अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप के 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को ‘अवैध’ करार दिया
अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप के 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को ‘अवैध’ करार दिया
(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, आठ मई (भाषा) अमेरिका की एक संघीय अदालत ने देश के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ को एक और झटका देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को ‘‘अवैध’’ और ‘‘कानून द्वारा अनधिकृत’’ करार देते हुए खारिज कर दिया है।
ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए व्यापक शुल्कों को खारिज करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी को भारत सहित सभी देशों पर 150 दिनों के लिए ये नए शुल्क लगाए गए थे।
उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) शुल्क लगाने की अनुमति नहीं देता।
अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सुनाए फैसले में कहा कि ट्रंप ने 10 प्रतिशत शुल्क लगाने के लिए 1974 के व्यापार अधिनियम के जिन प्रावधानों का इस्तेमाल किया, वे केवल भुगतान संतुलन संकट की स्थिति में ही प्रभावी हो सकते हैं।
अदालत ने एक के मुकाबले दो के बहुमत से कहा कि ट्रंप ने उस शुल्क अधिकार का अतिक्रमण किया जो संसद ने राष्ट्रपति को कानून के तहत दिया है। बहुमत ने अपने फैसले में कहा कि ये शुल्क ‘‘अमान्य’’ और ‘‘कानून द्वारा अनधिकृत’’ हैं।
न्यायाधीश मार्क ए बार्नेट और क्लेयर आर केली ने अपने फैसले में कहा कि यदि राष्ट्रपति को भुगतान संतुलन घाटे की पहचान करने के लिए उप-खातों में से चयन करने की शक्ति मिल जाती है, तो जब तक प्रत्येक उप-खाता संतुलित नहीं होता, राष्ट्रपति हमेशा भुगतान संतुलन घाटा दिखा सकेंगे।
दोनों न्यायाधीशों ने कहा कि कानून की ‘‘इस तरह की व्यापक व्याख्या’’ ट्रंप को शुल्क लगाने की वह असीमित शक्ति दे देगी, जो संसद के पास है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा की गई कानून की इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
न्यायाधीश टिमोथी सी स्टांस्यू ने अपने दोनों साथी न्यायाधीशों से असहमति जताई।
इस फैसले के खिलाफ अमेरिकी प्रशासन के अपील करने की संभावना है।
अदालत का फैसला सीधे तौर पर केवल तीन याचिकाकर्ताओं-वाशिंगटन राज्य और दो कंपनियों -मसाला कंपनी बर्लैप एंड बैरल तथा खिलौना कंपनी बेसिक फन पर लागू हुआ।
भारत और अमेरिका ने फरवरी में एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की रूपरेखा की घोषणा की थी, जिस पर अब उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद फिर से बातचीत की जा रही है।
भाषा सिम्मी रंजन
रंजन

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