ईरान युद्ध पर ट्रंप के बार-बार बदलते रुख से अमेरिकी असमंजस में
ईरान युद्ध पर ट्रंप के बार-बार बदलते रुख से अमेरिकी असमंजस में
(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 31 मार्च (भाषा) ईरान युद्ध में नाटो सहयोगियों से मदद मांगने, नाटो सहयोगियों की जरूरत नहीं होने की घोषणा करने, तेहरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी देने और फिर ऐसे हमलों को लगभग रातोंरात स्थगित करने के अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बदलते रुख से अमेरिकी असमंजस में हैं।
ईरान युद्ध पर लगातार बदलते रुख को लेकर ट्रंप को सोशल मीडिया पर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ लोग उनका मजाक उड़ाते हुए “ट्रंप ऑलवेज चिकन्स आउट (टैको)” यानी “ट्रंप दबाव के चलते अपने फैसले वापस ले लेते हैं या टाल देते हैं” हैशटैग के तहत पोस्ट कर रहे हैं।
ट्रंप ने मार्च की शुरुआत में संवाददाताओं के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में यूरोपीय देशों के साथ-साथ पश्चिम एशिया से तेल एवं गैस की आपूर्ति पर निर्भर अन्य देशों से मदद मांगी थी।
होर्मुज, ईरान के नियंत्रण वाला एक संकरा जलमार्ग है, जिसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की लगभग 20 फीसदी आपूर्ति के परिवहन के लिए किया जाता है।
ट्रंप ने कहा था, “अगर हमें उनकी ‘माइन बोट’ की जरूरत हो या किसी भी चीज की, उनके पास मौजूद किसी भी उपकरण की, तो उन्हें हमारी मदद के लिए तुरंत आगे आना चाहिए। हम चाहते हैं कि वे आएं और जलडमरूमध्य में हमारी मदद करें।”
उन्होंने हालांकि साथ ही यह भी कहा था, “मेरा मानना है कि हमें किसी की जरूरत नहीं है। हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं। हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है। हमें उनकी जरूरत नहीं है।”
होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में मदद की ट्रंप की अपील को यूरोपीय देशों, चीन, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों से बेहद ठंडी प्रतिक्रिया मिली है।
पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति ने धमकी दी थी कि अगर ईरान 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों को “नष्ट” कर देगा।
अगले दिन ट्रंप ने ईरान में एक नेता के साथ बातचीत का हवाला देते हुए हमलों को स्थगित कर दिया, पहले पांच दिनों के लिए और फिर 10 दिनों के लिए।
‘व्हाइट हाउस हिस्टोरिकल एसोसिएशन’ के पूर्व मुख्य इतिहासकार एडवर्ड लेंगल ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘रोल कॉल’ से बातचीत में कहा, “युद्ध में कूदने के अपने कारणों का ठंडे दिमाग से और सोच-समझकर स्पष्टीकरण देने के बजाय ट्रंप कहीं अधिक आवेगी और भावुक लग रहे हैं। समस्या यह है कि किसी भी तरह से पीछे हटना या अपने रुख को नरम करना उनके अहंकार और दिखावे को ठेस पहुंचाता है।”
विदेश मामलों के विश्लेषक फरीद जकारिया ने ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में प्रकाशित लेख में कहा, “दुनिया के लिए अब अमेरिकी विश्वसनीयता जैसी कोई चीज नहीं रह गई है, बल्कि यह एक अजीबोगरीब रियलिटी टेलीविजन शो बन गया है, जिसमें मुख्य अभिनेता संकटों से बचते हुए इधर-उधर भटकता है, इस उम्मीद में कि आज वह जो कहेगा, उससे कल के बयान से पैदा हुआ संकट हल हो जाएगा।”
ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को स्थगित करने के ट्रंप के फैसले का सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने खूब मजाक उड़ाया।
‘टॉकिंग पॉइंट्स मेमो’ के संस्थापक जोश मार्शल ने सोशल मीडिया मंच ‘ब्लूस्काई’ पर एक पोस्ट में कहा, “यहां इतने टैको हैं कि एक न्यू मैक्सिकन रेस्तरां शृंखला शुरू की जा सकती है।”
“ट्रंप ऑलवेज चिकन्स आउट (टैको)” हैशटैग पिछले साल तब गढ़ा गया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और फिर पीछे हट गए थे।
कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम के प्रेस कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “टैको ट्यूजडे एक दिन पहले आ रहा है……।”
इस पोस्ट में मीडिया में आई उन खबरों का हवाला दिया गया है, जिनमें दावा किया गया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले बिना युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हैं।
‘प्यू रिसर्च’ की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग दस में से छह यानी 61 प्रतिशत अमेरिकी ईरान के साथ युद्ध को लेकर ट्रंप के रवैये से असहमत हैं। सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि 37 प्रतिशत लोग युद्ध के पक्ष में हैं।
भाषा पारुल जितेंद्र
जितेंद्र

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