स्टॉर्मर: भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में अहम भूमिका निभाई
स्टॉर्मर: भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में अहम भूमिका निभाई
लंदन, 22 जून (एपी) ब्रिटेन में वर्ष 2024 की जुलाई में भारी जीत के साथ प्रधानमंत्री चुने गए मानवाधिकार मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता केअर स्टॉर्मर ने भारत के साथ बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिलाने का वादा किया था।
सोमवार की सुबह लंदन में ‘10 डाउनिंग स्ट्रीट’ (ब्रिटिश प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) की सीढ़ियों से अपने इस्तीफे की घोषणा करने से कुछ दिन पहले ही, उन्होंने फ्रांस में जी-सात शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी जहां दोनों नेताओं ने एफटीए को लागू करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई तय की थी।
अब जब भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू होने वाला है (जिससे दोनों देशों के बीच 48 अरब पाउंड के व्यापारिक रिश्ते को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है) तब ब्रिटेन को नया नेता मिल जाने की उम्मीद है।
पिछले साल अक्टूबर में मुंबई दौरे के दौरान स्टॉर्मर ने कहा था, ‘‘यह सिर्फ कागज का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह विकास के लिए एक ‘लांच पैड (प्रस्थान बिन्दु)’ है। वर्ष 2028 तक भारत के दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और उनके साथ व्यापार के तेज और सस्ता होने के साथ, ऐसे कई बेमिसाल मौके हैं जिनका फायदा उठाया जा सकता है।’’
केअर स्टॉर्मर को ब्रिटेन का प्रधानमंत्री इसलिए चुना गया था ताकि वे एक सुरक्षित और विश्वसनीय नेतृत्व प्रदान कर सकें, जो कंजर्वेटिव पार्टी के शासनकाल के दौरान रहे सालों के राजनीतिक गतिरोध और अराजकता को समाप्त कर सके।
हालांकि, उनका कार्यकाल दो साल से भी कम समय में समाप्त हो रहा है। इसके पीछे कई गलतियां, पार्टी की भीतरी कलह और फैसले लेने में एक ऐसी भारी चूक रही, जिसने अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें जेफरी एपस्टीन से जुड़े घोटालों में उलझा दिया। जबकि वह कभी एपस्टीन से मिले भी नहीं थे और जिसके यौन अपराधों में उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी।
सोमवार को स्टॉर्मर ने एक भावनात्मक बयान में कहा कि वह सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नेता का पद छोड़ रहे हैं, हालांकि आगामी दिनों में लेबर पार्टी का नया नेता चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी पार्टी अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में हमारा नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हूं या नहीं। मैंने इस सवाल पर अपने संसदीय दल का जवाब सुन लिया है, और मैं उस जवाब को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं।’’
मैनचेस्टर विश्वविद्यलय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रॉब फोर्ड ने कहा कि स्टॉर्मर का ‘यूएसपी (मुख्य खासियत)’ यह था कि ‘‘अब कोई नाटकीय राजनीति नहीं होगी।’’
फोर्ड ने कहा कि इसके विपरीत उनकी सरकार ‘‘ठीक उसी के उलट साबित हुई जैसा उन्होंने होने का दावा किया था, और ऐसी स्थिति में टिके रह पाना बहुत कठिन होता है।’’
सात मई को हुए मध्यावधि स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में स्टॉर्मर की लेबर पार्टी की करारी हार ने उनके पद से हटने की जमीन तैयार कर दी। इसके बाद सरकार से इस्तीफों और चुनौतियों का एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिससे ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम का 10 डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास) पहुंचना लगभग तय लग रहा है।
स्टॉर्मर 4 जुलाई, 2024 को चुनाव जीतकर 14 साल बाद मध्य-वामपंथी लेबर पार्टी को फिर से सत्ता में वापस लाने में सफल रहे थे। तब स्टॉर्मर की अगुवाई में पार्टी ने हाउस ऑफ कॉमन्स की 650 सीट में से 411 सीटें जीती थीं, लेकिन उसके बाद से आज वह सबसे कमजोर स्थिति में हैं।
चुनाव जीतने के अगले दिन 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर खड़े होकर स्टॉर्मर ने ‘राजनीति में सम्मान’ बहाल करने और ‘जनसेवा’ की सरकार चलाने का संकल्प लिया था।
कंजर्वेटिव शासन के अंतिम वर्षों में ऐसी उथल-पुथल मची थी कि लगातार घोटालों के आरोपों के बीच बोरिस जॉनसन व लिज ट्रस को एक के बाद एक तेजी से प्रधानमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। ऐसे में स्टॉर्मर चुने गए।
