महत्वपूर्ण खनिजों की खोज में अमेरिका अपने अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रमित
महत्वपूर्ण खनिजों की खोज में अमेरिका अपने अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रमित
(कोल्टर जी लैथ्रोप, ड्यूक विश्वविद्यालय द्वारा)
डरहम, 14 मार्च (द कन्वरसेशन) अमेरिका के लोगों की दुनिया के भूगोल के बारे में कम समझ होने की छवि रही है और मौजूदा अमेरिकी प्रशासन भी इससे अलग नहीं है, खासकर जब सही ढंग से पहचानने की बात आती है कि अमेरिका की भौगोलिक सीमा में कौन सा क्षेत्र आता है और कौन-सा नहीं है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अप्रैल 2025 का सरकारी आदेश, ‘‘अमेरिका के अपतटीय महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाना’’, इसका एक उदाहरण है। इसका उद्देश्य अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के भीतर और उससे बहुत दूर स्थित समुद्री तल के खनिजों का ‘‘पता लगाना’’ है।
अमेरिका के समुद्र तल में पाये जाने वाले खनिज अमेरिका के हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्र तल पर पाए जाने वाले खनिज ‘‘अमेरिका के’’ नहीं हैं। फिर भी, प्रशासन कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में खनन करने की अनुमति देने की योजना बना रहा है।
मैंने 1994 में समुद्री कानून के लागू होने के बाद से महासागरों को नियंत्रित करने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौतों और नियमों का अध्ययन किया है।
अमेरिका आधुनिक प्रौद्योगिकी के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है। इन सामग्रियों में बड़ी बैटरियों के लिए निकेल, मैंगनीज और कोबाल्ट तथा बिजली ग्रिड के लिए तांबा शामिल हैं। ये सभी भूमि पर पाए जाते हैं, लेकिन इनमें से कुछ समुद्र की तलहटी में भी पाए जा सकते हैं।
विशेष रुचि के विषय हैं पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स – आलू से भी छोटे आकार के समूह, जिनमें मैंगनीज और अन्य धातुएं होती हैं और जो गहरे समुद्र तल की गाद में पाए जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के एक खनन अधिकारी ने इन पिंडों को ‘‘चट्टान में लगी इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी’’ के रूप में वर्णित किया।
सितंबर 1945 में, राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने अमेरिका के तटों से लेकर समुद्र तल तक फैले एक बड़े हिस्से पर अपना दावा जताया था। ये क्षेत्र ट्रूमैन के दावे से पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ साझा थे।
इसके जवाब में, दुनियाभर के देशों ने अगले पांच दशकों में एक ऐसी प्रणाली तैयार करने में समय लगाया जिससे यह सीमित हो सके कि तटीय देश समुद्र तल के कितने हिस्से पर दावा कर सकते हैं, और महासागरों के शेष साझा क्षेत्रों को नियंत्रित करने वाले नियम स्थापित किए जा सकें।
अमेरिका में आज दुनिया के सबसे बड़े विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों में से एक है। इन क्षेत्रों में, अमेरिका समुद्री तल के खनिजों समेत सजीव और निर्जीव प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और प्रबंधन को नियंत्रित करता है।
ट्रंप का अपतटीय खनन आदेश 1980 में अधिनियमित एक अमेरिकी कानून पर आधारित है, जिसे क्षेत्र से संबंधित वार्ताओं के पूरा होने तक एक अंतरिम उपाय के रूप में लागू किया गया था।
क्या ट्रंप प्रशासन की योजना अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लंघन करती है?
इसका उत्तर शायद ही है।
अमेरिका समुद्री कानून संधि का पक्षकार नहीं है, इसलिए वह इस संधि से बाध्य नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों में इस बात को लेकर मतभेद है कि क्या अमेरिका द्वारा एकतरफा खनन से अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों से उत्पन्न दायित्वों का उल्लंघन होगा।
हां, अमेरिका को आवश्यक खनिजों की आवश्यकता है, लेकिन इन खनिजों को हासिल करने के लिए उसे अंतरराष्ट्रीय महासागरीय व्यवस्था को कमजोर नहीं करना चाहिए – एक ऐसी व्यवस्था जिसे उसने स्वयं बनाया है और जिससे उसे शायद किसी भी अन्य राष्ट्र से अधिक फायदा मिलता है।
(द कन्वरसेशन)
देवेंद्र माधव
माधव

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