रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क के प्रावधान वाले विधेयक को ट्रंप का समर्थन: अमेरिकी सीनेटर
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क के प्रावधान वाले विधेयक को ट्रंप का समर्थन: अमेरिकी सीनेटर
(योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, आठ जनवरी (भाषा) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस विधेयक का समर्थन किया है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जा सकता है। इस कदम से व्हाइट हाउस को चीन और भारत जैसे देशों पर मॉस्को से सस्ता तेल खरीदना बंद करने का दबाव बनाने की व्यापक गुंजाइश मिलेगी।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बुधवार को कहा कि यह विधेयक चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ व्हाइट हाउस को “बेहद मजबूत दबाव बनाने का साधन” प्रदान करेगा, ताकि उन्हें रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
ग्राहम ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज राष्ट्रपति ट्रंप के साथ विभिन्न मुद्दों पर बेहद सार्थक बैठक के बाद उन्होंने उस द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं कई महीनों से सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और अन्य के साथ काम कर रहा हूं।”
उन्होंने कहा, “यह सही समय पर आया है, क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है, जबकि पुतिन केवल बयानबाजी कर रहे हैं और निर्दोष लोगों की हत्या जारी है। यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा, जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं।”
ग्राहम ने कहा कि यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर जबरदस्त दबाव बनाने का अधिकार देगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विधेयक पर “मजबूत” द्विदलीय समर्थन मिलेगा और इसे “संभवतः अगले सप्ताह की शुरुआत में” मतदान के लिए लाया जा सकता है।
ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया है, जो दुनिया में सबसे अधिक शुल्क वाले देशों में शामिल है। इनमें रूस से ऊर्जा खरीदने पर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है।
ग्राहम और सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट, 2025’ पेश किया है, जिसके तहत उन देशों पर द्वितीयक शुल्क और प्रतिबंध लगाए जाएंगे, “जो यूक्रेन में पुतिन के क्रूर युद्ध को वित्त पोषित करना जारी रखते हैं।”
इस विधेयक में रूसी तेल की द्वितीयक खरीद और पुनर्विक्रय पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव है, जिसे सीनेट की विदेश संबंध समिति के लगभग सभी सदस्यों का सह-प्रायोजन प्राप्त है।
ग्राहम और ब्लूमेंथल ने पिछले वर्ष एक संयुक्त बयान में कहा था, “रूस और यूक्रेन के बीच रक्तपात को समाप्त करने का अंतिम हथियार चीन, भारत और ब्राजील जैसे उन देशों पर शुल्क लगाना होगा, जो सस्ता रूसी तेल और गैस खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को सहारा दे रहे हैं।”
इस सप्ताह की शुरुआत में ग्राहम ने कहा था कि अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने उन्हें नयी दिल्ली द्वारा रूसी तेल की खरीद कम किए जाने की जानकारी दी है और उनसे राष्ट्रपति ट्रंप से भारत पर लगाए गए शुल्क में राहत देने का अनुरोध करने को कहा है।
रविवार को ‘एयर फोर्स वन’ में ट्रंप के साथ यात्रा के दौरान ग्राहम अपने शुल्क विधेयक पर बात कर रहे थे।
ट्रंप ने कहा कि प्रतिबंध रूस को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं और इस संदर्भ में भारत का भी उल्लेख किया।
ग्राहम ने कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया है। उन्होंने कहा, “करीब एक महीने पहले मैं भारतीय राजदूत के घर गया था और वह लगातार इस बारे में बात कर रहे थे कि भारत अब कम रूसी तेल खरीद रहा है। उन्होंने मुझसे कहा था कि क्या आप राष्ट्रपति से शुल्क में राहत देने के लिए कहेंगे?”
ग्राहम ने कहा, “यह तरीका काम करता है। यदि आप सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को चालू रखे हुए हैं, तो हम राष्ट्रपति को यह विकल्प देना चाहते हैं कि वह शुल्क के जरिए इसे एक कठिन फैसला बना सकें। मुझे वास्तव में विश्वास है कि भारत के मामले में ट्रंप ने जो किया, वही मुख्य कारण है कि भारत अब काफी कम रूसी तेल खरीद रहा है।”
पिछले महीने अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने वाशिंगटन डीसी स्थित भारत भवन, जो भारत के राजदूत का आधिकारिक आवास है, में ग्राहम, ब्लूमेंथल, शेल्डन व्हाइटहाउस, पीटर वेल्च, डैन सुलिवन और मार्कवेयन मुलिन समेत कई अमेरिकी सीनेटरों की मेजबानी की थी।
क्वात्रा ने ‘एक्स’ पर कहा था, “ऊर्जा और रक्षा सहयोग से लेकर व्यापार और महत्वपूर्ण वैश्विक घटनाक्रम और भारत-अमेरिका साझेदारी पर सार्थक चर्चा हुई। भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने के वास्ते उनके समर्थन के लिए आभार।’’
भाषा मनीषा देवेंद्र
देवेंद्र

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