिल हैं।

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महिला को फेयरबैंक्स मेमोरियल अस्पताल के आपात विभाग में एपीनेफरीन की दो खुराक दी गई और छह घंटे के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एंजलिक रमीरेज ने एक बयान में कहा, ‘‘ हालांकि एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाएं असामान्य हैं यद्यपि यह दवाई लेने या टीके की खुराक से ऐसा हो सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिए हमारे कर्मचारी एनाफिलेक्सिस से संबंधित लक्षणों का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित हैं। हमारे कर्मचारियों के स्वास्थ्य में सुधार है और उन्हें कल घर भेज दिया गया था।’’

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अस्पताल की मातृ कंपनी फाउंडेशन हेल्थ पार्टनर्स ने कहा कि महिला अपनी पहचान नहीं जाहिर करना चाहती थीं लेकिन उन्होंने एक बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि वे टीका लेने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगी। उनका कहना है कि एक डॉक्टर होने के नाते उन्होंने कोविड-19 से पीड़ित लोगों का दर्द और मौतें देखी हैं और उसके मुकाबले उन्हें हुई एलर्जी बेहद कमतर है।

इससे पहले मंगलवार को काउंटी के बार्टलेट रीजनल अस्पताल में टीके से गंभीर प्रतिकूल असर का मामला सामने आया था। महिला स्वास्थ्यकर्मी को एनाफिलेक्सिस से पीड़ित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इसी अस्पताल के एक और कर्मचारी में अगले दिन प्रतिकूल असर देखे गए लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह आंशिक प्रतिक्रिया है और व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती किए जाने की जरूरत नहीं है।


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