सुरक्षा परिषद की व्यवस्था में समस्या स्वीकार किये जाने की जरूरत: गुतारेस

सुरक्षा परिषद की व्यवस्था में समस्या स्वीकार किये जाने की जरूरत: गुतारेस

सुरक्षा परिषद की व्यवस्था में समस्या स्वीकार किये जाने की जरूरत: गुतारेस
Modified Date: March 15, 2026 / 10:45 am IST
Published Date: March 15, 2026 10:45 am IST

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 15 मार्च (भाषा) संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि यह स्वीकार करना आवश्यक है कि ‘‘सुरक्षा परिषद की व्यवस्था में समस्या है’’ और यह वर्तमान दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करती तथा स्थायी सदस्यों द्वारा वीटो का इस्तेमाल किए जाने के कारण संघर्षों को रोकने में असमर्थ है।

गुतारेस ने शनिवार को बेरूत में संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमें यह स्वीकार करना होगा कि सुरक्षा परिषद के साथ एक समस्या है। आज सुरक्षा परिषद मौजूदा विश्व का प्रतिनिधित्व नहीं करती। यह दरअसल 1945 के बाद के विश्व का प्रतिनिधित्व करती है।’’

उन्होंने कहा कि 15 देशों की परिषद में तीन स्थायी सदस्य यूरोप से, एक एशिया से और एक अमेरिका से हैं, जबकि अफ्रीका या लैटिन अमेरिका से कोई स्थायी सदस्य नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, वीटो के कारण परिषद को वैधता और दक्षता दोनों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हमने बार-बार देखा है कि जब भी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है और उसे रोकना आवश्यक होता है, तो कोई देश वीटो का इस्तेमाल कर लेता है और सुरक्षा परिषद कार्रवाई नहीं कर पाती।’’

गुतारेस ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, यह एक ऐसी चीज है जिसे हम बार-बार देख रहे हैं और मुझे उम्मीद नहीं है कि निकट भविष्य में स्थिति में कोई बदलाव आएगा।’’

परिषद में चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका वीटो शक्ति वाले पांच स्थायी सदस्य हैं, जबकि 10 अस्थायी सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए निर्वाचित होते हैं और उनके पास वीटो शक्ति नहीं होती।

भारत सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करने के प्रयासों में दशकों से अग्रणी रहा है जिसमें इसकी स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग शामिल है।

भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि वह सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य का हकदार है।

भाषा देवेंद्र सिम्मी

सिम्मी


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