मुझे सपने देखने के बाद इतनी थकान क्यों महसूस होती है?
मुझे सपने देखने के बाद इतनी थकान क्यों महसूस होती है?
(याकूत फातिमा, डेनिएल विल्सन, निसरीन औइरा, सनशाइन कोस्ट विश्वविद्यालय)
क्वींसलैंड (ऑस्ट्रेलिया), 27 मई (द कन्वरसेशन) कभी-कभी सुबह उठने पर सिर भारी लगता है, शरीर थका-थका महसूस होता है और नींद पूरी होने के बावजूद ताजगी का अहसास नहीं होता। ऐसा लगता है मानो पूरी रात सपनों में ही गुजरी हो।
लेकिन क्या सचमुच ज्यादा सपने देखना आपको थका देता है? आइए समझते हैं कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है।
हम सभी सपने देखते हैं, लेकिन हर किसी को वे याद नहीं रहते।
ज्यादातर सपने ‘तीव्र नेत्र-गति नींद’ (रैपिड आई मूवमेंट स्लीप) के दौरान आते हैं। यह हमारी पूरी नींद का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा होती है।
पूरी रात में ‘तीव्र नेत्र-गति’ (रैपीड आई मूवमेंट… आरईएम) के चार से छह चक्र होते हैं और सुबह आते-आते हर चक्र लंबा होता जाता है। हम सभी सपने देखते हैं और ज्यादातर लोग रात में कई बार सपने देखते हैं, चाहे उन्हें वे याद रहें या नहीं।
अगर आपकी नींद ‘आरईएम’ चरण के दौरान या उसके तुरंत बाद खुलती है, तो सपने याद रहने की संभावना ज्यादा होती है।
सपना याद रहेगा या नहीं, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह सपना कितना भावनात्मक था, रात में आपकी नींद कितनी बार टूटी और आपका मस्तिष्क यादों को किस तरह सुरक्षित रखता है।
जिन लोगों को अक्सर बेहद जीवंत और भावनात्मक सपने याद रहते हैं, उनकी नींद आमतौर पर हल्की और बार-बार टूटने वाली होती है।
सपने देखते समय मस्तिष्क में क्या होता है?
‘आरईएम’ नींद के दौरान आपका मस्तिष्क लगभग उतनी ही सक्रियता से काम करता है, जितना जागते समय करता है, जबकि शरीर पूरी तरह स्थिर रहता है। इस दौरान मांसपेशियां लगभग निष्क्रिय हो जाती हैं, ताकि व्यक्ति सपनों में हो रही गतिविधियों को वास्तविक रूप से न करने लगे।
इसी समय मस्तिष्क के ‘अमिगडाला’, ‘हिप्पोकैम्पस’ और ‘थैलेमस’ जैसे, भावनाओं को नियंत्रित करने वाले हिस्से बेहद सक्रिय हो जाते हैं। दूसरी ओर, तार्किक और विवेकपूर्ण सोच को नियंत्रित करने वाला ‘प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहता है।
यही वजह है कि सपने बेहद जीवंत और भावनात्मक लगते हैं। वे पूरी तरह वास्तविक महसूस होते हैं, भले ही उनमें कोई तार्किक क्रम न हो। यह पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है।
सपने कितनी देर तक रहते हैं? क्या हम इसका सही अंदाजा लगा पाते हैं?