स्टॉर्मर को पद से हटाने वाली कुछ समस्याएं उनकी जीत के आधार में ही पहले से मौजूद थीं, जो समर्थन के एक व्यापक लेकिन उथले आधार पर टिकी हुई थी। संसद में लेबर पार्टी के पास भारी बहुमत होने के बावजूद, उसे केवल 34 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन प्राप्त था और उनमें से कई लोग लेबर पार्टी के प्रति उत्साह के बजाय कंजर्वेटिव पार्टी के प्रति गुस्से से प्रेरित दिखाई दे रहे थे।
शुरुआत से ही उनकी सरकार के प्रति उत्साह की इस कमी से बनी स्थिति को स्टॉर्मर द्वारा उठाए गए गलत कदमों ने और जटिल कर दिया।
डिजाइनर चश्मे और टेलर स्विफ्ट के संगीत कार्यक्रम के टिकटों सहित मुफ्त उपहार स्वीकार करने पर शुरुआती विवाद हुआ, जिसके बाद नीतिगत फैसलों से ‘यू-टर्न’ लेने का सिलसिला शुरू हो गया।
पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत के महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त करने का फैसला स्टॉर्मर को बहुत भारी पड़ा। मैंडेलसन ने 2003 में खुद को एपस्टीन का ‘सबसे अच्छा दोस्त’ कहा था। सितंबर 2025 में ऐसे दस्तावेज सामने आए जिससे पता चला कि एपस्टीन के साथ उनके संबंध कितने करीबी थे। स्टॉर्मर ने मैंडेलसन को बर्खास्त कर दिया, लेकिन आने वाले महीनों में और अधिक खुलासों ने उनके नेतृत्व को संकट में डाल दिया।
स्टॉर्मर का कानूनी करियर इंग्लैंड और वेल्स के मुख्य अभियोजक बनने के साथ शिखर पर पहुंचा था। क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस का नेतृत्व करने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें नाइटहुड उपाधि दी गई थी। लेकिन विरोधियों ने उनकी ‘सर’ की उपाधि का इस्तेमाल उन्हें अभिजात्य वर्ग से जुड़ा दिखाने के लिए किया।
उनके बारे में यही धारणा बनी रही, भले ही वह एक साधारण परिवार से आते हैं और उनकी पसंद-नापसंद भी बहुत आम है। स्टॉर्मर ने अपने भाषणों में बार-बार उल्लेख किया है कि वह एक टूलमेकर (औजार बनाने वाले) के बेटे हैं और उन्हें फुटबॉल से बेहद प्यार है।
वह 63 वर्ष की उम्र में भी फुटबॉल खेलते हैं। वह और उनकी पत्नी विक्टोरिया के दो बच्चे हैं जिन्हें वे सार्वजनिक चकाचौंध से दूर रखने का प्रयास करते हैं।
साल 2015 में पहली बार सांसद चुने गए स्टॉर्मर को 1935 के बाद से पार्टी के सबसे खराब चुनाव परिणाम के बाद, पांच साल बाद लेबर पार्टी का नेतृत्व करने और उसे फिर से खड़ा करने के लिए चुना गया था। उन्होंने अनुभवी समाजवादी नेता जेरेमी कॉर्बिन से कमान संभालने के बाद लेबर पार्टी को राजनीतिक केंद्र की ओर खींचा। कॉर्बिन ने 2017 और 2019 के चुनावों में लेबर को करारी हार की ओर धकेला था।
संसद में स्टॉर्मर के सूक्ष्म विश्लेषणात्मक और अभियोगात्मक कौशल का प्रदर्शन तब देखने को मिलता था, जब वह अपने प्रतिद्वंद्वी रहे तीन कंजर्वेटिव प्रधानमंत्रियों को कठघरे में खड़ा करते थे।
वह खासतौर पर बोरिस जॉनसन पर तीखा हमला करते थे जिन्होंने कोविड-19 के नियमों का उल्लंघन करते हुए डाउनिंग स्ट्रीट के भीतर पार्टियां करने की अनुमति दी थी।
लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में जिस अलग तरह के कौशल की आवश्यकता थी, उसमें स्टॉर्मर अक्सर पिछड़ते दिखे। उनमें उस लचीलेपन और राजनीतिक सूझबूझ की कमी मानी गई, जो इस पद के लिए आवश्यक है।
स्टॉर्मर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से निपटने में कहीं अधिक सहज दिखाई दिए, विशेष रूप से रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन के लिए यूरोपीय समर्थन जुटाने में और अमेरिका-इजराइल के ईरान के साथ युद्ध से पैदा हुई आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल को कम करने के लिए काम करने में उन्होंने भूमिका निभाई।
उस संघर्ष ने स्टॉर्मर और ट्रंप के बीच एक दरार पैदा कर दी, जिनके साथ उन्होंने अपनी अलग-अलग राजनीति के बावजूद शुरू में एक दोस्ताना रिश्ता कायम किया था।
शुरुआत में सार्वजनिक रूप से ट्रंप की आलोचना करने से कतराने वाले स्टॉर्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकियों के बाद कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया। ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद स्टार्मर की आलोचनाएं और तीखी हो गईं।
लेबर पार्टी के कई सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम बहुमत से चुने गए थे और लेबर की घटती रेटिंग को देखकर तेजी से चिंतित होने लगे थे। स्टॉर्मर की व्यक्तिगत अप्रूवल रेटिंग गिरकर किसी भी प्रधानमंत्री की तुलना में सबसे खराब स्तर पर पहुंच गई।
मैंडेलसन की नियुक्ति के लिए स्टॉर्मर की माफी और उनका यह दावा कि उन्हें सुरक्षा जांच में मैंडेलसन के विफल रहने के बारे में पता नहीं था, जनता और नेताओं के गले नहीं उतरा।
एपी संतोष माधव
माधव

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