अमेरिका बलपूर्वक ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में नहीं लेगा : ट्रंप
अमेरिका बलपूर्वक ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में नहीं लेगा : ट्रंप
(बरुण झा)
(तस्वीरों के साथ)
दावोस, 21 जनवरी (भाषा) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उनका देश ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने के लिए बल प्रयोग नहीं करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि केवल अमेरिका ही खनिज-समृद्ध इस द्वीप की रक्षा कर सकता है।
ग्रीनलैंड का मुद्दा अमेरिका के यूरोप के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र में है।
ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका में आर्थिक प्रगति हो रही है जबकि यूरोप ‘‘सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है’’।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने 70 मिनट लंबे भाषण में कहा, ‘‘ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है, तथा ग्रीनलैंड की रक्षा केवल अमेरिका ही कर सकता है।’’
उन्होंने शुल्क, पर्यावरण और आव्रजन सहित कई मुद्दों पर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सहयोगियों पर तीखा हमला किया।
उनके भाषण के बाद 20 मिनट का प्रश्नोत्तर सत्र हुआ।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपना दावा जताते हुए कहा, ‘‘हमने खूबसूरत डेनमार्क के लिए लड़ाई लड़ी, जो एक भूमि नहीं, बल्कि हिमखंड का एक बड़ा टुकड़ा है, जो ठंडे और दुर्गम स्थान पर स्थित है। यह उस चीज की तुलना में बहुत छोटी मांग है जो हमने उन्हें कई दशकों तक दी है। इसे वापस देना हमारी मूर्खता थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को लगा कि मैं बल प्रयोग करूंगा। मुझे बल प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है। मैं बल प्रयोग नहीं करूंगा।’’
ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क का अर्धस्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड अमेरिका, रूस और चीन के बीच एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है।
उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका को इसकी रणनीतिक कारणों से जरूरत है, दुर्लभ खनिजों के लिए नहीं।’’
ट्रंप ने कहा कि केवल अमेरिका ही ग्रीनलैंड की रक्षा कर सकता है, और कई यूरोपीय देशों ने भी कई क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब हमने ग्रीनलैंड को बचाया और डेनमार्क को सौंप दिया, तब हम एक महाशक्ति थे, लेकिन अब हम उससे कहीं अधिक शक्तिशाली हैं।’’
ट्रंप ने दावोस में अपने भाषण के दौरान डेनमार्क को ‘कृतघ्न’ करार दिया। उन्होंने अमेरिका द्वारा डेनमार्क से ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए तत्काल बातचीत का आह्वान किया।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने की अपनी योजना का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी थी।
राष्ट्रपति ने अमेरिका की आर्थिक शक्ति और वैश्विक समृद्धि पर भी बात करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका इस ग्रह का आर्थिक इंजन है…हम प्रतिभाशाली लोगों की रक्षा करना चाहते हैं क्योंकि ऐसे लोग बहुत कम हैं।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका को शुल्क से जो पैसा मिल रहा है, उसका उपयोग देश और उसके लोगों के हित में विवेकपूर्ण तरीके से किया जा रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि ‘‘जब अमेरिका आर्थिक रूप से फलता-फूलता है, तो पूरी दुनिया आर्थिक रूप से फलती-फूलती है।’’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘‘बहुत सारे दोस्तों’’ और ‘‘कुछ दुश्मनों’’ का अभिवादन करते हुए की।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी उन्हें चुनकर बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा, ‘‘दो साल पहले हम एक मृत देश थे, लेकिन अब हम फिर से जीवित हो गए हैं।’’
ट्रंप ने कहा, ‘‘हम दूसरे देशों पर कर बढ़ा रहे हैं ताकि उनसे हुए नुकसान की भरपाई कर सकें।’’
वेनेजुएला के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह कई वर्षों तक एक अद्भुत जगह रही है, लेकिन गलत नीतियों के कारण यह बर्बाद हो गई।
ट्रंप ने कहा, ‘‘हमला खत्म होने के बाद वेनेजुएला ने कहा कि चलो एक समझौता करते हैं।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश अगले छह महीनों में उतना पैसा कमाएगा जितना उसने छह वर्षों में कमाया था।
राष्ट्रपति ने ‘पर्यावरण लॉबी’ पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि चीन ‘‘यूरोप के मूर्ख लोगों को पवनचक्कियां बेचकर खूब पैसा कमा रहा है।’’
ट्रंप ने टिप्पणी की कि चीन में कोई पवनचक्की नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘‘पवनचक्कियां पक्षियों को मारती हैं, और मूर्ख लोग इन्हें खरीदते हैं… ऊर्जा से पैसा कमाना चाहिए, न कि नुकसान करना चाहिए। लोगों को तब नुकसान होता है जब उनकी जमीन पर पवनचक्कियां लग जाती हैं।’’ ट्रंप ने कनाडा का जिक्र करते हुए कहा कि उसे अमेरिका से बहुत सी मुफ्त सुविधाएं मिलती हैं और उस देश को अमेरिका का आभारी होना चाहिए।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मैंने उनसे ऐसा करने को कहा, क्योंकि आप लोग 30 सालों से हमें धोखा दे रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि वह हर देश के साथ काम करना चाहते हैं और किसी को बर्बाद नहीं करना चाहते, ‘‘लेकिन उन्हें करों का भुगतान न करके पैदा हुए घाटे की भरपाई करनी होगी।’’
भाषा धीरज शफीक
शफीक


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