अमेरिका, इजराइल के हमलों में खामेनेई की मौत के बाद विश्व नेताओं का बातचीत फिर शुरू करने का आह्वान
अमेरिका, इजराइल के हमलों में खामेनेई की मौत के बाद विश्व नेताओं का बातचीत फिर शुरू करने का आह्वान
ब्रसेल्स, एक मार्च (एपी) अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर के बीच कई देशों और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने शांति बनाए रखने तथा वार्ता के लिए जोरदार अपील की है। इस हमले के बाद क्षेत्र में हिंसा फैलने की आशंका और तनाव काफी बढ़ गया है।
रविवार सुबह ईरान की राजधानी में एक भीषण विस्फोट हुआ। इजराइली सेना ने एक दिन पहले तेहरान तक रास्ता साफ करने का दावा करने के बाद कहा कि वह शहर के “केंद्र” को निशाना बना रही है। इसी बीच, ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई जारी रखी तो वहीं कतर, कुवैत और बहरीन ने मिसाइलों की बौछार को रोकने का दावा किया।
हाल ही में हुई परमाणु वार्ता में तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले ओमान ने कहा कि रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर हमला हुआ और उसके दुक्म बंदरगाह को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया। इस बंदरगाह का उपयोग अमेरिकी नौसेना रसद केंद्र के रूप में करती है और यहां विमानवाहक पोत ठहर सकते हैं।
खामेनेई का निधन, जिनका कोई नामित उत्तराधिकारी नहीं था, संभवतः ईरान के भविष्य को अनिश्चितता में डाल देगा तथा व्यापक संघर्ष की पहले से ही बढ़ती चिंताओं को और बढ़ा देगा।
यूरोपीय संघ के 27 देशों के शीर्ष राजनयिक रविवार को ईरान से संबंधित स्थिति और संघ के लिए आगे के कदमों पर चर्चा करने के वास्ते एक आपातकालीन बैठक कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक शनिवार देर रात हुई।
संभवतः ट्रंप के साथ पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और खराब करने से बचने के लिए सतर्क रहते हुए, पश्चिम एशिया के कई देशों सहित कई देशों ने संयुक्त हमलों पर प्रत्यक्ष या स्पष्ट टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन तेहरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा की।
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अमेरिकी हमलों के लिए खुला समर्थन व्यक्त किया, जबकि रूस और चीन ने सीधे तौर पर आलोचना करते हुए जवाब दिया।
शनिवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख और कई देशों ने हमलों को रोकने तथा संघर्ष को क्षेत्र और उससे आगे फैलने से रोकने के लिए बातचीत की राह पर लौटने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने परिषद से कहा कि तनाव बढ़ने से रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “इसका विकल्प एक व्यापक संघर्ष की आशंका है जिसके नागरिकों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।”
गुतारेस ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है। उन्होंने बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के लिए ईरान के जवाबी हमलों की भी निंदा की।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका व इजराइली राजदूतों की ईरानी राजदूत से जबरदस्त बहस हुई।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने रविवार को ईरानी शासन से कहा, “होश में आ जाओ… और अलगाव तथा तनाव बढ़ने से पहले अपने पड़ोसियों के साथ तार्किक अंदाज में जिम्मेदारी से पेश आओ।”
वहीं, 22 देशों की अरब लीग ने ईरान के हमलों को “शांति का समर्थन करने और स्थिरता लाने की कोशिश करने वाले देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन” बताया।
यह समूह पहले भी इजराइल और ईरान के ऐसे कदमों की निंदा करता रहा है जिनसे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा हो सकता है।
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने रविवार को होने वाली बैठक की घोषणा करते हुए कहा, “ईरानी शासन द्वारा अपने पड़ोसियों पर किए जा रहे अंधाधुंध हमलों से क्षेत्र में एक व्यापक युद्ध छिड़ने का खतरा है, और हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। यह आवश्यक है कि युद्ध और आगे न फैले। ईरानी शासन को कुछ निर्णय लेने होंगे।”
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका-ईरान से फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके देश ईरान पर हुए हमलों में शामिल नहीं हैं, लेकिन वे अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
ये तीनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से समाधान की कोशिशों में आगे रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। ईरान को बिना सोचे समझे सैन्य हमले करने से बचना चाहिए। आखिर में, ईरानी लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने देना चाहिए।”
रूस के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को “पहले से तय और बिना उकसावे का, एक संप्रभु और संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश पर सशस्त्र हमला” बताया।
मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम की चिंता की ‘‘आड़’’ ले रहे हैं, जबकि उनका असली मकसद सत्ता को बदलना है।
इसी तरह चीन की सरकार ने कहा कि वह ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को लेकर “बहुत चिंतित” है। चीन ने सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया।
चीन के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, “ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके क्षेत्र की अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।”
वहीं, खामेनेई की मौत के बाद कई जगहों पर जहां विरोध प्रदर्शन देखने को मिला तो कुछ जगह लोग जश्न भी मनाते दिखे।
अधिकारियों ने बताया कि रविवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारियों द्वारा पाकिस्तान के बंदरगाह शहर कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर धावा बोले जाने के बाद पुलिस के साथ हुई झड़पों में कम से कम छह लोग मारे गए।
वहीं, भारत में कश्मीर में रविवार को हजारों लोगों ने अमेरिका और इजराइल द्वारा खामेनेई की हत्या की निंदा करते हुए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए।
न्यूयॉर्क से लेकर बर्लिन और उससे आगे तक, ईरानी प्रवासी समुदाय के सदस्यों और उनके समर्थकों द्वारा खामेनेई के शासन के अंत का जश्न मनाने के लिए प्रदर्शन भी आयोजित किए गए।
शनिवार दोपहर बर्लिन में ईरानी लोग जश्न मनाते हुए तेज संगीत पर नाचते और नारेबाजी करते नजर आए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ईरानी राजशाही के झंडे लहराए, साथ ही जर्मन, इजराइली और अमेरिकी झंडे भी प्रदर्शित किए गए।
एपी प्रशांत नेत्रपाल
नेत्रपाल

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