Chhattisgarh Naxal Surrender : एक महीने पहले ही नक्सलमुक्त हुआ छत्तीसगढ़ और ओड़िशा का ये बड़ा इलाका.. खुद शीर्ष पुलिस अफसरों ने किया ये बड़ा ऐलान
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में “पूना मारगेम–पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत 15 सशस्त्र माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। 73 लाख रुपये के इनामी इन नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया, जिसे बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।
Chhattisgarh Naxal Surrender / Image Source : IBC24
- महासमुंद में 15 सशस्त्र माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण।
- आत्मसमर्पण करने वालों पर कुल ₹73 लाख का इनाम घोषित था।
- 14 अत्याधुनिक हथियार, जिनमें AK-47, SLR और INSAS शामिल, किए गए जमा।
महासमुंद:Chhattisgarh Naxal Surrender छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से नक्सल मोर्चे पर ऐतिहासिक और बड़ी खबर सामने आई है। “पूना मारगेम–पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत बीबीएम डिवीजन के 15 सशस्त्र माओवादियों ने हथियार समर्पित कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें 9 महिला और 6 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इन सभी ने अपने अत्याधुनिक हथियारों के साथ एडीजी नक्सल, आईजी रायपुर, आईजी संबलपुर, एसपी महासमुंद, एसपी बरगढ़, एसपी बलांगीर एवं जिला पुलिस महासमुंद के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इन नक्सलियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
15 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
शासन द्वारा प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओडिशा स्टेट कमेटी के पश्चिमी सब-जोन अंतर्गत बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिविजनल कमेटी के सभी 15 माओवादियों ने हथियार त्यागकर संविधान और तिरंगा झंडा थाम लिया।naxal latest news इन नक्सलियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिसमें 1 स्टेट कमेटी सदस्य पर 25 लाख, 2 डिविजनल कमेटी सदस्य पर 8-8 लाख, 5 एरिया कमेटी सदस्य पर 5-5 लाख और 7 प्लाटून सदस्य पर 1-1 लाख रुपये का इनाम शामिल था।
आत्मसमर्पण के दौरान कुल 14 अत्याधुनिक हथियार जमा किए गए, जिनमें 3 AK-47, 2 SLR, 2 INSAS, 4 .303 और 3 बारह बोर बंदूकें शामिल हैं। सबसे वरिष्ठ आत्मसमर्पित माओवादी विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बावन्ना उर्फ राजन्ना (उम्र 57 वर्ष), जो स्टेट कमेटी सदस्य और बीबीएम डिवीजन प्रभारी था, उसने एके-47 के साथ आत्मसमर्पण किया।
“रायपुर संभाग आज नक्सल मुक्त हो गया”
पुलिस द्वारा लगातार संवाद, पोस्टर, बैनर, आकाशवाणी और पुनर्वास नीति के प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपील की जा रही थी। पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके साथियों को पुनर्वास योजना का लाभ लेते देख इन माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। एडीजी नक्सल ने कहा कि रायपुर संभाग आज नक्सल मुक्त हो गया है। वहीं आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का कहना है कि आ रही कठिनाइयों के कारण उन्होंने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।
रायपुर पुलिस रेंज के साथ-साथ ओडिशा का संबलपुर रेंज भी अब नक्सलमुक्त
गौरतलब है कि महासमुंद में 15 सशस्त्र माओवादियों का आत्मसमर्पण न केवल जिले बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। इस आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब-जोन पूरी तरह समाप्त हो गया है। रायपुर पुलिस रेंज के साथ-साथ ओडिशा का संबलपुर रेंज भी अब नक्सलमुक्त घोषित किया गया है। मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में इसे एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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