समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता के लिए दायर याचिका पर अदालत ने केंद्र से मांगा जवाब

समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता के लिए दायर याचिका पर अदालत ने केंद्र से मांगा जवाब

समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता के लिए दायर याचिका पर अदालत ने केंद्र से मांगा जवाब
Modified Date: November 29, 2022 / 08:32 pm IST
Published Date: November 19, 2020 10:12 am IST

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से हिंदू विवाह अधिनियम (एचएमए) और विशेष विवाह अधिनियम (एसएमए) के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के अनुरोध को लेकर दायर जनहित याचिका पर जवाब देने को कहा। न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति आशा मेनन की पीठ ने याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और उसे चार सप्ताह के भीतर इसके जवाब में हलफनामा दायर करने को कहा।

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अदालत ने केंद्र से एक अतिरिक्त हलफनामे में याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर प्रतिक्रिया देने को भी कहा है। याचिकाकर्ता अभिजीत अय्यर मित्रा और तीन अन्य ने याचिका में दावा किया है कि सहमति वाले समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बावजूद समलैंगिक जोड़ों के बीच विवाह संभव नहीं हो पा रहा है।

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पीठ ने इस याचिका को दो अन्य याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया। पहली याचिका दो महिलाओं ने दायर की है, जिसमें उन्होंने एसएमए के तहत शादी करने की अनुमति देने का आग्रह किया है और इस कानून में समलैंगिक शादी को शामिल नहीं करने के प्रावधानों को चुनौती दी है, जबकि दूसरी याचिका दो पुरुषों ने दायर की है, जिन्होंने अमेरिका में शादी की थी लेकिन विदेश विवाह अधिनियम (एफएमए) के तहत उनकी शादी को पंजीकृत नहीं किया गया।

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अब तीनों याचिकाओं को 8 जनवरी 2021 को अगली सुनवाई के लिए एक साथ सूचीबद्ध किया गया है। उच्च न्यायालय ने पहले दोनों महिलाओं द्वारा दायर याचिका पर केंद्र एवं दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था और साथ ही केंद्र सरकार तथा न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास से दोनों पुरुषों द्वारा दायर याचिका का जवाब देने को कहा था।

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केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने किया। समान अधिकार कार्यकर्ताओं मित्रा, गोपी शंकर एम, गीति थडानी और जी. उर्वशी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि समलैंगिक यौन संबंधों को शीर्ष अदालत ने अपराधी की श्रेणी से बाहर किया है लेकिन एचएमए के प्रावधानों के तहत अभी भी समलैंगिक विवाह की अनुमति नहीं दी जा रही है।

 


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