कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने भारत में अपनी पहुंच का विस्तार करते हुए नया शोध केंद्र शुरू किया
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने भारत में अपनी पहुंच का विस्तार करते हुए नया शोध केंद्र शुरू किया
(अदिति खन्ना)
लंदन, 28 जनवरी (भाषा) ब्रिटेन के प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने भारत में अपनी पहुंच का विस्तार करते हुए एक नए शोध केंद्र की शुरुआत और शीर्ष स्तर के स्नातक छात्रों के लिए अतिरिक्त प्रवेश मार्गों की घोषणा की है।
विश्वविद्यालय ने मंगलवार को बताया कि ‘कैम्ब्रिज-इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्ट्डीज’ (सीएएस) नवाचार, शोध और शिक्षण पर केंद्रित होगा तथा ब्रिटेन के अग्रणी विश्वविद्यालय और भारत की तेजी से बढ़ती ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगा।
यह नया केंद्र भारत में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की गतिविधियों के लिए एक केंद्रीय मंच के रूप में काम करेगा और बौद्धिक आदान-प्रदान, नीति निर्माण में योगदान और सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देगा।
कैम्ब्रिज की कुलपति डेबोरा प्रेंटिस ने कहा, “कैम्ब्रिज-इंडिया सीएएस भारत के श्रेष्ठ शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों के साथ सहयोग स्थापित करने और इस तेजी से बढ़ती ज्ञान अर्थव्यवस्था के साथ संबंध मजबूत करने का एक रोमांचक अवसर है।”
इस सप्ताह दिल्ली आए वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं प्रोफेसर प्रेंटिस ने यह भी घोषणा की कि विश्वविद्यालय कुछ स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए अतिरिक्त आवश्यकताओं के साथ सीबीएसई की 12वीं कक्षा की योग्यता को मान्यता देगा।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने कैम्ब्रिज इंडिया रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना भी की है, जो एक कंपनी के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से आम नागरिक, कैम्ब्रिज के पूर्व छात्र और अन्य हितधारक भारत से कैम्ब्रिज में अध्ययन करने वाले छात्रों की छात्रवृत्ति, शुल्क और अन्य खर्चों के लिए धन उपलब्ध करा सकेंगे, साथ ही शोध साझेदारियों को भी समर्थन मिलेगा। इसका उद्देश्य भारत के प्रतिभाशाली छात्रों के लिए छात्रवृत्तियों के नए परोपकारी अवसर तलाशना है।
भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने कहा, “शिक्षा यूके-इंडिया विज़न 2035 के केंद्र में है। ये पहलें शोध और शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों को और करीब ला रही हैं।”
कैम्ब्रिज-इंडिया सीएएस को विभिन्न कार्यक्रमों के लिए एक ‘शीर्ष’ मंच के रूप में तैयार किया गया है, जो पिछले दशकों में भारत और कैम्ब्रिज के बीच बने द्विपक्षीय संबंधों पर आधारित होगा। यह केंद्र किसी एक भौतिक स्थान तक सीमित न रहकर भारत के विभिन्न हिस्सों में गतिविधियों को जोड़ने का ढांचा प्रदान करेगा।
अन्य घोषणाओं के तहत, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की पुरुष क्रिकेट टीम मार्च 2026 में 15 वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार भारत का दौरा करेगी। महिला टीम के भारत दौरे की भी योजना बनाई जा रही है।
विश्वविद्यालय ने भारत के साथ अपने 150 वर्षों से अधिक पुराने संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि जगदीश चंद्र बोस, श्रीनिवास रामानुजन, एम.एस. स्वामीनाथन और जयंत नार्लीकर जैसे महान वैज्ञानिक कैम्ब्रिज में अध्ययन कर चुके हैं।
नोबेल पुरस्कार विजेता सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर, वेंकी रामकृष्णन और अमर्त्य सेन के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह और पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा तथा सुभाष चंद्र बोस जैसे नेता अन्य जाने-माने भारतीय पूर्व छात्रों में शामिल हैं।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने कहा कि वह इन ऐतिहासिक संबंधों के आधार पर भारत के साथ नए और गतिशील साझेदारी संबंध विकसित करना चाहता है।
भाषा मनीषा नरेश
नरेश


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