खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान का नया सर्वोच्च नेता बनने के कई दावेदार

खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान का नया सर्वोच्च नेता बनने के कई दावेदार

खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान का नया सर्वोच्च नेता बनने के कई दावेदार
Modified Date: March 2, 2026 / 09:30 pm IST
Published Date: March 2, 2026 9:30 pm IST

तेहरान, दो मार्च (एपी) अमेरिका-इजराइल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद, ईरानी नेता नया नेतृत्व चुनने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

खामेनेई ने 37 वर्षों तक ईरान पर शासन किया था।

ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से यह दूसरा मौका है, जब एक नये सर्वोच्च नेता को चुना जा रहा है। संभावित उम्मीदवारों में पश्चिमी देशों के साथ टकराव के लिए प्रतिबद्ध कट्टरपंथी नेताओं से लेकर राजनयिक संबंध स्थापित करने के इच्छुक सुधारवादी नेता भी शामिल हैं।

युद्ध, शांति और विवादित परमाणु कार्यक्रम सहित सभी प्रमुख मुद्दों पर सर्वोच्च नेता ही अंतिम निर्णय लेते हैं।

इस बीच, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसनी एजेई और वरिष्ठ शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अली रजा अराफी की सदस्यता वाली एक अंतरिम शासी परिषद दशकों के सबसे बड़े संकट से देश को उबारने में जुटी है।

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में नये सर्वोच्च नेता को चुना जाएगा।

सर्वोच्च नेता की नियुक्ति 88 सदस्यीय विशेषज्ञों के पैनल द्वारा की जाती है, जिन्हें कानून के अनुसार शीघ्र ही उत्तराधिकारी का नाम घोषित करना होता है।

इसमें शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं। ईरान की संवैधानिक निगरानी संस्था, ‘गार्डियन काउंसिल’ द्वारा उनकी उम्मीदवारी को मंजूरी मिलने के बाद जनमत संग्रह द्वारा इन धर्मगुरुओं को चुना जाता है।

खामेनेई का दोनों धार्मिक संगठनों पर काफी प्रभाव था, इसलिए यह संभावना कम है कि अगला नेता उनसे अलग विचारों वाला होगा।

शीर्ष दावेदारों में शामिल हैं–

मोजतबा खामेनेई

अयातुल्ला खामेनेई के बेटे एवं शिया धर्मगुरु मोजतबा को व्यापक रूप से संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। उनके ईरान के अर्धसैनिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड से मजबूत संबंध हैं, लेकिन उन्होंने कभी कोई पद ग्रहण नहीं किया है। हालांकि, इस्लामी गणराज्य लंबे समय से वंशानुगत शासन की आलोचना करता रहा है।

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अयातुल्ला अली रजा अराफी

अराफी अंतरिम शासी परिषद के सदस्य हैं। वरिष्ठ शिया धर्मगुरु अराफी को 2019 में खामेनेई ने गार्डियन काउंसिल के सदस्य के रूप में चुना था, और तीन साल बाद उन्हें विशेषज्ञों की सभा के लिए निर्वाचित किया गया। वह मदरसों के एक नेटवर्क का नेतृत्व करते हैं।

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हसन रूहानी

अपेक्षाकृत उदारवादी रूहानी 2013 से 2021 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे और उन्होंने (अमेरिका के) बराक ओबामा प्रशासन के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौता किया, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने (राष्ट्रपति पद पर) अपने पहले कार्यकाल के दौरान रद्द कर दिया था।

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हसन खुमैनी

खुमैनी इस्लामी गणराज्य के संस्थापक, अयातुल्ला रुहुल्ला खुमैनी के पोते हैं। उन्हें अपेक्षाकृत उदारवादी माना जाता है, लेकिन उन्होंने सरकार में कभी कोई पद नहीं संभाला है।

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अयातुल्ला मोहम्मद मेहदी मीरबाघेरी

मीरबाघेरी एक वरिष्ठ धर्मगुरु हैं, जो कट्टरपंथियों के बीच लोकप्रिय हैं और विशेषज्ञों की सभा के सदस्य हैं।

वह दिवंगत अयातुल्ला मोहम्मद ताघी मेस्बा यज़दी के करीबी रहे हैं, जो कट्टरपंथी विचारधारा के समर्थक थे और जिन्होंने लिखा था कि ईरान खुद को ‘‘विशेष हथियार’’ बनाने के अधिकार से वंचित नहीं करे, जो परमाणु हथियारों की ओर अप्रत्यक्ष रूप से इशारा था।

कोविड-19 महामारी के दौरान, मीरबाघेरी ने स्कूलों को बंद करने की निंदा करते हुए इसे ‘‘षड्यंत्र’’ बताया था।

वह वर्तमान में कोम स्थित इस्लामी सांस्कृतिक केंद्र के प्रमुख हैं, जो ईरान में इस्लामी शिक्षा का मुख्य केंद्र है।

एपी सुभाष दिलीप

दिलीप


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