ईरान के नये सर्वोच्च नेता मुजतबा कौन हैं, परिवर्तन लाएंगे या अधिक क्रूरता के साथ दमन होगा

ईरान के नये सर्वोच्च नेता मुजतबा कौन हैं, परिवर्तन लाएंगे या अधिक क्रूरता के साथ दमन होगा

ईरान के नये सर्वोच्च नेता मुजतबा कौन हैं, परिवर्तन लाएंगे या अधिक क्रूरता के साथ दमन होगा
Modified Date: March 9, 2026 / 05:14 pm IST
Published Date: March 9, 2026 5:14 pm IST

(मेहमत ओजाल्प, चार्ल्स स्टर्ट विश्वविद्यालय)

सिडनी, नौ मार्च (द कन्वरसेशन) रमजान के पवित्र महीने के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत, ईरान के इस्लामी गणराज्य के इतिहास के सबसे अहम मोड़ों में से एक है।

अली खामेनेई के उत्तराधिकारी और उनके पुत्र मुजतबा खामेनेई, 1979 की ईरानी क्रांति के बाद स्थापित क्रांतिकारी व्यवस्था में निरंतरता और विरोधाभास दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

दांव पर न केवल यह है कि ईरान का नेतृत्व कौन करेगा, बल्कि यह भी है कि वंशवादी शासन के अंत का वादा करने वाली क्रांति के लगभग आधी सदी बाद इस्लामी गणराज्य क्या बन गया है।

*कौन हैं मुजतबा खामेनेई

मुजतबा खामेनेई एक धर्मगुरु हैं जिन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय सार्वजनिक पद से दूर रहकर लेकिन सत्ता के करीब रहते हुए (सर्वोच्च नेता के कार्यालय में काम करते हुए) बिताया है।

उन्हें अक्सर एक औपचारिक पद धारण करने वाले सार्वजनिक राजनीतिक व्यक्ति के बजाय एक द्वारपाल और सत्ता के गलियारे के मध्यस्थ के रूप में देखा जाता था।

महज 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में संक्षिप्त रूप से सेवा दी थी। उन्होंने 1990 के दशक के उत्तरार्ध में जनता का ध्यान आकर्षित करना शुरू किया, क्योंकि उस समय तक उनके पिता की सत्ता सर्वोच्च नेता के रूप में सुदृढ़ रूप से स्थापित हो चुकी थी।

समय के साथ उनकी प्रतिष्ठा दो प्रमुख विशेषताओं पर केंद्रित हो गई है। पहली, ईरान के सुरक्षा तंत्र विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और इसके कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके घनिष्ठ संबंध। दूसरी, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी हस्तक्षेप के प्रति उनका कड़ा विरोध।

आलोचकों ने उन्हें 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन से जोड़ा है। यह भी माना जाता है कि उन्होंने ईरान के सरकारी प्रसारण संगठन पर प्रभाव डाला है, जिससे उन्हें देश के सूचना परिदृश्य और राज्य के विमर्श के कुछ हिस्सों पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण प्राप्त हुआ है।

वर्ष 2019 में ट्रंप प्रशासन ने मुजतबा पर प्रतिबंध लगा दिया था, उन पर आरोप था कि वे कोई औपचारिक सरकारी पद धारण किए बिना सर्वोच्च नेता की ओर से आधिकारिक क्षमता में कार्य कर रहे थे।

एक नेता के रूप में मुजतबा की वैधता

ईरान का संविधान यह निर्धारित करता है कि विशेषज्ञों की सभा (88 सदस्यीय धर्मगुरुओं का निकाय) सर्वोच्च नेता का चयन करती है।

सभा संभावित उम्मीदवारों की धार्मिक, राजनीतिक और नेतृत्व संबंधी योग्यताओं की सूची बनाती है। सभा के उम्मीदवारों की जांच उन संस्थानों के माध्यम से की जाती है जो अंततः सर्वोच्च नेता के प्रभाव से प्रभावित होते हैं, और इसकी विचार-विमर्श प्रक्रिया अपारदर्शी होती है।

आकलन करते समय यह भी महत्वपूर्ण है कि मुजतबा को एक व्यवहार्य सर्वोच्च नेता के रूप में क्यों देखा जाता है, जबकि उन पर यह आरोप लगाया जाता है कि उनके पास इस पद से जुड़ी पारंपरिक रूप से वरिष्ठ धर्म गुरु होने जैसी प्रतिष्ठा का अभाव है।

मध्यम श्रेणी के धर्मगुरु मुजतबा को 2022 में ही अयातुल्ला की उपाधि दे दी गई थी। सर्वोच्च नेता बनने के लिए यह उपाधि आवश्यक है। इसलिए इस पदोन्नति से संकेत मिलता है कि उन्हें अपने वृद्ध और बीमार पिता के बाद सत्ता संभालने के लिए तैयार किया जा रहा था।

क्रांति का मूलभूत मिथिक स्पष्ट रूप से वंशवाद-विरोधी थी। शाह को सत्ता से हटाने के बाद क्रांतिकारी नेताओं ने वंशानुगत शासन को अस्वीकार कर दिया था।