ज्यादातर लोग मानते हैं कि सपने बहुत छोटे और बिखरे हुए होते हैं।
लेकिन शोध कुछ और बताते हैं। ‘आरईएम’ नींद में आने वाले सपने लगभग वास्तविक समय के हिसाब से ही आगे बढ़ते हैं।
जब वैज्ञानिकों ने लोगों को ‘आरईएम’ नींद के दौरान जगाकर उनसे उनके सपनों के बारे में पूछा, तो पता चला कि उनके सपनों का विवरण उस समयावधि से काफी मेल खाता था, जितनी देर वे ‘आरईएम’ नींद के चरण में थे। यानी अगर सपना 20 मिनट लंबा महसूस हुआ, तो संभव है कि वह वास्तव में लगभग उतनी ही देर चला हो।
लोग आमतौर पर इस बात का गलत अनुमान लगाते हैं कि उन्होंने पूरी रात का कितना हिस्सा सपने देखते हुए बिताया।
तनावपूर्ण या बेहद जीवंत सपने लंबे महसूस होते हैं और लंबे समय तक याद रहते हैं, जबकि साधारण सपने आंख खुलने से पहले ही यादों से मिट जाते हैं।
इसके अलावा, हमें वही सपने सबसे ज्यादा याद रहते हैं, जिनके दौरान हमारी नींद खुली हो।
ऐसे में जो व्यक्ति कहता है कि उसने पूरी रात सपने देखे, संभव है उसकी ‘आरईएम’ नींद बिल्कुल सामान्य रही हो। फर्क सिर्फ इतना है कि उसकी आंखें उन भावनात्मक सपनों के दौरान खुलीं, जो दिमाग में रह गए।
तो क्या सपने देखना वास्तव में थका देता है?
‘आरईएम’ नींद के दौरान मस्तिष्क को वह आराम नहीं मिलता, जो गहरी नींद में मिलता है। फिर भी, मस्तिष्क की ऊर्जा खर्च पर हुए अध्ययन बताते हैं कि सिर्फ इसी वजह से थकान महसूस नहीं होती।
सामान्य तौर पर सपने देखना आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करता, जब तक कि वे डरावने सपनों यानी ‘नाइटमेयर’ का रूप न ले लें।
इसका सीधा कारण यह है कि अगर आपको सपना याद है, तो संभवतः आपकी नींद उसके दौरान खुल गई थी। ऐसी छोटी-छोटी जागृतियां, भले ही आपको पूरी तरह महसूस न हों, लेकिन गहरी नींद का समय कम कर देती हैं।
इन बाधाओं के कारण मस्तिष्क को ‘एडेनोसिन’ नामक रासायनिक अपशिष्ट को साफ करने का पर्याप्त मौका नहीं मिलता। दिनभर यह पदार्थ मस्तिष्क में जमा होता रहता है और जैसे-जैसे इसकी मात्रा बढ़ती है, नींद का दबाव भी बढ़ता जाता है।
नींद का एक महत्वपूर्ण काम इसी एडेनोसिन को साफ करना है और यह प्रक्रिया गहरी नींद में सबसे प्रभावी होती है। अगर नींद बीच में टूट जाए, तो अगले दिन ज्यादा थकान महसूस हो सकती है।
‘आरईएम’ नींद से अचानक जागना शरीर के लिए हल्की नींद से जागने की तुलना में ज्यादा कठिन होता है। इससे ‘स्लीप इनर्शिया’ की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें दिमाग सुस्त और धुंधला महसूस करता है तथा पूरी तरह सक्रिय होने में समय लेता है।
यानी थकान का कारण सपने नहीं, बल्कि यह होता है कि आपकी नींद कब टूटी और आप नींद के किस चरण से जागे।
अपनी नींद की गुणवत्ता पर ध्यान दें
जब नींद पूरी नहीं होती या बार-बार बीच में खुल जाती है, तो मस्तिष्क अगली रातों में इसकी भरपाई करने के लिए ‘आरईएम’ नींद का हिस्सा बढ़ा देता है। इसे ‘आरईएम रिबाउंड’ कहा जाता है।
यह कोई समस्या नहीं, बल्कि शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। असली समस्या वह कारण है, जो आपकी नींद को बार-बार बाधित कर रहा है।
अगर आपको अक्सर ज्यादातर सपने याद रहते हैं, महसूस होता है कि सपनों की संख्या बढ़ गई है या लगभग हर सुबह उठने पर थकान महसूस होती है, तो संभव है आपकी नींद बार-बार खुली है और मस्तिष्क को उसकी जरूरत के अनुसार गहरी नींद नहीं मिल पा रही है।
अगर ऐसा लगातार हो रहा है और इसका असर आपके दिनभर के कामकाज और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होगा।
द कन्वरसेशन
खारी मनीषा
मनीषा

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