मानव तस्करी पर नकेल कसने के लिए ब्रिटेन और चीन के बीच नया सीमा सुरक्षा समझौता

मानव तस्करी पर नकेल कसने के लिए ब्रिटेन और चीन के बीच नया सीमा सुरक्षा समझौता

मानव तस्करी पर नकेल कसने के लिए ब्रिटेन और चीन के बीच नया सीमा सुरक्षा समझौता
Modified Date: January 29, 2026 / 08:20 pm IST
Published Date: January 29, 2026 8:20 pm IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, 29 जनवरी (भाषा) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर चीन के साथ एक नये सीमा सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय ’10 डाउनिंग स्ट्रीट’ ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

इस समझौते का उद्देश्य तस्करी करने वाले गिरोहों द्वारा अवैध रूप से प्रवासियों को ब्रिटेन में लाने के लिए इस्तेमाल होने वाली और चीन में निर्मित छोटी नौकाओं के पुर्जों के प्रवाह को रोकना है।

स्टार्मर ने इस सप्ताह अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात की। दोनों देश कुछ वर्षों के तनावपूर्ण संबंधों के बाद अपने द्विपक्षीय संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

स्कॉच व्हिस्की के निर्यात शुल्क में कमी और ब्रिटिश यात्रियों के लिए चीन की वीज़ा-मुक्त यात्रा की संभावना के अलावा, दोनों पक्ष पहली संयुक्त ब्रिटेन-चीन कानून प्रवर्तन कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक स्टार्मर ने कहा, ‘‘ प्रवासियों से संबंधित संगठित अपराधों और तस्करी गिरोहों का व्यावसायिक मॉडल सीमाओं से परे है, तथा इन्हें रोकने के लिए हमारा दृष्टिकोण भी ऐसा ही होना चाहिए। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह समझौता हमें स्रोत पर ही नावों की आपूर्ति को रोकने में मदद करेगा – जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ने से पहले ही उनका सीमा पार करना बंद हो जाएगा और सीमाओं पर हमारा नियंत्रण बहाल हो जाएगा। ’’

ब्रिटेन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष तस्करी करने वाले गिरोहों द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी नौका इंजनों में से 60 प्रतिशत से अधिक इंजनों का निर्माण चीन में हुआ था।

पिछले कुछ वर्षों में, खासकर ब्रिटेन में चीन की जासूसी गतिविधियों, यूक्रेन युद्ध में रूस के लिए चीन के समर्थन, और हांगकांग में स्वतंत्रता पर पाबंदियों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गयी थी। हांगकांग एक पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश है जिसे 1997 में चीन को सौंपा गया था।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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