कई ईरानियों के लिए, एक पुत्र का अपने पिता के बाद सर्वोच्च नेता बनना एक वैचारिक पतन जैसा लगता है। यह शासन व्यवस्था प्रसिद्ध ‘न्यायविद के संरक्षक’ की बजाय एक धर्मतांत्रिक राजतंत्र की तरह अधिक प्रतीत होती है।

फिर इसका सटीक होना भी महत्वपूर्ण है। मुजतबा केवल वंश के आधार पर इस पद को प्राप्त नहीं कर सकते। विधानसभा द्वारा उनका चयन किया जाना आवश्यक है।

फिर भी, संविधानों को फिर से लिखे बिना भी राजनीतिक व्यवस्था वंशवादी बन सकती है। वंशवादी परिणाम तब उभरते हैं जब अनौपचारिक शक्ति नेटवर्क, जैसे पारिवारिक संबंध, राजनीतिक संरक्षण, सुरक्षा संबंध और मीडिया पर नियंत्रण, किसी एक उम्मीदवार को अधिक स्वाभाविक, सुरक्षित या अपरिहार्य के रूप में पेश करते हैं।

*ईरान में मुजतबा की कहानी वर्षों से यही रही है: एक ऐसा व्यक्ति जिसने चुनाव जीतकर नहीं, बल्कि देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने के मार्ग को नियंत्रित करके अपना प्रभाव स्थापित किया।

अली खामेनेई की मृत्यु की परिस्थितियां मुजतबा के सत्ता में आने को एक और पहलू से अहमियत प्रदान करती हैं और विडंबनापूर्ण रूप से वैधता भी प्रदान करती हैं।

कई शिया मुसलमानों के लिए रमजान के दौरान हत्या का गहरा प्रतीकात्मक महत्व है। शिया धर्म के पहले इमाम अली इब्न अबी तालिब को अपनी जान 661 ईस्वी में रमजान की सुबह की नमाज के दौरान एक हमले में गंवानी पड़ी थी, जिसे आज भी शिया मुसलमान हर साल याद करते हैं।

शिया लोगों के ऐतिहासिक स्मृति स्मारक शहादत पर विशेष बल देते हैं। विशेष रूप से पैगंबर मुहम्मद के नावसे हुसैन इब्न अली की कर्बला में शहादत न्याय और उत्पीड़न के बीच संघर्ष का प्रतीक है।

इस परंपरा के कारण, अतीत और वर्तमान में नेताओं की हिंसक हमले में मौत को बलिदान और प्रतिरोध की व्यापक कहानी के संदर्भ में देखा जाता है।

ईरान की क्रांतिकारी विचारधारा लंबे समय से इन्हीं विषयों पर आधारित रही है। यदि सरकार खामेनेई की मृत्यु को इस तरह प्रस्तुत करती है, तो इससे शहादत और विद्रोह की कहानी को बल मिल सकता है।

इससे उनके बेटे मुजतबा को धार्मिक वैधता का आभामंडल प्रदान करता है जो शिया मुस्लिम लोगों की मानसिकता में बहुत प्रबलता के साथ समाया हुआ है।

वह अपने पिता से कितना भिन्न होंगे?

ईरान के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसका उत्तर संभवतः उतना भिन्न नहीं होगा जितना कई लोग उम्मीद कर रहे होंगे। अली खामेनेई क्रांतिकारी पीढ़ी के एक प्रमुख व्यक्ति थे। उनकी सत्ता वैचारिक वैधता, दशकों तक सत्ता संचय और सुदृढ़ीकरण और प्रतिस्पर्धी गुटों के बीच मध्यस्थता करने की उनकी क्षमता पर आधारित था। समय के साथ वे व्यवस्था के अंतिम निर्णायक बन गए।

इसके विपरीत, मुजतबा खामेनेई को अक्सर एक सार्वजनिक धर्मशास्त्री या राजनीतिक नेता के बजाय रक्षा प्रतिष्ठान की उपज के रूप में चित्रित किया जाता है। वे अपने भाषणों या धार्मिक अधिकार के बजाय अपने प्रभाव और पर्दे के पीछे समन्वय के लिए बनाए गए नेटवर्क के लिए अधिक जाने जाते हैं।

मुजतबा खामेनेई की छवि एक अधिक सुरक्षा-केंद्रित नेतृत्व शैली का संकेत देती है, जिसके तीन संभावित रास्ते हैं। पहला, घरेलू नियंत्रण और सख्त हो सकता है। रक्षा प्रतिष्ठान से मुजतबा के कथित संबंधों को देखते हुए, अशांति को राजनीतिक सुलह के बजाय त्वरित दमन से दबाए जाने की अधिक संभावना है।

दूसरा, मुजतबा के सुरक्षा बलों के साथ घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए आईआरजीसी क्षेत्रीय मामलों में अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। तीसरा, पश्चिम के साथ कोई भी परिवर्तनकारी वार्ता होने के बजाय सामरिक रणनीति के इस्तेमाल की संभावना होगी।

संक्षेप में, मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान संभवतः बयानबाजी के स्तर पर टकरावपूर्ण रुख अपनाएगा, लेकिन शासन के अस्तित्व के खतरे में पड़ने पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएगा।

(द कन्वरसेशन) संतोष रंजन

रंजन


लेखक के बारे में